पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४२६

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बुद्धदेव प्रन्धका मत अवलम्बन कर वर्तमान प्रबन्ध लिखा ! चुन लिया और वे ही गौतमबुद्ध या शाक्यसिंहके नामसे जाता है। प्रसिद्ध हुए। बुद्धका पूर्वजन्म । जिस समय ब्रह्माने उन्हें चुन लिया था उस समय इस घोर तमावृत संसारमें असंख्य युगके बाद एक वे ही पृथिवी पर सबोंकी अपेक्षा गरीब थे। • उनके एक बुद्ध आविर्भूत होते आये हैं। शाक्यसिंहसे पहले एक मात्र वृद्धा तथा विधवा माता थी। गौतम वाणिज्य- भी इम पृथ्वी पर अनेक बुद्धोंने जन्म लिया था किन्तु व्यवसायका अवलम्बन कर बड़े कष्टसे अपना और उनका धारावाहिक इनिहास नहीं मिलता । वर्तमान विधवा माताका आहार संग्रह करते थे। एक दिन थे समय बौद्धशास्त्रानुसार महाभद्रकल्य कहलाता है। सौभाग्यवृद्धिको आशासे सुवर्णभूमि नामक देश जानेके इसी कल्पमें क्रकुच्छन्द, कनकमुनि, काश्यप और शाक्य- लिए समुद्र के किनारे पहुंचे और नाविकोंको पुरष्कार सिहने यथाक्रम ३१०१, २०६०, १०१४ और ६३३ ईस्वी स्वरूप कुछ चाँदीके टुकड़े दे कर बोले, 'हे नाविक- सन्के पहले जन्मग्रहण किया था। इन सबोंके पहले गण ! तुम मुझे और मेरी बूढी माताको नाव पर चढ़ा और १२० मनुष्य क्रमानुसार प्रादुर्भूत हुए थे। उनके कर सुवर्णभूमि पहुंचा दो। तुम्हारी अनुकम्पाके सिवा पूर्व अस्सी कोटि बुद्धोंने जन्म लिया था। बौद्धोंका समुद्र पार कर जानेका हमें और कोई दूसरा उपाय विश्वास है, कि हम अनादि संसारमें कुल कितने बुद्धों- . नहीं है।' इस पर नाविकोंने उन दोनोंको नाव ने जन्मग्रहण किया, उसकी शुमार नहीं। पर चढ़ाया; किन्तु अभाग्यवश थोड़ी दूर जाते ही ____ यहां पर अन्यान्य बुद्धोंका चरित न लिख कर वह नाव डूब गई । उत्ताल तरङ्गमें गौतम अपने जीवनकी केवल गौतमबुद्ध या शायसिंहके पूर्व जन्मका वृतान्त माया छोड़ कर माताकी जीवन रक्षामें लग गए । लिखा जाता है। हिंस्र जलजन्तुओं के प्रति लक्ष्य न कर उन्होंने माताको शाक्यबुद्धका पूर्वजन्म । अपनी पीठ पर बिठा लिया और आप तैरने लगे । गौतम- एक समय जब ब्रह्माने देखा, कि ब्रह्मलोकके अधि-: को ऐसा दृढ़प्रतिज्ञ देख ब्रह्माने कहा, -- यही एक मनुष्य यासियोंको संख्या बहुत थोडी बच गई है, तब वे बड़े ही : बुद्धत्वप्राप्तिका यथार्थ अधिकारी है । अनन्तर ब्रह्माकी चिन्तित हुए । इसका कारण ढूंढने पर उन्हें मालूम हुआ, सहायतासे गौतम माताके साथ समुद्र पार कर गए । कि पृथिवी पर असंख्य कल्पके मध्य किसी भी बुद्धने जन्म तव ब्रह्माने बिचारा, कि युद्धत्व लाभ करनेमें जिन सब नहीं लिया है, इसीलिये सभी जीव अज्ञानाच्छन्न हैं। गुणोंका रहना आवश्यक है, गौतममें वे सभी मौजूद हैं। अनेक वर्षों के भीतर पृथिवी पर पुण्यवान् मनुष्योंके जन्म उस समय गौतमने भी बुद्धत्वलाभ करनेका दृढ़ संकल्प नहीं लेनेके कारण कोई भी मरनेके बाद ब्रह्मलोक नहीं किया। कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हुई और उन्होंने आ सकता ; अतएव ब्रह्मलोक जनशन्य हो गया है। ब्रह्मलोकमें पुनर्जन्म प्रहण किया । जिस दिन गौतमके तब ब्रह्मा चारों ओर देख कर सोचने लगे, कि मनमे बुद्धत्वप्राप्तिकी इच्छा उत्पन्न हुई थी उस दिनसे पृथिवी पर क्या कोई ऐसा है, जो कालक्रमसे बुद्धत्व लाभ असंख्य वर्षों के भीतर इस संसारमें एक लाख पच्चीस कर सकता है ? बादमें ध्यानयोगमे उन्हें मालूम हुआ, हजार बुद्धोंने अवतार लिया था ; किन्तु गोतम तब तक कि कमल जिस प्रकार खिलनको आशासे सूर्योदयकी भी संबोधि लाभ न कर सके थे। प्रतक्षा करता है, उसी प्रकार तमसाच्छन्न पृथिवी पर : सर्वभद्रकल्पमें गौतम धन्यदेशीय सम्राटके पुत्ररूपमें एक ज्ञानवान् मनुष्य बुद्धत्वलाभकी प्रत्याशामें काल- आविर्भूत हुए और इसी कल्पमें उन्हें वाक्प्रणिधान यापन कर रहा है। उन्हें यह भी मालूम हुआ, कि बुद्ध- उत्पन्न हुआ उनका कहना था, "मैं बुद्ध होऊगा और त्वलाभके लिए जो सब प्राथों पृथिवी पर विद्यमान हैं, बुद्धत्वलाभ करना ही मेरा अभीष्ट है।" उनमेंसे एक ही सर्वश्रेष्ठ हैं। इस पर ब्रह्माने उन्हींको सारमन्दकल्पमें गौतमने पुष्पवती नगरीमें राजा सुनन्दके