पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४२२

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४१६ बुक्करायसमुद्र-बुजुर्गो बुकरायममुद्र मन्द्राजप्रदेशके अनन्तपुर जिलान्तर्गत एक मोरोंने यह स्थान अगरेजो को सुपूर्द किया । सिन्धु और गगड ग्राम । इसके मामनेवाले बांधके दूसरे किनारे अफगानकी चढ़ाई के समय यहां अंगरेजोंका अस्त्रागार अनन्तमागर अवस्थित है। स्थापित हुआ था। १८७६ ईमें यहां एक कारागार बुकम । मं० पु. स्त्री० ) पुकम प्रपोदगदित्वान् माधुः। नोला गया। चगडाल। बुग्वार (अ० पु०) १ ज्वर, ताप । २ वाप, भाप । ३ हृदय- बुझा (सं० स्त्री०) बुक टार। हृदय, कलेजा । २ अग्रमांम, का उद्वेग, शोक, क्रोध दुःख आदिका आवेग । गुग्देका मांस । ३ रन, लह । ४ छाग, वकगे। प्राचीन बुख़ारचा ( फा० पु० ) १ कोठरीके भीतर तख्तों आदिको कालका एक प्रकारका बाजा जो मुंहसे फूक कर बजाया बनी हुई छोटी कोटरी। २ खिड़कीके आगेका छोटा जाता था। बरामदा । बुका ( हि पु० ) १ कृटे हुए अभकका चूर्ण। यह प्रायः बुग ( हि० पु० ) १ मच्छर। २ बुक दंग्या । होलीमें गुलाल के माथ मिलाया जाता या इसी प्रकारके बुगचा ( हि पु० ) बुकचा देण्या। और कामोंमें आता है । २ वहुत छोटे छोटे सच्चे बुगदर ( हिं० पु० ) मच्छर । मोनिगोंके दाने जो पीस कर ओषधके काममें आते हैं बुगदा ( फा० पु. ) कमाइयोंका छुरा जिससे वे पशुओंको अथवा पिरो कर आभूषणों आदि पर लपेटे जाते हैं। हत्या करत हैं। बुक्काग्रमांस ( सं० क्ली० ) बुकस्य अग्रमांस । हृदय, वुगिअल ( हिं० पु० ) पशुओंके चग्नेका स्थान, चरागाह । कलेजा। २ हृदयस्थ मांस-पिण्डाकार अग्रमांस। युगुल ( हिं० पु०) विगुल्न दंग्यो । बुक्कार ( २० पु. ) बुक कि भ्वादि शब्दे भावे घन, बुक बुधाना-हिमालय पर्वतवासो ब्राह्मण जातिविशेष । ये निनादम्तस्य कारः करणं । सिंहध्वनि, सिंहका गर्जन।' लोग अपनेको वाराणसीवासी गौड़ ब्राह्मणके वंशधर बत- बुको ( मं० स्त्री०) बुक्क गौगदित्वात् ङोप । बुक्क, हृदय। लाते हैं। कोई कोई नैठान ब्राह्मणसे इनकी उत्पत्ति वत. बुक्कर । बम्बर --बम्बई के शिकारपर जिलेके मध्यस्थित . लाते हैं। इनका आचार व्यवहार सरोला और गारो सिन्धुनदोके किनारेका दुर्गमुरक्षित एक द्वीप । यह अक्षा. ब्राह्मणों-सा मिलता जुलता है। ये लोग साधारणतः २७°४३ उ० तशा देशा० ६८ ५६ पू०के मध्य अवस्थित : विद्वान, बुद्धिमान और कर्मदक्ष हैं। है। नदीगर्भस्थित यह पर्वतखण्ड ८ सौ फुट लम्बा वुचका (हि.पु०) बुकचा देखा। और ३ फुट चौड़ा है। सकर नगरकी वगल हो कर वुज़कसाव ( फा० पु० ) वह जो पशुओंकी हत्या करता नदीको एक शाखा बह गई है। १३२७ ई० में यह स्थान अथवा उनका मांस आदि बेचता हो. बकर-कसाव । सम्राट महम्मद तुगलककी अमलदारीमें किसी बुजदिल ( फा० वि० ) भीरु, डरपोक। शासनकर्ता द्वारा परिचालित होता था। सम्भावंशीय वजनी हिंस्त्री०) कानमें पहननेका एक प्रकारका राजाओंके अधिकारकालमें यह दुर्ग भिन्न भिन्न गजोंसे गहना। यह करनफूल के आकारको होती है । इसके अधिकृत हुआ था। गजा शाहवेग आघुनने अलोराका बीच झुमका भी लटकाया जाता है । इसे प्रायः व्याही दुर्ग तोड़ फोड कर बुषकुर दुर्गका संस्कार किया । १५- स्त्रियां पहनती हैं। ७४ ई०में सम्राट अकबरशाहने अपने नौकर केशु खांको यह बुजियाला (फा० पु०) १ वह बकरीका बच्चा जिसे कलदर दुर्ग सौंपा । १७३६ ई०में कलहोगके राजाने इस पर दखल : लोग तमाशा करना सिहलाते हैं। २ वह बंदर जिसे जमाया। उसके बाद यह अफगानोंके शासनधीन हुआ। कलंदर तमाशा करना सिखाते हैं। रवैरपुराधिपति भीररस्तम खांने अफगानोंके हाथम्मे यह बुजुर्ग (फा०वि०) १ जिसकी अवस्था अधिक हो, बड़ा। स्थान छोन लिया। २ दुष्ट, पाजी। (पु०) ३ पूर्वज, वाप-दादा । १८३६ ई०में प्रथम अफगान युद्ध के समय खैरपुरके बुजुगों ( फा० स्त्रो० ) बुजुर्ग होनेका भाव, बड़ापन। .