पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४१९

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बीता-बीमारदार बीता (हिपु०) बित्ता देखा । ' पूर्वक संहार करते थे, कभी भी वीभत्स कर्म नहीं करते, बीघा (हिं० पु०) मालगुजारी, निश्चित करना। इसीसे इनका बीभत्सु नाम पड़ा। बोन (हि स्त्री०) एक प्रसिद्ध बाजा । यह सितारकी तरह। "न कुर्या कर्म बीभत्म युध्यमानः कथम्चन । का पर उससे बड़ा होता है । इसमें दोनों ओर बहुत बड़े तेन देवमनु या नाम मुरिति विश्र नः ॥" बड़े तू'बे होते हैं जो बीचके एक लम्बे डाँडसे मिले (भारत ४।४२११८) होते हैं। इसमें एक सिरेसे दूसरे सिरे तक माधारणतः बीम ( अ० पु. १ जहाजके पार्श्व में लंबाईके वल लगा ५ या ७ तार लगे होते हैं। इन तारों में से प्रत्येकसे हुआ बड़ा शहतीर, आडा । २ जहाजका मम्तृल । आवश्यकतानुसार भिन्न भिन्न प्रकारके स्वर निकाले बोमा ( फा० पु.) १ किमी प्रकारको विशेषतः आर्थिक जाते हैं। यह वाजा बहुत उच्च कोटिका माना जाता हानि पूरी करनेकी जिम्मेदारी जो कुछ निश्चित धन ले है और प्रायः बहुत बड़े बड़े गवैयोंके कामका होता है। कर उसके बदले में की जाती है। आजकल वीमकी गिनती विशेष विवरणा बीगणा शब्दमें दखो। एक प्रकार के व्यापारके अन्तर्गत होती है और इसके लिये बीनना (हिं० क्रि०) १ छोटी छोटी चोजोंको उठाना, अनेक प्रकारकी कंपनियां स्थापित हैं। उममें बीमा करने- चुनना। २ छाँट कर अलग करना, छांटना। वाला कुछ निश्चित नियमोंके अनुसार, समय समय बोफै (हि पु० ) बृहस्पतिवार, गुरुवार । पर एक ही साथ कुछ निश्चित धन ले कर अपने ऊपर बीबो (फा० स्त्री०) १ कुलीन स्त्री, कुलबध्र । २ अविवा- इस बातका जिम्मा लेता है, कि यदि वीमा करनेवालेकी हिता लड़की, कन्या। ३ स्त्रियोंके लिये आदरार्थक' अमुक कार्य या व्यापार आदिमें अमुक प्रकारकी हानि या शब्द । ४ पत्नी, स्त्री। दुर्घटना आदि होगी तो उसके बदले में हम वीमा करने- दिबेरेना (हि० पु. ) दक्षिण भारतके पश्चिमी घाटोंमें वालेको इतना धन देंगे। आजकल मकानों या गोदामों मिलनेवाला एक प्रकारका वृक्ष। इसकी लकड़ीका रंग आदिके दग्ध होने, समुद्र में जहाज आदिके इबने, प्रपित पीला होता है और यह इमारत तथा नावे बनानेके . मालका ठीक हालतमें निदिष्ट स्थान तक पहुंचनका अथवा काममें आता है। इस लकड़ीमे जल्दी घुन या कीड़ा दुर्घटना आदिके सवबसे हाथ पैर टूटने या शरीर निष्प्रयो- आदि नहीं लगता जन हो जानेका बीमा होना है। जानबीमा नामका बीभत्स ( स० पु.) वोभत्स्यतेऽत्र अनेन वध मन करणे एक और प्रकारका वीमा होता है । इसमें बीमा कराने घञ्। १ अर्जुन। २ काध्यके नौ रसोंके अन्तर्गन वालेको हर एक महीना, हर एक वर्ष अथवा एक ही सातवां रस। इसमें रक्त मांस आदि ऐमी वातोंका साथ कुछ निश्चित धन देना पड़ता है और उसके किसी वर्णन होता है, जिनसे अरुचि और घृणा तथा इन्द्रियोंमें निश्चित अवस्था तक पहुंचने पर उसे बीमेकी रकम सङ्कोच पैदा होता है। इसका वर्ण नील और देवता मिल जाती है। यदि उसे निश्चित अवस्था तक महाकाल हैं। जुगुप्सा इसका स्थायी भाव है : पीच, : पहुंचनेके पहले ही उसकी मृत्यु हो जाय तो उसके मेद, मजा, रक्त, मांस या उनकी दुर्गन्धि आदि विभाव परिवारोंको वह रकम मिल जाती है। फिलहाल हैं; कम्प, रोमाञ्च, आलस्य, सङ्कोच आदि अनुभाव हैं बालकोंके विवाह और विद्याशिक्षाके व्ययके संबंधमें भी और मोह, मरण, आवेग, व्याधि आदि व्यभिचारी भाव : बीमा होने लगा है। डाकद्वारा पत्र या माल आदि हैं। (त्रि.) ३ घृणित, जिसे देख कर घृणा उत्पन्न भेजनेका भी डाक विभागके द्वारा बीमा होता है। २ हो। ४ कर। ५पापी । वह पत्र या पारमल आदि जिसका इस प्रकार बीमा विभत्सित ( स० त्रि०) घृणित, निन्दित । हुआ हो। बीभत्सु (स.पु०) वीभत्सतीति वध-सन्-उ । १ अर्जुन- वीमार ( फा० पु. ) रोगग्रस्त, रोगी। के दश नामोंमेंसे एक नाम । ये युद्ध में शत्रु का न्याय बीमारदार ( फा. वि. ) जोरोगियों की सेवा करता हो। Vol. xv. 10