पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५००

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४६. बेतुल-बेचादपुर हुई थी। अनन्तर गौलिराजाओंने प्राचीन गोड़राज- मिलते हैं। अभी कुल मिला कर १ मिडिल इङ्गलिश वंशको परास्त किया। किन्तु थोड़े हो समयके अन्दर , स्कूल, ३ वर्नाक्युलर मिडिल स्कूल और ६० प्राइमरी उस गोंडजातिने फिरसे नई शक्तिका सञ्चय कर अपने स्कूल हैं। स्कूल के अलावा ३ चिकित्सालय हैं। पूर्वराज्य पर अधिकार जमाया। जो कुछ हो, प्रायः २ उक्त जिलेकी एक तहसील । यह अक्षा २१ - १७०० ई०के समकाल में गोंड़सरदार राजा भकत बुलन्द २२ से २२ २२ उ० तथा देशा० ७७ ११से ७८.३ पू०- बेतुल मिहासन पर अधिष्ठित थे, ऐसा प्रमाण मिलता के मध्य अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः १७०६६४ है। है। राजा गोंड़ जानिके होने पर भी इसलामधर्ममें , इसमें बदनूर और बेतुल नामक २ शहर और ७७७ ग्राम दीक्षित हुए थे। देवगढ़ राजधानीमें रह कर राजा भकत लगते हैं। बुलन्द घाटपर्वतमालाके निम्नवत्ती नागपुर राज्यका ३ उक्त तहसीलका एक प्रधान शहर। यह अक्षा० शासन करते थे। उनकी मृत्युके बाद उनके एकमात्र . २१५२ उ० तथा देशा० ७७° ५६ पू० बदनूर शहरसे पुत्र हो राजा हुए। पोछे १७३६ ई० में उनके स्वर्गवासी तोन मील दूर पड़ता है। जनसंख्या ५ हजारके करीव होने पर उनके दो लड़कोंमें राज्यसिंहासन ले कर विवाद . है। बदनूर नगरमें जिलेका सदर उठ जानेके पहिले खड़ा हुआ। बेगरके महाराष्ट्र सरदार रघुजी भोंसले इसी शहरमें अगरेजोंका आवास था। वहांका प्राचीन उस विवादको निवटानेके लिये मध्यस्थ बने। परन्तु ' दुर्ग और अङ्रेजोंका समाधि-उद्यान देखने लायक है। दोनोंके बीच राज्यविभाग कर देनेके बदलेमें यहांके अधिवासी मट्टोके अच्छे अच्छे बरतन बनाते हैं उन्होंने बेतुल राज्यको भोंसलोंके अधिकृत राज्य- जो भिन्न भिन्न स्थानोंमें बिक्रीके लिये भेजे जाते हैं। में मिला लिया । १८१८ ई०में अप्पा साहबकी . शहरमें १ वर्नाक्युलर मिडिल स्कूल और १ बालिका- पराजय और पलायनके बाद अगरेजोंके युद्धके खर्च स्कूल है। स्वरूप दाक्षिणात्यका जो अंश मिला, वर्तमान वे तुल बेतुलपिउदङ्गड़ी --मन्द्राजप्रदेशके मालवार जिलान्तर्गत एक जिला उसीका एक अंश है। १८२६ ई०को सन्धिके नगर। यह अक्षा० १०.५३ उ० तथा देशा० ७२५८ अनुसार बेतुल भूभाग स्पष्टतः गृटिश अधिकारमुक्त हो १५ पू के मध्य तिरुके रेल-स्टेशनसे २ मोल पूर्व में गया। १८१८ ई० में अप्पा साहबके माथ अगरेजोंका अवस्थित है। यहां बेतुलनाद राजवंशका एक प्रसाद जो युद्ध छिड़ा था, उसमें अङ्ग्रेजोंने मुलताई, बेतुल और था। १७८४ ई०में टोपू सुलतानने इसे तहस नहस कर शाहपुरमें सेनाको छावनी डाली थी। आखिर अप्पा डाला। अभी ध्वंसावशेषके उपकरण ले कर यहांकी साहब पांचमाढीसे पश्चिमकी ओर दलबल समेत भाग जजी और कलक्टरी अदालत बनाई गई है। गये । १८६२ ई. तक बेतुलमें अङ्रेजी सेना रखी गई थी। बेत्ततुर -मन्द्राज-प्रदेशके मालवा जिलान्तर्गत बल्लवनाड़ इस जिलेमे २ शहर और ११६४ ग्राम लगते हैं। तालुकका एक प्राचीन गण्डग्राम । जनसंख्या तीन लाखके करीब है। गेहूं, धान, उड़द, बेत्तवलुम --मन्द्राज-प्रदेशके दक्षिण अर्काट जिलान्तर्गत तेलहन, ईख, रूई, पटसन, तमाक तथा और दूसरे दूसरे कलकुचों तालुककी एक जमीदारी। अनाजोंकी खेती होती है। जलवायु उतना खराव नहीं बेत्तादपुर-दाक्षिणात्यके महिसुर-राज्यके अन्तगत एक है। वृष्टिपात माया प्रतिादन हुआ करता है । चैत्र मास-: पर्वत। यह अक्षा० १२. २७ उ० तथा देशा ७६७ पू० के शेष तक यहां गरमी रहती है। खामलाशैलका अधि- समुद्रपृष्ठसे ४३५० फुट ऊँचा है। पर्वत कोणाकार है। त्यका देश अङ्गजोंके पक्षमें विशेष मनोरम है। उदरा-. इसकी चोटी पर सुप्रसिद्ध मल्लिकार्जुन महादेवका मन्दिर मय रोग यहांका मारात्मक है। अवस्थित है। पर्वतके पादमूलमें बेत्तादपुर नगर है ___ विद्याशिक्षामें प्रान्तके मध्य इस जिलेका स्थान जहां सङ्केति ब्राह्मण अधिक संख्यामें रहते हैं। १०वीं बारहयां आया है। सैकड़े पीछे ४ मनुष्य पढ़ लिखे शताब्दीमें येङ्गल राय नामक एक जैन राजाने लिगायत