पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४२१

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बुंदकीदार-बुक्कराय ४१५ बुदकीदार (हिं० वि०) जिस पर बुदकियां पड़ी या बुकस ( हि पु० ) भंगी, मेहतर । बनी हों, जिस पर बुदो केसे चिह्न हों। बुका ( हिं० पु. ) बुक्का दग्यो । बुदकयारी ( हिं० स्त्री० ) वह दंड जो बदमाशोंसे जमी- बुकार ( हिं० पु० ) वह बालू जो बरसातके बाद नदी अपने दार लेता है। तट पर छोड़ जाती है और जिसमें कुछ अन्न आदि वोया बुदवान (हिं० पु० ) छोटी छोटी वूदोंको वर्षा। जा सकता हो। बुंदा ( हि० पु.) १ कानमें पहननेका एक प्रकारका बुकुम । हि० पु० ) , वकनी । २ किमी प्रकारका पानक, आभूषण जो वुलाकके आकारका होता है। इसे लोलक चूर्ण । भो कहते हैं। २ माथे पर लगानेकी बड़ो टिकली जो बुकेफल • झेलमनदी तीरबत्ती एक प्राचीन नगर । माकि पन्नी या कांच आदिको बनती और बड़ी विन्दीके आकार- दनवीर अलेकसन्दरका प्रिय युद्धाश्च बुकेफलस ( Bac. की होती है। ३ बड़ी टिकलीके आकारका गोदना। . phalus) जिम स्थान पर माग गया था, वीरवरने वहां यह माथे पर गोदा जाता है। इसमें बहुतसे छोटे छोटे अपने अश्ववरके स्मरणार्थ यह नगर बसाया। आज दाने या गोदनेके चिह्न होते हैं। भी इस नगरका ध्वंसावशेष वर्तमान जलालपुर नगरके बुंदिया ( हिं० स्त्री०) बूदी देखो । निकट पड़ा है। बुदोदार ( हिं० वि० ) जिसमें छोटी छोटी बिदियां बनी बुकेरा मिन्धुप्रदेशके हैदराबाद जिलान्तर्गत एक तालुक । या लगी हों। यहां चार मुसलमान समाधिमन्दिर हैं जिनमेंसे शेख बुलपटी ( हिं० पु० ) जहाजमें पिछला पाल । वनपात्रा और पीर फजल शाहकी समाधी ही सर्वप्राचीन बुआ ( हि० स्त्री०) बूआ दंलो। और मुसलमान समाजमें विशेष आदरणीय है। इस बुक (सं० त्रि.) बुक-अब पृषोदरादित्वान् उपधालोपः। ममाधिमन्दिरके सामने वर्ष भरमें दो बार मेला लगता भीषण शब्द करनेवाला। (प) २ एरण्ड वक्ष, रेडीका है जिसमें पकड़ी आदमी जमा होते है। पेड़। ३ ईश्वरमल्लिका। बुक्क (सं० पु०) बुक्कयति शब्दायते इति बुक्क अभ् । १ छाग, बुक (० स्त्रो०)। एक प्रकारका कलफ किया हुआ महीन, बकरा। २ हृदयस्थ मांसपिण्ड । ३ अग्रमांस । ४ हृदय. पर बहुत करारा कपड़ा। यह बच्चोंकी टोपियोंमें अस्तर कलेजा। ५ समय । ६ शोणित । देने या गिया, कुरती, जनानी चादरे आदि बनानेके बुकचेरला - मन्द्राज प्रदेशके अनन्तपुर जिलान्तर्गत एक काममें आता है। यह साधारण बकरममे बहुत पतला, गण्ड प्राम । यहांका वांध देखने लायक है। पर प्रायः वैसा ही करारा या कड़ा होता है। २ एक बुक्कन (सं० को०) बुक्क भावे ल्युट । भाषण, कुन्नेका प्रकारको महोन पन्नी।

भौंकना।

बुक ( अ० स्त्रो०) पुस्तक, किताब । बुक्कपत्तन--मन्दाज प्रदेशके अनन्तपुर जिलान्तर्गत एक बुकचा ( हिं० पु०) १ वह गठरी जिसमें कपड़े बधे हुए नगर । १७४० ई०में रायदुर्गके पलिगागेंने इस स्थानमें हों। २ गठरी। | घेरा डाला था। बेलेरोके पलिगारोंके आने पर घेरा उठा बुकची (हि. स्त्री०) १ छोटी गठरी विशेषतः कपड़ों की लिया गया और दोनोंने बन्धुरूपमें दुर्गके मध्य प्रवेश गठरी। २ दर्जियोंकी थैली। इसमें वे सुई, डोरा, ' किया। आखिर यह नगर वेलेरीके पलिगारोंके ही हाथ कैचो आदि सीनेके सामान रखते हैं। लगा। यहांका चित्रावतीका जल- बांध ४०० वर्ष पहले- बुकनी ( हि स्त्री०) १ किसी चीजका महीन पोसा · का बना हुआ है। हुआ चू। २ वह चूर्ण जिसे पानी में घोलनेसे कोई रंग बुक्कराय-- -विजयनगरके महापराक्रान्त नरपति । ये सायणा- वनता है। चार्य और माधवाचार्यके प्रतिपालक थे। खुकवा (दि० पु०) १ उबटन, बटना । २ बुक्क देखो। विजयनगर देखो।