पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३५३

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पासि-पालिघाटियम इस्ति, सर्प, हिरण आदि पशुपक्षी भयंकर शब्द करने | बालि-१ हुगली जिलेके आरामबाग उपविभागका एक लगे। जलके झरने टूट कर भयंकर आवाज होमेसे प्राम। यह अक्षा० २२४६ उ० तथा देशा० ८७° ४६ वृक्षके समूह उखड़ गये। इस प्रकार कैलाश पर्वत | पू. द्वारिकेश्वर नदीके किनारे अवस्थित है। जनसंख्या चलायमान हुआ। ७१२ है। रेशमी और सूती कपड़े का यहां अच्छा व्यव- भगवान् बालि ध्यानमें मग्न थे। कैलाश पर्वतके | साय होता है। २ भागीरथी तीरवती एक समृद्धिशाली चलायमान होनेसे कुछ देर के लिये उनका ध्यान भंग हुआ। प्राम । यहअक्षा० २२ ३६ उ० तथा देशा० ८८ २३ जब भगवान् बालिने रावणका कर्तव्य जाना तो वे जरा पू०के मध्य अवस्थित है। यहां इष्ट इण्टिया रेलवेका एक भी खेद खिन्न न हुये और मनमें यों विचारा कि यह स्टेशन है। इस प्राममें ब्राह्मणों की संख्या अधिक है। कैलाश पर्वत अत्यन्त रमणीक है, चक्रवत्ती भरतने इस बालि-राजपूतानेके योधपुर राज्यके अन्तर्गत बालि जिले- पर जिन चैत्यालय बनवाये हैं, वे कहीं भंग न हो जावें का सदर । यह अक्षा० २५१८ उ० तथा देशा० ७३१८ इस लिये उन्होंने अपने चरणोंका अंगूठा ढीला कर दवा | पू०के मध्य अवस्थित है। राजपूताना-मालवा-रेलवेके दिया। इस पर रावण भाराकान्त हो दब गया, उसके मेलों- फालया स्टेशनसे ५ मील दूर पड़ता है । जनसंख्या पांच से रक्त भरने लगा, मुकुट टूट गया और माथा पसोनेसे | हजारके करीब है । यहां प्राचीन कालका बना हुआ १ तर-बतर हो गया। उसके पैर, जलाये छिल गयीं और दुर्ग, डाकघर, १ बर्नाक्थुलर स्कूल और एक अस्पताल वह रोने लगा। तभीसे वह पृथ्वीतलमें रावण नामसे | है। यहांकी शिलालिपिसे जाना जाता है, कि १०वीं प्रसिद्ध हुआ। रावणके अत्यन्त दीन शब्द सुन कर शताब्दीमें राठोर राजा यहांका शासन करते थे। १८वीं राणियां विलाप करने लगीं। पहिले तो सेनापति शताब्दीके शेष भागमें यह जोधपुर राजके हाथ लगा। मंलिभुम युद्ध करनेके लिये तत्पर हुये, किन्तु जब उन्हों- बालिका (सं० स्त्री०) बाला एव बाला स्वार्थे कन् टाप ने ऋषिराजका प्रताप जाना तब चुप हो गये। देवता अतहत्त्वं । कन्या, छोटी लड़की। २ पुत्री, बेटो । ३ कायबल ऋद्धिका अतिशय जान दुदुभि बाजा बजाने एला, इलायची । ४ बालुका, बालू । ५ कणंभूषण, कानमें गे। तब परमदयाल महामनिने अपना अंगूठा ढीला पहननेको बाली। ६ अम्बष्ठा । ७ मूसली। कर दिया। बालिकुमार (सं० पु०) बालि नामक बंदरका लड़का अंगद रावणने पवतके नोचेसे निकल कर योगीश्वरको जो रामचन्द्रजीको सेवामें था। बारंबार स्तुति की और हाथ जोड़ उनके चरणों में बालिखिल्य (सं० पु० ) पुलस्त्यकन्या सन्नतिसे उत्पन्न मस्तक नमा क्षमा मांगी। योगीश्वर महाराज स्वयं क्रतुके साठ हजार पुल या ऋषिविशेष । बालखिल्य देखो। क्षमाशील थे। वेभमाके आगार थे। सात मित्रमें बालिग ( अ० पु०) वह जो बाल्यावस्थाको पार कर चुका उनकी समानवृत्ति थी, अतएव उस कार्यसे न तो उनको हो, जो अपनी पूरी अवस्थाको पहुंच चुका हो । कानून- के अनुसार कुछ बातोंके लिये १८ वर्ष या इससे अधिक क्षोभ ही हुआ, न हर्ष। अवस्थाका मनुष्य बालिग माना जाता है। केवली हो भगवान बालिने इस भूतल पर विहार बालिगञ्ज-कलकसके दक्षिण-पूर्व में अवस्थित एक गएड- किया। अनेक भवानी जीवों को सम्बोधन तथा गृहस्थ प्राम । निर्जनताप्रिय अगरेजोंका यहां बास होनेके कारण भौर मुनि धर्मका यथायध उपदेश दिया। उनको शान्ति- इस स्थानकी मर्यादा दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। मूर्ति देख कर सिहादिक कर जंतुओंने करता छोड़ दी। एतद्भिन्न भारतवर्ष के बड़े लाटके शरीररक्षी सेना यहां दुर्वलको सबल नहीं सताने लगे। रहती है। कलकत्ता आने आनेकी सुविधाके लिये यहां ... कुछ दिनों बाद शेष चार अघातिया कोको भी पूर्वपङ्गीय रेलपथका एक स्टेशन है। उन्होंने मा कर डाला और भाप सिद्धशिला पर जा बालिघाटियम-मन्द्राज प्रदेशके विशाखपत्तन जिलान्तर्गत विराजे। एक प्राचीन ग्राम । यह अक्षा० १७.३६ उ० तथा देशा०