पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३९७

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बिजूनी-बिड़ालाक्षी छोड़ कर और तीनों ओर युक्तप्रदेशका झांसी जिला बिट (हि.पु०) १ साहित्यमें नायकका यह सखा जो सब पड़ता है। पहले यह स्थान तेहरी और उर्छा कलाओंमें निपुण हो । २ पक्षियोंकी विष्ठा, बीट। राजाओं के अधिकारमें था। इसका अष्टभाई नाम | बिटक ( स० पु०) पिटक । पडनेका कारण यह है, कि दीवान रायसिंहने बडगांव बिटरना (हि० क्रि० ) १ घंघोला जाना। २ गंदा होना । जागीरको अपने आठ पुत्रों में बाँट दिया था। उनके बिटरना (हिं० कि० ) १ घंघोलना। २ घंघोल कर गंदा द्वितीय पुत्र दीवान सानवन्तसिंहके भागमें बिजना करना । जागीर पडी। सानवन्तके मरने पर जागीर उनके | बिट्ठल (हिं० पु०) १ विष्णुका एक नाम । २ बम्बई प्रान्तमें तीन पुत्रों के बोच बांट दी गई। वृटिश अमलदारोमें | शोलापुरके अन्तर्गत पण्ढरपुर नगरको एक प्रधान देव- दीवान सुजानको १८२३ ई०में जागोरकी सनद मिली। मूत्ति । यह मूर्ति देखनेमें बुद्धकी मूर्ति जान पड़ती है। उनको मृत्युके बाद उनके लड़के दीवान मुकुन्दसिंह जैन लोग इसे अपने तीर्थङ्करकी मूर्ति और हिन्दू लोग गद्दी पर बैठे। ये ही वर्तमान जागीरदार हैं। ये लोग विष्णु भगवानकी मूर्ति बनलाते हैं। विद्वान देखो। बिठलाना (हि.क्रि०) बैठाना देखो। बुन्देलावंशीय राजपूत हैं। इस जागोरमें केवल चार ग्राम लगते हैं। राजस्व १००००) रु. है। जागीर- विठाना (हि. क्रि०) बैठाना देखो। दारको १५ कमान, .. अश्वारोही और ५३० पदाति सेना बिडम्ब ( स. पु०) विडम्ब देखो। रखानेका अधिकार है। बिड (हिं पु० ) १ विष्ठा । २ एक प्रकारका नमक । २ उक्त जागोरका प्रधान शहर। यह अक्षा० २५ विट देखो। २७ उ० तथा देशा० ७६० पू० झांसीके नवगड़ जाने / विडर (हिं० वि०) तिराया हुआ, दूर दूर। के रास्ते पर अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः १०६५ है। बिडरना ( हि क्रि० ) १ इधर उधर होना, तितर बितर बिज नी-१ आसाम प्रदेशके ग्वालपाडा जिलेका एक होना। २ पशुओंका भयभीत होना, विचकना। राज्य। यह अक्षा० २५०५३ से २६ ३२ उ० तथा विष्ठारना ( हिं० कि० ) १ इधर उधर करना, तितर बितर करना। २भगाना। देशो० ६०८५ से १९८५ पू०के मध्य अवस्थित है। बिडायते (हिं वि० ) ज्यादा, अधिक । इसका अधिकांश स्थान जङ्गलावृत है। यहांके राजा अपनेको कोचबिहार राजवंशावतंस बतलाते हैं। बिडारना (हि क्रि० ) भयभीत करके भगाना। २ उक्त राज्यका प्रधान नगर । यह० अक्षा २६३० उ० विडाल (स० पु०) १ बिल्ली, बिलाव । विडाल देखो । २ तथा देशा० ६०.४७ ४० पू०के मध्य अवस्थित है। बिडालाक्ष नामक दैत्य जिसे दुर्गाने मारा था । ३ दोहेके बिजली-मध्यभारतके भण्डार जिलान्तर्गत एक भू- बीसवें भेदका नाम । इसमें ३ अक्षर गुरु और ४२ अक्षर लघु होते हैं। ४ आंखके रोगोंकी एक प्रकारको सम्पत्ति। भूपरिमाण १२६ वर्गमील है। इसका अधि- ओषधि। कांश स्थान पर्वत और जङ्गलसे आवृत है। यहांके दरे- बिडालक ( सपु०) विडालक देखो। कशा गिरिपथके निकट कछगढ़ नामक एक गुहा है। बिड़ालपाद ( स० पु०) एक तौल जो एक कर्षके बराबर कुआरदास और बञ्जारा नदीतीरवत्ती स्थान मनोहर | होती है। कर्ष देखो। दृश्योंसे पूर्ण है। विवारी (हि. स्त्री०) छत्तीसगढमें बोली जानेवाली बिडालवृतिक (स० वि०) बिल्लीके समान स्वभाव- एक प्रकारको भाषा। वाला, लोभी, कपटी, दभी, हिंसक, सबको धोखा देने- भारा (foto) एकमें मिला हुआ मटर. चना. गेह वाला और सबसे टेढा रहनेवाला। और जौ। बिडालाक्ष ( स० वि०) जिसकी आंखें बिल्लीकी आंखोंके विझुकाना (हिं० क्रि०) १ भड़कना। २ डरना, भयभीत समान हों। होना। ३ टेढ़ा होना, तनना। | बिड़ालाक्षी (सस्त्री०) एक राक्षसीका नाम ।