पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४८८

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बेकस-बेकुक केनिफोरिया, फालिका, वाकानलिया वा देवानसिया न्यासुसके पुत्र तथा ५ जुपिटर चन्द्रके पुत्र हैं। नामसे पाश्चात्य जगत्में विदित हैं। दनायुस और वर्तमान कायरो नगरसे ३ सौ मील दक्षिण उसर उनकी कन्याने मित्रसे इस पूजाका ग्रीसमें प्रचार किया। मिस्र के शिवा नामक चेशिश में प्रायः १८०० ई० सन्के इस उत्सवमें पहले बहुतने लोग शराब पीते थे। यहां पहले प्रतिष्टित जुपिटर ( वृहस्पति ) मन्दिरका ध्वस्त तक कि वे आत्मविस्मृत हो वहुतसे निन्दित कर्म भी कर निदर्शन दष्टिगोचर होता है। डालने थे । १८० ई०में बेकस-प्रवर्तित उत्सवको दुर्दशा ___पाश्चात्य जगतमें बेकसके लिङ्गरूपकी नाना भावमें देग्य कर रोम-गवर्मे एटने यह उत्सव मदाके लिये बन्द ! उपासना होती है। कभी तो वे भीरु रमणीजनाचित कर दिया। सुकुमार युवक, कभी मस्तक पर द्राक्षा वा आइभी- बेकसपूजामें जो सब स्त्रियां पुरोहितके कार्यमें लिप्त लताका किराट और कभी हाथमें त्रिशूल लिये रहते हैं। रहती थीं, उत्सवभेद और देशभेदसे वे विभिन्न वस्त्र व्याघ्र और सिह उनका प्रियवाहन और मागपाइ नामका पहनती थीं। परिच्छदकं तारतभ्यानुसार वे मेन्डिस, पक्षी उनको अतिप्रिय है। वे व्याघ्रचम से समाच्छादित थायडिस, काण्टिस, मिमलोनाइडिम, वासराइडिम हो भारतविजयके लिये गये थे। फिर कभी वे तारका- आदि नामोंसे जनसाधारण में प्रसिद्ध थी। मिवामी मण्डित भगोल पर उपविध मतिम सूर्य वा ओसिरिस- बेकसकी तृपिके लिये गृहद्वार पर शकरवलि देते थे। के समान पूजित होते हैं। भारत भ्रमणकारो बहुतसे अधिकांश जगह छागबलिकी हो प्रधानता देवी जाती ग्रीक ग्रन्थकारोंने हिन्दजातिके उपास्य एक बेकसका थी। क्योंकि, छागकुल द्राक्षालताका नाश करने में मदा उल्लेख किया है। अधिक सम्भव है कि वे भारतवर्ष उन्मुख रहता था। ग्लिनिका कहना है, कि देवताओंके महादेवको लिङ्गपूजाके साथ प्रीकदेशीय बेकसके लिङ्ग मध्य इनका मस्तक मुकुटालंकृत, कामदेवकी तरह सुरम्य मयी देवनारूपकी मदशता देख कर ऐसा निर्णय कर और कुश्चितकेशकलापसे मस्तक समाच्छादित मानो चिर- गये हों। यौवन उनके मुवचन्द्र पर मदा विराज करता है। कभी बेकहा (हिं० वि० ) किमीको आज्ञा या परामर्शको न तो वे हाथमें शृङ्ग लिये विराज करते हैं। इस शृङ्गके माननेवाला । सम्बन्धमें पाश्चात्य जगन्में किंवदन्ती है, कि बेकसने कानूनी (फा० वि०) नियमविरुद्ध, जो कानून या कायदे- वृषके द्वारा भूमिकर्षणकी शिक्षा दी थी, उसीके निदर्शन के खिलाफ हो।। स्वरूप उन्होंने हाथमें शृङ्ग धारण किया है। फिर कोई बेकाबू ( फा० वि० ) १ जिसका अपने ऊपर काबू न हो. कोई कहते हैं, कि लाइरियर मरुक्षेत्रमें जब वे पलवल ! विवश । २ जिस पर वि.सीका काय न हो, जो किसीके समेत पहुंचे और निदारुण तृष्णासे कातर तथा मृतप्राय: वश न हो। हो गये थे, उम ममय उनके पिता जुपिटरने भेडाका बेकाम ( हि थि० ) १ जिसे कोई काम न हो, निकम्मा। रूप धारण कर उन्हें जलपथका सुगम पथ बतला दिया (क्रि० वि० ) २ निरर्थक, व्यर्थ । था। उस घटनासे कृतज्ञता-स्वरूप वे शृङ्गधारी हो बेकायदा ( फा० वि० ) नियमविरुद्ध, कायदेक ग्विलाफ । गये हैं। दियोदोरसने जिन तीन प्रकारको बेकसमूर्तिका बेकार ( फा० वि०) १ निकम्मा, निठल्ला । २ जो किमी उल्लेख किया नै उनमें से (१) भारतविजयी बेकस काममें न आ सके, निरर्थक । दीर्घ श्मश्रुममन्वित, (२) जुपिटर और प्रसाइनके पुत्र बेकारी (फा० स्त्री० ) बेकार होनेका भाव, खाली या निरु शृङ्गधारी और (३) जुपिटर तथा सिमिलोके पुत्र , द्यम होनेका भाव थेविसकी बेकम हैं। सिसिरोके मतानुसार १ प्रसा- : बेकसूर ( फा०वि०) निरपराध, जिसका कोई कसूर न इन पुत्र, २ न्यासके पुत्र, ३ केप्रियसरके पुत्र, इन्होंने भारत- हो। वर्ष में अपना प्रभुत्व फैलाया था, ४ थ्युनी और बेकुक---एक मुसलमान धर्मसम्प्रदाय। एक धर्मप्रतारक