पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३५०

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बालाहिसार-वालि इस राज्यमें ९८ ग्राम लगते हैं। जनसंख्या साढ़े टपक पड़ो। बूंदके गिरनेके साथही उससे एक बानर तीन हजारके करीब है। यहांकी जमीन बड़ी उपजाऊ पैदा हुआ, जिसका नाम ऋक्षराज था। ब्रह्माने उसे देख है। ज्वार, धान, तेलहन और रुई काफी उपजती है। यहां कर कहा, "हे बानर ! तू इस अमरोंकी विहार-भूमि १२ स्कूल और २ अस्पताल हैं। सुमेरु पर्वत पर आ कर नाना प्रकारके फल-मूल खाता २ उक्त राज्यको राजधानी । यह अक्षा० २२५६ उ० हुआ हमेशा मेरे पास रह ।" तथा देशा० ७३ २५ पू०के मध्य शेरी नदीके किनारे ____एक दिन यह बानर पिपासासे अत्यन्त आतुर हो अवस्थित है। जनसख्या प्रायः ८५३० है। पत्थरको कर उत्तर-मेरु-शिखरकी तरफ चल दिया। वहां एक दीवार शहरके चारों ओर दौड गई है. उसमें चार फाटक सरोवरके गानीमें अपनी मुंहकी छाया देख कर सोचने लगे हुए हैं । शहरके उत्तर एक उच्च स्थान पर नवाबका लगा, यह तो मेरे जैसा दीखता है, यह मेरा परम शत्रु है, प्रासाद अवस्थित है । शहरसे तीन मील दूर एक पहाड़ी इसलिये इसे शीघ्र ही मार डालना चाहिये। यह विचार पर उंगरिया महादेवके उद्देश्यसे अगस्त मासमें बार्षिक कर वह पानीमें कूद पड़ा। पश्चात् वह बानर सरोवर- मेला लगता है। से निकला और एक मनोहर स्त्रीका रूप धारण किया। बालाहिसार-काबुलके सोमान्त देशवत्तो एक नगर।। इतनेमें इन्द्र और सूर्य दोनों ही वहां आ पहुंचे और उस इसे 'काबुलका द्वार भी कह सकते हैं । १८४१ ई० में यहां कामिनोको देख कर कामदेवके वशीभूत हो गये । क्रमशः अंगरेजो-सेनाने आश्रय ग्रहण किया था। यहां शाहसुजा- उनका धैर्य च्युत हुआ। आखिर उस रमणीको न पा का राजप्रासाद और तोरणस्तम्भ है। जब पहले पहल | | कर इन्द्र उसके मस्तक पर स्खलित वीर्य निक्षेप कर अंगरेजोंने यहां सेनानिवास खोलना चाहा तब सुजाने निवृत्त हुए । उधर दिवाकर भी मन्मथके बाणोंसे घायल आपत्ति की, पर आखिर वे सम्मति देनेको वाध्य हुए। थे, उन्होंने भी उसकी प्रीवामें निषिक्त वीज निक्षेप किया। बालासन-दार्जिलिङ्ग जिलेमें प्रवाहित एक नदी। यह इस प्रकार इन्द्र और सूर्य दोनोंने मदन-ध्यथासे छटकारा जगत्लेपछा नामक भूभागसे निकल कर तराईको ओर पाया। बादमें उस कामिनीने इन्द्र के बीजको अमोघ आ दो भागोंमें विभक्त हो गई है। नूतन बालासन जान कर उससे सर्वश्रेष्ठ बानरका जन्म दिया जिसका नामक साखा शिलिगुडीके दक्षिण महानदीमें मिली है नाम हुआ बालि और प्रीवामें पतित वीर्यसे सुग्रीव और दूसरी पूर्णिया जिला होती हुई बह गई है। इस उत्पन्न हुए। इस तरह इन्द्रसे बालि और सूर्यसे सुप्रीव- नदीतोरवी पहाड़ी जंगलमय तराई प्रदेशमें नाना द्रष्यों को उत्पत्ति है। की खेती होती है। ____ उस दिनके बात जाने पर ऋक्षराजने फिर बानर-रूप बालासुर (सं० पु०) असुरभेद । प्राप्त किया और अपने दोनों पुत्रोंको ले कर ब्रह्माके पास बालाहेरा --राजपूतानेके जयपुर राज्यके अन्तर्गत एक पहुंचे। ब्रह्माने उन्हें किष्किन्धामें जा कर राज्य करने. नगर । यह अक्षा० २६५७ उ० तथा देशा० ७६४७ पू० को आशा दी। विश्वामित्रने यहां मनोरम पुरी निर्माण आगरेसे अजमीर जानेके गिरिपथ पर अवस्थित है। की थी। बालि उसी नगरीमें जा कर बानरोंका राजा बन यहांका पहाडीदुर्ग १८वीं शताब्दीके शेष भागमें शिन्दे कर राज्य करने लगे। ये दोनों भाई अत्यत बलशाली सेनापति ति बायनीसे विध्वस्त हुआ था। थे, तीनों लोकमें इनकी शानका कोई न था । बालिकी बालि (सं० पु०) बानरोंके अधिपति । पर्याय-ऐन्द्र, बाली। प्रधान महिषीका नाम तारा था और सुग्रीवकी स्त्रीका ___रामायणमें लिखा है,---मेरु नामका एक श्रेष्ठ पर्वत नाम रुमा। . है। इस पर्वतके किसी एक शिखर पर ब्रह्म-सभा प्रति- एक दिन किसी मायावो दैत्यके उपद्रवके कारण, ष्ठित है। एक दिन कमल-योनि ब्रह्मा वहां योगाभ्यास बालि अपने भाईको पातालके द्वार पर बिठा कर स्वयं कर रहे थे कि इतने में सहसा उनके नेत्रोंसे आंसूकी बूंद दैत्योंके विनाशके लिए पाताल चला गया। इधर अधिक