पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३४६

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३४० बालसरस्वती-बालाघाट बालसरस्वती-बालसरस्वतीय काव्यरचयिता । इनका १३ पत्नी, भार्या। १४ स्त्री, औरत । १५ पुती, दूसरा नाम मदन भी था। कन्या । १६ सुगन्धवाला । १७ सूक्ष्म-एला, छोटी इला- बालसांगड़ा ( हिं० पु० ) कुश्तीका एक पेंच। यची। १८ चीनी ककड़ी। १६ दश महाविद्याओंमेसे बालसात्म्य ( स० क्ली०) दुग्ध, दूध । एक महाविद्याका नाम । २० गेहूं की फसलको मष्ट बालसूरि-हेमाद्रिसर्वप्रायश्चित्तके प्रणेता। करनेवाली एक प्रकारकी कीड़ी । २१ एक वर्णवृत्त । बालसूर्य ( स० क्ली० ) बालः सूर्य इव । १ वैदूर्यमणि । २. इसके प्रत्येक चरणमें तीन रगण और एक गुरु होता है। प्रातःकालीन सूर्य, उदयकालके सूर्य । बाला (फा० पु०) ऊचा, जो ऊपरकी ओर हो। बालसूर्यक ( स० क्ली० ) बालसूर्य एव स्वार्थे कन् । बालाई ( हिं० स्त्री० ) मलाई देखो। वेदूर्गमणि । बालाई (फा० वि०) १ ऊपरी, ऊपरका । २ निश्चत आय- बालस्थान ( स० क्ली० ) १ बाल्यावस्था, लड़कपन । २. के सिवा। शिशुत्व। बालाकि (संपु०) बलाकाया अपत्यं वाह्लादित्वात् बालहस्त ( स० पु०) बाला हस्त इव मक्षिकादीनां निवा- इम्। (पा ४१॥९६ ) गाग्यऋषिभेद । रक त्वात् । १ बालधि, पूछ। (नि.) बालानां केशानां बालाकुप्पी ( फा० स्त्री० ) प्राचीनकालका एक प्रकारका हस्तः समूहः। २ केशसमूह । दण्ड जो अपराधियोंको शारीरिक कष्ट पहुंचानेके लिये बाला ( स० स्त्री० ) बालाः केशा इव पदार्थों विद्यन्ते दिया जाता था। इसमें अपराधीको एक छोटी पीढ़ी यस्याः, बाल-'अर्शआदित्यादच' ततष्टाप् । नारिकेल, पर, जो ऊचे खंभेसे लटकती होती थी, बैठा देते थे। नारियल । २ हरिद्रा, हलदी। ३ मल्लिकाभेद, बेलेका पौधा। फिर उस पीढ़ीको रस्सीके सहारे ऊपर खींच कर एक ४ अलङ्कारभेद, एक प्रकारका कड़ा । ५ मेध्य, खैर। ६ दमसे नीचे गिरा देते थे। इसमें आदमीके प्राण तो बुटि, नुकसान । ७ घृतकुमारी, धी-कुआर। ८ होवेर । नहीं जाते थे, पर उसे बहुत अधिक शारीरिक कष्ट होता ६ अम्बष्ठा, ब्राह्मणीलता। १० नीलझिएटी, नीली कट- था। सरैया। ११ एक वर्ष वयस्का गवी, एक वर्ष की अव- | बालाक्षी ( स० स्त्री० ) बालाः केशा इव अक्षिस पुष्पं स्थाका गाय। १२ षोडशवर्षीया स्त्री, बारह-तेरह वर्ष से सोलह-सवरह वर्ष तककी अवस्थाकी स्त्री। यह स्त्री यस्याः। केशपुष्पावृक्ष । पर्याय-मानसी, दुर्गपुष्पी, केशधारिणी। प्रोष्म और शरस्कालमें प्रशंसनीया और हर्षदायिनी है। भावप्रकाशमें लिखा है, कि बालास्त्रोका सेवन करनेसे बालाखाना ( फा० पु० ) मकानके ऊपरका कमरा, कोठे- पलवृद्धि होती है। के ऊपरकी बैठक। "नित्य बाला सेव्यमाना नित्य बर्द्धयते बलं ।' बालाघाट-दाक्षिणात्यके कर्णाटक प्रदेशके प्राचीन बिजय- (भावप्रकाश) नगर राज्यके अन्तर्गत एक जिला । जो जिला घाट- कन्यामात्रमें ही इस शब्दका प्रयोग देखा जाता है। पर्वतमालाके ऊपर अवस्थित था उसे बालाघाट और जी पांच वर्ष की कन्याको भी वाला कहते हैं। नीचे था उसे पयनघाट कहते थे। यह अक्षा० ८.१०से “पञ्चवर्षा स्मृतावाला" (हारीत १५) ८१६३० तथा देशा० ७७२० से ८१० पू०के मध्य दो षष से कम उमरवालीको भी बाला कहते हैं। विस्तृत था। स्थानीय अधिवासी बेलारी, कणू ल और इनकी मृत्यु पर उदकक्रिया और अग्निसंस्कार नहीं | कड़ापा जिलेको आज भी बालाघाट कहते हैं। होता। इनकी मृतदेह अमीनमें गाड़ी जाती है। बालाघाट-मध्यप्रदेशके नागपुर विभागके अन्तर्गत एक __"अजातदन्ता ये वाला ये च गर्भाद्विनिःसृताः। जिला । यह अक्षा० २१.१६ से २२ २४ उ० तथा देशा० न तेषामग्निसंस्कारो न पिण्ड' नोदकक्रिया ॥", ७६३६ से ८१३ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरि- (गरुड़पु० १०७ अ०)| माण ३५३२ वर्गमील है। इसके उत्तरमें मण्डला जिला,