पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३५६

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३५० बासिद्वीप स्वतंत्र राजा स्थापित किया । इस समय हम स्पष्ट- ४ मेंगुई-पतिगजमह इस प्रदेशके अधिकारी रोतिसे देखते हैं, कि क्लोङ्गकोङ्गकी प्राचीन क्षत्रिय जातिके नियुक्त हुये थे। इनके कोई पुत्र न था। वर्तमान राजा सिवाय और सब ही पतित वा नीच जातिमें सम्मिलित | गण आयडामरकी प्रपौत्री कियशनके वंशधर हैं । इन्होंने हो गये थे। नीचे आठ सामन्त राज्यों का सक्षिप्त इति किसी समय करन-असेम, बोलेलेङ्ग, लम्बक और हास दिया जाता है। पदोङ्ग आदि राज्यों में भी अपना अधिकार फैलाया था। १ क्लोङ्गको--देव अगुङ्गवंशके द्वारा चलाया लम्यक, बोलेलेङ्ग और करङ्ग-असेम राजवशके साथ गया। इनके अधिकारमें प्रायः छ हजार मनुष्य रहते मेंगुई-राजवंशका घनिष्ठ संबन्ध है। १८७८ ई०में भनक. है। करङ्गअसेम और बोलेलेङ्ग सामन्त इनके साथ अगुङ्ग कटुट्-अगुङ्ग यहां राज्य करते थे। एक मत हो कर कार्य करते हैं। ये शूद्राणीसे पैदा हुए | ५ करंग-असेम-यहाँके अधिपति अपनेको गज- हैं। इनकी सौतेली मा करङ्गअसेम राजकन्याके गर्भसे महके वंशधर बतलाते हैं। किन्तु करंग राजपुत्रके एक कन्या जन्मी थी। राणियों में कोई भी पुत्रवती साथ मेंगुई-राज कन्याका विवाह भी चलता है। पहले न थी, अतएव ये शूदाणो (ज्येष्ठ ) पुत्र ही राज्यपद पर कहा जा चुका है, कि आर्य मजूरी यहांके दबूप्रदेशके अधिष्ठिप्त हुये। राज थे। मेंगुई राजाने करग-असेम जीता था और ___२ गियान्यर–१८४१ ईमें देवमङ्गीशकी मृत्युके बोलेलेङ्ग अधिकारके बाद क्लोङ्गकोङ्ग बोलेलेङ्ग प्रदेश उनके बाद उनके पुत्र देवपहान राजा हुए। यद्यपि पे क्षत्रिय- हाथसे जाता रहा था । १८७८ ई०में मप्र राजदे यहां राज्य वंशमें उत्पन्न हुपे थे, तो भी उन्होंने शूद्र तथा करते थे । युद्ध में इमी वंशने विजय पायी थी। इन्होंने पुरकनकी पदवी प्राप्त की थी। इनके प्रपितामह हो । गेलगेलका ध्वंस और लम्वक तथा सेम्बेवा पर आक्रमण इस वंशके स्थापनकर्ता थे । पहिले देवअगुङ्गके | किया था। करङ्ग और लम्बक-राजाओंकी मापसकी पूर्व पुरुषों के अधीन थे उसी प्रदेश पर दो सौ सेनाके फूटने बहुत नुकसान किया। इसी बीचमें मतरमराजने मायक थे। छलबलसे अपने स्वामीको उन्होंने अपने आ कर दोनों को परास्त किया । इस राजपरिवारकी हाथमें कर लिया और मेड़ई राज्यके अन्तर्गत कामश. कुल-ललना और बालिकायें सम्मानको रक्षाके लिये देश पर अपना अधिकार जमाया । ओलंदाजोंने जब अग्निमें प्रवेश करती हैं। ये स्त्रियां आपसमें दूसरोंको बोलेलेङ्ग पर आकमण किया तब गियान्यरके पति देव- अनिष्ट करनेके लिये अपने प्राणों तककी आहुति देती अगुङ्गको आज्ञासे वे दलबल के साथ आगे बढ़े । वेदाङ्ग- है। बस यही बालिद्वीपबासियोंका 'बेला' उत्सव है। राजाके साथ इनको मित्रता विश्वासयोग्य नहीं थी। इस लम्बकके करङ्ग असेम-राजाभोंकी अवनति के बाद करंग- कारण वेदाङ्ग-सीमान्तमें राजा काशीमनने एक वास. असेम-वालि-बोलेलेङ्ग और देवभगुग व शके राजा स्थान बनवाया। स्वाधीन हो कर राज्य करते रहे। करंग-असेमका ३ बंगली-देवजदे पुटङ्गवान् १८७८ ई०में यहाँ राजा राज्य पर्वतमय है। यहां पर धान्यकी खेती नहीं होती। हुये थे। ये लोग भी अपनेको देवअगुङ्गके वंशज बतलाते यहाँके रहनेवाले लकड़ीको बेच कर अपना निर्वाह करते है। किन्तु अगुङ्ग वंशकी अपेक्षा ये मर्यादामें हीन हैं। हैं। लम्बक राजाका नप र कटुट् करङ्ग अनेम नाम पे देव भगुङ्गकी अधीनतामें नहीं है। वदोंङ्ग और तव- है। 'सेलापरङ्ग' इनकी उपाधि है। नानके सामन्तराजाओं के साथ इनको खूब प्रेम है। यहां- के निवासी साहसी और घोर होते हैं । बङ्गली राजा एक | बोलेले ग-यहांके राजा नेप्र र मदे करण असेम कहे जाते हैं । यहांके अधीश्वर गजमवंशीय हैं । यहाँ पहिले समय देव भगुरुके सेनापति थे। १८४६ ई०में ओल- दाजोंके समय इन्होंने भोलंदाजगवर्मेण्टकी सहायता की देवभगुगवंशके क्षत्रियोंने सात पीढ़ी तक राजा किया थी। इस प्रत्युपकारके पुरस्कारस्वरूप इन्हें बोललेगा। था। उनके बाद वैश्यवंशीय राजाओंका प्रभाव बढ़ा। प्रवेश मिला। बन्दूकोंसे युद्ध करते थे। आर्य वेलेतेङ्ग-वंशीय मयूर पशि इसी घशके एक राजा थे।