पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४२३

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४१७ बुज्जर-बुद्धक्षेत्र बुजर (हिं पु०) एक प्रकारकी चिड़िया। | बुढौती ( हि स्त्रो ) वृद्धावस्था, बुढ़ापा । बुजी (फा० वि० ) बकरी। युत ( फा० पु० ) १ प्रतिमा, मूर्ति । २ प्रियतम, वह बुज्झा (हि. स्त्री०) एक प्रकारकी चिड़िया। जिसके साथ प्रेम किया जाय । ३ सेसरवुत नामक बुझना ( हिंक्रि०) १ अग्नि शिखाका शान्त होना, जलने बेलमें वह दांव जिसमें खिलाडोके हाथमें केवल तस्वीरें का अंत होना। २ चित्तका आवेग या उत्साह आदि ही हों अथवा तोनों ताशोंकी बुदियोंका जोड़ १०,२० या मंद पडना। ३ पानी आदिको सहायतासे किसी प्रकार- ३० हों। सेसरबुन देना। का ताप शान्त होना। ४ पानीका किसी गरम या तपाई बुतना (हि.क्रि.) बुझना देखा । हुई चीजसे छौंका जाना। ५ तपी हुई या गरम चोज- बुतपररत ( फा० पु० ) १ मूर्तिपूजक, यह जो मूर्तियोंकी का पानी में पड़ कर ठंढा होना। - पूजा करता हो। २ वह जो सौदयका उपासक हो. बुझाई (हिंस्त्रो०) १ बुझानेकी क्रिया। २ बुझानेका भाव । रसिक । बुझाना (हिं० क्रि०) १ जलते हुए पदार्थों को ठंढा करना, । बुतपरस्ती (फा० स्त्री० ) मूर्तिपूजा। अग्नि शान्त करना । २ तप्त पदार्थको जलमें डाल कर बुतशिकन ( फा: पु० ) वह जो मूर्तिपूजाका घोर विरोधी ठंढ़ा करना । ३ चित्तका आवेग या उत्साह आदि । हो, वह जो प्रतिमाओंको तोड़ता या नष्ट करना हो। शान्त करना। ४ ठंडे पानीमें इसलिये किसी चीजको बुताना ( हि कि० ) बुझाना देखो। तपा कर डालना जिसमें उस चोजका कुछ गुण या बुत्त ( हि वि० ) बुत दग्ना। प्रभाव उस पानीमें आ जाय, पानीको छौंकना। ५ बुद ( हिं० वि०) दलालकी बोलामें पांच' ! पानी डाल कर ठंढा करना । ६ सन्तोष देना, जी : बुदबुद ( स० पु० ) पानीका बुलवुला, खुल्ला । भरना। ७ किसीको बूझने में प्रवृत्त करना। बुदबुदा ( हिं० पु. ) पानीका बुलबुला, बुल्ला । बुझारत (हिं० स्त्री०) किसी गांवके जमोंदारोंके वार्षिक बुदलाय (हिं वि० ) दलालकी बोलीमें पन्द्रह। आय-व्यय आदिका लेखा। बुद्धः ( स० पु० ) बुध्यते स्म इति बुध-क्त, यद्वा भाध त, बुड़की ( हिं० स्त्रो०) डुबकी, गोता। वुद्ध ज्ञानमस्याम्तीति अर्श आदित्वादच । भगवानका बुड़ना (हिं० कि०) वड़ना देखो। अवतारविशेष । पर्याय--मर्वश, सुगत, धर्मराज, बुड़बुड़ाना ( हिं० क्रि०) मन ही मन कुढ़ कर या क्रोधमें : नथागत, भगवान्, मारजित, लोकजित् , जिन, पद- आ कर अस्पष्ट रूपसे कुछ बोलना, बड़ बड़ करना। भिज्ञ, दशबल, अद्वयवादो, विनायक. मुनीन्द्र, श्रीधन, बुड़ाव (हिं पु०) डुबाव देखो। शास्ता, मुनि, धर्म, त्रिकालज्ञ, धातु, वोधिसत्व, महा. बुड्ढा (हि वि० ) जिसकी अवस्था अधिक हो गई हो, वोधि, आर्य, पञ्चशान, दशाई, दशभूमिग, चतुरिशजा- ५०.६० वर्ष से अधिक अवस्थावाला। नककक्ष, दशपारमिताधर, द्वादशकक्ष, त्रिकाय, मंगुप्त, बुढ़ना (हिं० पु. ) पत्थर फूल, छड़ोला। दयाकृर्च, खजित, विज्ञानमातृक, महामैत्र, धर्मचक्र, महा- बुढाई (हि स्त्री० ) वृद्धत्व, बुढ़ापा । मुनि, असम, खमम, मैत्री, बल, गुणाकर, अकनिष्ठ, बुढ़ाना (हिं० क्रि०) व द्धावस्थाको प्राप्त होना, बुड्ढा । त्रिशरण, बुध, वक्री, वागाशनि, जितारि, गईण, अर्हन् , होना। महासुख, महाबल। बुद्धदेव दंग्यो। बुढ़ापा (हिं० पु०) १ व द्धावस्था, बुड्ढे होनेको अवस्था। (वि०) २ जागरित, जो जागा हुआ हो। ३ हान- २ बुड्ढे होनेका भाव, बुड ढा-पन । वान, शानी । ४ पण्डित, विद्वान् । बुढ़िया-वैठक ( हि० स्त्री० ) एक प्रकारकी बैठक । इसमें बुद्धकल्प ( पु० ) बुद्धका कल्प, वर्तमान युग। दीवार, खम्भे आदिका सहारा ले कर बार बार उठते बुद्धक्षेत्र ( स० क्ली० ) वुद्धकी लीलाभूमि, वह स्थान जहां पैठते हैं। | एक एक बुद्धका आविर्भाव हुआ है। Vol xv 105