पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४८९

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बेकुरा-वेगमपुर मुसलमान पाखण्डो साधु ही इसका प्रवर्तक है। १८वीं पदार्थों का एक थैला। इसका मुंह ऊपरसे बद किया शताब्दीके प्रथम भागमे इस व्यक्तिने दिल्ली राजधानी जा सकता है। पहुंच कर जनसाधारणके वाव यह घोषणा कर दी, वेगड़ो : हि'. पु० ) १ वह जो हीरा काटता हो, हीरा- कि मैंने अभिनव कुरान पाया है। इस कुरानका भाव तराश। २ वह जो नगीना बनाता हो, हक्काक। स्वयं ईश्वरने व्यक्त किया है, इत्यादि। बहुतसं लोग बेगतो ( हि स्त्री० ) बगालको खाडीमें मिलनेवाली एक उसको वान पर विश्वास कर तथा प्रन्थका मम और प्रकारकी मछली। यह प्रायः ४ हाथ लवी होती है मूलतत्त्व जान कर शीघ्र हो उसके शिष्य बन गये। देखते और इसका मांस स्वादिष्ट होता है। देखते इस नवीन कुरानके मतानुयायियोंका एक येगनूरी या कुचिन- एक मुगल-सेनापति । इन्होंने सम्प्रदाय संगठित हो गया। इस सम्प्रदायके मुगल सम्राट अकबरशाहकं अन्यतम सेनापति मुइज्जुल गुरु था आचार्य स्थानीय मौलवीगण 'बेकुक' । मुल्कके अधीन ग्वैराबाद युद्ध में विशेष प्रसिद्धि प्राप्त की थी नामसे प्रसिद्ध हुए और उनका शिष्य-सम्प्रदाय फगबद। अनन्तर सम्राटके शासनकालके ३२वें आर ३३वे वर्ष में कहलाया। उक्त मुसलमान पाखंडी साधुने प्राचीन इन्होंने यथाक्रम अबुल मतलब और कादिक खाँके अधीन पारसी धर्म ग्रन्थमे कुछ अपने मतके अनुकूल बचन नारिकियों के साथ युद्ध किया था। एक हजार सेना उद्रत करके म्यीय कल्पनाबलमे उक्त कुरानका मालन इनके अधीन रहती थी। १००१ हिजगेमें इनकी मृत्यु किया था। बेकुरा ( म० स्त्री० ) १ वाक्य । २ वाद्ययन्त्रभेद। बेगम ( तु. स्त्री० ) १ राज्ञी, रानी। ताशके पत्तों से बेकुरि ( स स्त्री० वाया। पक पना। इम पर एक स्त्री या रानीका चित्र बना बेख ( फा० स्त्री०) मूल, जड़। होता है। यह पत्ता केवल इफ्के और बादशाहसे छाटा बेखटक ( हिं० वि० ) १ विना किसी प्रकारके ख केके, और बाकी सबसे बड़ा समझा जाता है। बिना किसी प्रकारका रुकावट या असमंजसके । येगम उचकुलोद्भव मुसलमान रमणियोंकी उपाधि । ( क्रि० वि० ) २ निस्सङ्कोच, विना आगा पीछा किप, माधारणतः मुगल बादशाहकी पत्नियां इम उपाधिसे बेखता ( फा० वि० ) , निरपराध, बेकसूर । २ अमोघ, सम्मानित होती थी । मुगल 'येग' उपाधि पुलिङ्गमें और अचूक। 'वेगम' स्त्रीलिङ्गमें व्यवहत होती हैं। पाठानोंके मध्य बेखवर ( फा० वि० ) १ अनजान, नावाकिफ। २ ये बुध, बीवी, निसा, ग्वानुम, ग्वानुम, वानु आदि उपाधियां बेहोश। । बेगमकी राह सम्मानसूचक समझी जाती है। यही कारण बेखबरी (फा० स्त्री० । अज्ञानता, बेग्वबर हानका भाव । है कि वंगम वा वेगम माहवा कहने साधारणतः बाद २बेहोशी। शाह पत्नी, राजी, राजमहिपी. गनोका ही वोध होता है। बेखुर ( हि० पु० ) एक प्रकारका पक्षो। इसका शिकार बेगमगज बङ्गालके नोआग्वाली जिलान्तर्गत एक गण्ड- किया जाता है। यह काश्मीर, नेपाल और बंगालमें प्राम। यहां एक थाना है। स्थानीय वाणिज्यकी पाया जाता है। परंतु अक्तूबर में पहाड़ परसे उतर कर कुछ कुछ उन्नति देखी जाती है। समभूमि पर आ जाता है। फल मूल ही इसका प्रधान बेगमपुर · हुगली जिले के अन्तर्गत एक गण्डग्राम। यहां आहार है और प्रायः नदियों या जलाशयोंके किनारे छोटे . सूती कपड़े का विस्तृत कारवार है। छोटे झुडोंमें रहता है। बेगमपुर बम्बईके शोलापुर जिलेके शोलापुर तालुकका एक बेखौफ़ ( फा० पु. ) निर्भय, निडर । गण्डग्राम । यह अक्षा० १७३४ उ० तथा देशा० ७५३४ पू० बेग (हिं० पु. ) वेग देखो। भीमा नदीके दहिने किनारे शोलापुर शहरसे १२ मील वेग ( पु० ) कपड़े, चमड़े या कागज आदि लचीले दक्षिण पश्चिममें अवस्थित है। जनसंख्या २३०४ है।