पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३४८

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वालामो भावजीवालापुर शिवाजी और सम्भाजीके बन्दित्वमोचन तथा अंग- बालाजी लक्ष्मण-खानदेशके एक महाराष्ट्री शासनकर्ता । रेजोंके साथ राजकारणके उपलक्षमें आप ही अपने ! १८०४ ईमें इन्होंने कोपरगांवके सात हजार भीलोंको मालिकके दाहिने हाथ बने थे। दिल्लीमें रहते हुए आप | किसी बहानेमें डाल कर पकड़वाया था और उनमेंसे होने मिठाईकी डलियामें रख कर शलके हाथसे शिवाजी अधिकांशको दो कूभोंमें डलवाया था। . और शम्भाजीकी रक्षा की थी। बालाजी बाजीराव-महारष्ट्र-राज्यके तीसरे पेशवा । आप उनकी सेवा, भक्ति और निष्ठा पर शिवाजी मुग्ध थे और १म पेशवा बाजीरावके पुत्र थे। बालाराव पण्डित- इसी लिये उनका बालाजी पर विशेष स्नेह था। इनकी प्रधानके नामसे ये जनसाधारणमें मशहूर थे। १७४० ई० बिना सलाह लिये वे कोई भी काम न करते थे। इस | में आप पिताके सिंहासन पर मढ़ हुए और १७६१ ई०में तरह चटनीस आवजी धीरे धीरे सर्वध्यक्ष हो गये। पानीपतकी लड़ाई में मौजूद थे। इस युद्ध में इनके ज्येष्ठ उधर मुख्य प्रधान मोरोपन्त पिंगले ईर्षावश इन्हें अप- पुत्र विश्वासराव मारे गये। आपके अन्य दो पुत्र मधुराव दस्थ करनेके अभिप्रायसे इनके छिद्र ढूढने लगे। चिट और नारायणरावको क्रमशः पेशवा पद प्राप्त हुआ। मीस-पुत्र आवजी बालाके उपनयन संस्कारके समय पेशवा देखो। ब्राह्मण-प्रवर मोरोपन्तने गड़बड़ मचाई, कि कलिमें कोई बालाजी विश्वनाथ-महाराष्ट्रराज्यमें पेशवा नामक बाह्मण क्षत्रिय नहीं है, इसलिये क्षत्रियोचित संस्कारमें कायस्थों- वंशके प्रतिष्ठाता। पहले पहल आप कोडणप्रदेशके एक का अधिकार नहीं हो सकता। कुछ भी हो, बहुत बाद प्रामके पटवारी थे। वहांसे फिर यादववंशीय एक सरदार- विवाद के बाद वालाजीने पुत्रकी उपनयन-क्रिया स्थगित के अधीन काम करने लगे। यहीं पर इनकी गुप्त प्रतिभा कर दी। शिवाजीको मालूम होते ही उन्होंने काशीके | विकसित हुई। महाराष्ट्र-पति शम्भाजीके पुत्र शाहुके पंडितोंका अभिमत संग्रह करनेका आदेश दिया। उसके राज्यकालमें आप पेशवा-पद पर नियुक्त हुऐ। इस समय अनुसार बालाजीने काशीको विद्वन्मण्डलीके सम्मतिपत्र पे राज्यके सर्वेसर्वा थे। १७२० ईमें इनकी मृत्यु होने संग्रह किये। पर प्रथम पुत्र बाजीराव पेशवाने राज्यका शासन किया राज्याभिषेकके समय शिवाजीका भी उपनयनादि था। पेशवा देखो। संस्कार नहीं हुए थे। बालाजी आवजीने विशेष उद्योग- बालाएडा .. २४ परगनेके अन्तर्गत एक परगना । यह कल- के साथ पण्डितप्रवर गागाभट्टकी शास्त्रीय युक्तिके अनु- कलेके पूर्व और सुन्दरबनके उत्तरमें अवस्थित है। सार प्रौढ अवस्था में शिवाजीका यज्ञोपवीत कराया और हारुभा, गोसाईपुर, हादीपुर, नायाबाद, माजियाण्टी, राज्याभिषिक्त किया। शिवाजीने प्रसन्न हो कर इन्हें वेदारी, खाटरी जनार्दनपुर, चाँदपुर, हरिपुर, गोपालपुर पुश्तैनी 'चिटनीस' ( Chil secretary ) पद प्रदान आदि ग्राम यहाँके प्रधान बाणिज्यस्थान हैं । हारुआ प्राम- किया। शियाजीके अभिषेकके बाद 'चिटनीस'-प्रवर में पीर गोराचांदका प्रसिद्ध समाधिमन्दिर विद्यमान है। बालाजीने अपने ज्येष्ठ पुत्र आबाजी बालाकी उपनयन- बालादस्ती (फास्त्री०) १ अनुचित रूपसे हस्तगत करना, क्रिया सम्पन्न की। इस उत्सवमें गागाभट्ट आदि बहुत- नामुनासिब तौरसे वसूल करना। २ बल प्रयोग, जबर- से प्रसिद्ध पण्डित उपस्थित हुए थे और यथारीति दस्ती। कायस्थ-प्रभुने संस्कारादि कराये थे। बालादित्य (सं० पु०) १ नवोदित सूर्य। २ काश्मीरके एक इसके बाद सम्भाजीके राज्याधिकारको ले कर महा. राजा। मगध और काश्मीर देखो। राष्ट्र राज्यमें फिर गड़बड़ी मची। उसमें, बालाजी बालापन (हिं० पु०) लड़कपन, बचपन । आवजी अन्यान्य मंत्रियों के साथ इस मामलेमें शामिल न होने पर भी सम्भाजीके आदेशसे १६०३ शकाब्द बालापुर-१ बरारके अकोला जिलेका तालुक । यह अक्षा (१६८१ ई०)-में वे हाथोके पैरों तले दबा कर मरवा दिये २०१७ से २०५५ ३० तथा देशा० ७६४५७७ पू०. गये। | के मध्य अबस्थित है। जनसंखया प्रायः १०१६७ है।