पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४१३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


बीजक-बीजनौर आद्रपटीबीज ॐ नमो भगवति चामुण्डे रक्त- बीज । ४ वह सूची जो किसी गड़े हुए धनकी उसके वाससे अप्रतिहतरूपपराक्रमे अमुफवधाय विचेतसे : साथ रहती है। ५ असनाका वृक्ष । ६ बिजौरा नीबू । स्थाहा । भोंगा हुआ लाल वस्त्र पहन कर समुद्रगामिनी । ७ कवोरदासके पदोंके तीन संग्रहों से एक। ८ जनमके नदी अथवा ऊसर भूमिमें दक्षिण मुख बैठ कर यदि यह समय बच्चेकी वह अवस्था जब उसका सिर दोनों मन्त्र ऊर्ध्वबाहु हो कर जपा जाय, तो वस्त्र सूखनेके भुजाओंके बोचमें हो कर योनिके द्वार पर आ जाय । साथ साथ शत्र के प्राण भी सूखते जाते हैं। बीजक ( म० पु. ) शिव, महादेव । ___ हनूमद्वीज --हं हनूमते रुद्रात्मकाय हुं फट । बोर- बीजकृत ( स० क्ली० ) बोज वीर्य करोति बद्ध यति कृ. साधनबीज -'हं पवननन्दनाय स्वाहा ।' श्मशानभैरवी- क्विा तुक-च । वाजीकरण। बीज --श्मशानभैरवि नररुधिरास्थिवमाभक्षणिसिद्धि वीजकोश । म पु० ) बोजानां काप आधार इव । पक्ष- मे देहि मम मनोरथान् पूरय हुं फट् स्वाहा । ज्वाला- बीजाधार चक्रिका । पर्याय -- बगरक, कर्णिका, बारिकुञ्ज, मालिनोवोज ॐ नमो भगवति ज्वालामालिनी गृध्रगण नाटक। परिवत्ते फट स्वाहा। महाकालोबीज- कें क्रोंबीजकिया ( स० स्त्री० बीजगणितके नियमानुसार कों पशून गृहाण हूँ फट म्वाहा। गणितके किसी प्रश्नकी क्रिया । निगडवन्धनमोक्षणवीज ( मंत्र )-ॐ नम ऋते . बीजखाद ( हि पु० ) वह रकम जो जमीदारों या महा- निमते तिग्मतेजो यन्मय विता बन्धमेतं यमेन दत्तं जनों आदिकी आपस किसानों को बीज और खाद तस्या संविदा नोत्तमे नाके अघोवोऽवै। आदिके लिये पेशगो दी जाती है। बाम्बकवीज----ॐ वाम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि- . बीजगणित ( स० क्ली० ) गणितका वह भेद जिसमें वर्द्धनं । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योमनीयमामृतात् । अक्षरोंको संख्याओंका द्योतक मान कर कुछ साङ्क तिक मृतसञ्जीवनीबीज----हौं ॐ ज सः ओ भभुवः चिह्नों और निश्चत युक्तियों के द्वारा गणना की जाती है स्वः। नाम्बकं यजामहे सुगन्धिपुष्टिवर्द्धनं। उर्वारु- और विशेषतः अज्ञात संख्याए आदि जानी जाती हैं। बीजगणित दंग्वा । कमिव बन्धनान् मृत्योमुक्षीयमामृतात् । ओंभूर्भुवः स्वः । इत्यादि (तन्त्रसार) आकर्षणादि जो बीजगर्भ ( स० पु०) बीजानि गर्भे अभ्यन्तरे यस्य । पटोल, परवल। सब बीज हैं, वे यहां बाहुल्यके भयसे नहीं दिये जा सके। बीजगुप्ति (सस्त्री०) वोजानां गुप्तियत्र । शिम्बी. "बीजसङ्कतबोधार्थहत्य तन्त्रशास्त्रतः । । सेम। २ तुप, धानको भूमी। ३ फली। बीजनामानि कानिचित् वक्ष्यामि विदुपां मुदं ।। 'बोजत्व ( स क्लो० ) वीजस्य भावः त्व । बोजका भाव माया मजा परा संवित् त्रिगुणा भुवनेश्वरी । या धर्म, बोजपन। हालेखा शम्भुबनिता शक्तिदेवीश्वरी शिवा ॥" वीजदर्शक ( म० पु. ) अभिनय परिदर्शक, यह व्यक्ति जो ( प्राणातोपिणी) नाटक अभिनयकी व्यवस्था करता हो। प्राणतोषिणीमें लिखा है . परमेश्वरीका बीज ह्रीं है। बीजधानी (म' स्त्री० : नदीभेद । इसी तरह लक्ष्मीका वीज श्री, सरस्वती बोज ऐं, तारा- बोजधान्या ( स० क्ली० ) बीजप्रधानं धान्य । धान्यक, का बीज हुं, कालीका बीज क्री, गुप्तकालोका बीज क्ली, धनियां। शिवका बीज हौं और अस्त्रका बीज फट है। (प्रा० तो०) बोजनौर ---१ अयोध्याप्रदेशके लखनऊ जिलान्नगत एक काली तारा आदि प्रत्येकके बीज मन्त्र पृथक पृथक् परगना। भूपरिमाण १४८ वर्ग मील है। हैं। विशेष विवरण उन उन शब्दों में देखो। उक्त जिलेका एक प्रधान नगर । या आधा.. बीजक (सपु०) १ सूनी, फेहरिस्त । २ वह सूची जिस- ५६ उ० तथा देशा० ८०.८४ पू०के मध्य लखनऊ शहर- में मालका ब्योरा, दर और मूल्य आदि लिखा हो। ३ से ४ कोस दक्षिणमें अवस्थित है।