पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३७८

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३७२ बालीशाबू पिरोए जाते हैं। २ जो गई ज्वार भाविके पौधोंका वह | बालो (सं० बी० ),कर्करी, ककड़ी। .... ऊपरी भाग या सींका जिसमें अन्नके दाने लगते हैं। बालुङ्गिका (सं० पु. ) कर्कटी, ककड़ी। .. ३ हथौड़े के आकारका कसेरोंका एक औजार जिससे वे बालुङ्गी सखी० ) कर्फटी, ककड़ी। लोग बरतनोंकी कोर उठाते हैं। बालुघर-चारेन्दभूमिके अन्तर्गत एक प्राचीन स्थान । बालोश ( स० पु०) मूत्रकृच्छरोग । यह कासिमपुरके उत्तरमें अवस्थित है। . .. बालीसबरा (हिं० पु०) वह सबरा जिससे कसेरे थाली या बालुबर-मुर्शिदाबाद जिले के अन्तर्गत एक गएड-प्राम। परातकी कोर उभारते हैं। बालुया-भागलपुर जिलेके अन्तर्गत एक वाणिज्यस्थान। बालु (सं० स्त्री० ) १ एलबालुक, एलुवा । २ बालू। ३ यह अक्षा० २६ २५ ४० तथा देशा० ८७१ पुके कपूर। ४ चिटिका। मध्य कोसो नदीके किनारे अवस्थित है। यहांसे माना बालुक ( संलो० ) बालुरेव स्वार्थे कन् । १ एल प्रकारके व्योंकी नेपाल, तिरहुत और कलकत्ते में एफ- बालुक, एलुवा । २ पनिवालू । तनी होती है। बालुका (स. स्त्री० ) बालुक-टाप् । १ रेणुविशेष, वालुर-बम्बई प्रदेशके धारवार जिलेका एक प्राचीन रेत। पर्याय-सिकता, सिक्ता, शीतला सूक्ष्मशकरा, | प्राम। प्रवाहो, महासूक्ष्मा. सूक्ष्मा, पानीयवर्णिका ।इसका चालू ( हिं० पु०) पत्थर या चट्टानों आदिका वह गुप्त गुण-मधुर, शीत, सन्ताप और श्रमनाशक। बालू देखो। ही महीन चूर्ण या कण जो वर्षा जल प्राधिके साथ २ कर्कटी, ककड़ी । ३ कपूर, कपूर । ४ यन्त्र विशेष । पहाड़ों परसे बह भाता और भवियोंके किनारों भादि बालुकागड़ ( सं० पु० ) मत्स्यविशेष, एक प्रकारकी | पर अथवा असर जमोम या रेगिस्तामों में बहुत अधिक मछली। इसका दूसरा नाम सिताङ्क भी है। पाया जाता है। यह बालू साधारणतः विशेष हितकर बालुकात्मिका (सं० स्त्री० ) १ शर्करा, सक्कड़। (नि.) है। घरकी ईट बनानेमें इसका बहुत काम माता है। २ बालुकामय। बालुकामय स्थानका जल बहुत ठंढा होता है। बालू बालुकाप्रभा (सं० स्त्री० ) नरकविशेष । और सोडा मिलनेसे कांच बनते देखा गया है। पहले वालुकामय ( स० त्रि०) बालुका-मयट् । सिकतामय । बालुकायन्त्र द्वारा समय निरूपित होता था। बालुकायन्त ( स० क्लो० ) बालुकाया यन्त्र। औषधको ___ अलावा इसके बालू और भी मनुष्योंके कितने ही फूकनेका यह यन्त्र जिसमें औषधको बालू भरी हाड़ोमें कामों में उपकारी है। रोगीकी अवस्था देख कर कभी कभी रख कर आग पर रखते या आगसे चारों ओरसे ढंकते हैं। उसे गरम बालू पर बैठाया जाता है जिसे "Sand bata" बालुकास्वेद (सं० पु०) बालुकाभिर्विहितः स्वेदः । तप्त कहते हैं। किन्तु अधिकांश समय रसायन हमें ही बालुका द्वारा ताप, भावप्रकाशके अनुसार पसीना कड़ाहमें रखे हुए उत्तप्त बालके मध्य किसी दूसरे दायके कराने के लिये गरम बालूकी गरमी पहुंचानेकी किया। उत्तप्त करनेमें इसका व्यवहार देखा जाता है । सिरीस बालुकिन् (संलो०) हिंगुल। नामका कागज (Sand paper ) बालसे में बनाया पालुको ( सं० स्त्री० ) बलति बालयति वा बल-प्रापणे जाता है। इसके घिसनेसे किसी चीज पर लगामा उक, त्रियां । कटीभेद, एक प्रकारको ककड़ी। मोरचा दूर हो जाता है। अभी एमरी नामक एक पर्याय-बहुफला, स्निग्धफला, क्षेत्रकर्कटो, क्षेत्रल्हा, : प्रकारका कागज तैयार हुआ है, उसमें भो बाल सटा कान्तिका, मूला। रहता है। इससे उत्कृष्ट इस्पातनिर्मित अनादि परिकार बालकेश्वर-सहाद्रि पर्वतके अन्तर्गत एक वतीर्थ किये जाते हैं। यहां भीरामचन्द्रने बालूको शिवमूर्ति बना कर उनकी भारत भाव बार ( isla of wight ) और मात्र पना की थी। वालुकेश्वर माहात्म्यमें विस्तृत विवरण देखो। (Alum hay ) सामरके किनारे मारके रंगीन