पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५०९

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धेरार (बरार) ५०३ स्कार देनेके लिए १८६० ई०के दिसम्बर मासमें और एक यन पेनिन्सुला और निजामस् स्टेट रेलवे स्थापित होनेके सन्धि की, जिसमें अगरेजोंने निजामसे प्राप्य और भो बाद यहांके बाणिज्यको यथेष्ट उन्नति हुई है। ५० लाख रुपयेका दावा छोड़ दिया। सूरपुरके विद्रोही शहरमें ४ शहर और ५७१० ग्राम लगते हैं। जन राजाका राज्य छीन कर निजामको अर्पण किया तथा संस्था २८ लाखके करीब है जिनमें हिन्दुओंको संख्या धाराशिव और रामचूर दोआव उन्हें लौटा दिया। लगभग २४॥ लाख, मुसलमान २ लाखके करीब तथा निजामको अंग्रेजों से सम्पत्ति तो मिली पर उन्हें भी . गोड़, कुकु भादि असभ्य जातियोंकी संख्या १ लाख ७० उसके बदले गोदावरी नदीके वामकूलमें अवस्थित कई हजार होगी। जैन, सिख, पारसी और ईसाई भी है, जिले और नदीमें बाणिज्यके लिए जो शुल्क वसूल होता जिनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। अधिकांश लोग कृषि- था, यह छोड़ देना पड़ा। जीवी हैं। यहां ज्वार, बाजरा, गेहूं, चना, धान, तिल, ___ इस प्रकारसे अङ्ग्रेजों ने बदलेमें जो निजामसे बरार सन, तम्याकू, ईख, कपास, मसीना, तैलकर बीज, गांजा, और अन्यान्य जिलोंमें सम्पत्ति प्राप्त की थी, उसको आम, अफीम और पोस्त आदिको खेती होती है। यहांके अधि- दनी १२ लाखकी थी। अंग्रेज गवर्मेण्ट उस रुपयेसे वासी शारीरिक परिश्रमसे अनेक वस्तुए उत्पन्न करते १८५३ ई०की सन्धिके अनुसार कार्य करेगी। निजाम हैं और उनके विनिमयमें वे अन्य देशकी वस्तुओंकी सरकारको उसे आयव्ययका हिसाब नहीं देना होगो । उक्त आमद करते हैं। ये भी किसी चीजको अच्छी तरह पसाइण्ड डिष्ट्रिकृमें सेनाओं के बेतनके लिये निजाम पूरा नहीं कर पाते हैं, और न यहां ऐसे कल-कारखाने द्वारा दी गई जो जागिरें थी तथा निजामके अपने व्यय- आदि हैं, जिनसे ये अपने काममें आने योग्य वस्त्रादि के लिये जो सम्पत्तियां थीं उन्हें अपने शासनाधीन करने- बना सके। कितने ही लोग सूतके मोटे कपड़े, गलीचे के अभिमायसे अङ्गरेज-सरकार अन्य स्थानों में सम्पत्ति भौर चार्जामा बनाते तो हैं, पर उनका आदर नहीं है । देकर उसका बदला कर सकती है। रेशमी कपड़े बुननेका थोड़ा-बहुत कारोवार होता है। १८६१ में इस परिवर्तनके सिवा १८५३ ई०से कहीं कहीं वस्त्र धुननेका व्यवसाय भी चलता है । बरारका और कुछ राजनैतिक परिवर्तन नहीं हुआ। बुलदानाके निकटवत्ती देवलघाटमें इस्पातसे अनादि १८५७ ई० में सिपाही-विद्रोहके समय भी यहां विप्लवके बनानेका सामान्य कारोबार होता है। नागपुरसे महीन विशेष लक्षण नहीं दिखाई दिये थे। १८५८ ई०में तांतिया वस्त्र तथा अन्यान्य आवश्यकीय चीजें बम्बईसे लाई तोपी अपने दलबल सहित सातपुरा शैल तक आ पहुंना जाती हैं। था सही, परन्तु उसे बरारको उपत्यकामें कोई प्रदेश हाथ अमरावती, आकोला, आकोट, अञ्जनगांव, बालापुर, नहीं लगा। बासिम, देवलगांव, इलिचपुर, हिबारखेद, जलगांव, करिक्षा ___ अंग्रेजी शासनमें बरारको उन्नतिके सिवा अवनति : खामगांव, करसगांव, मलकापुर, परतवाड़ा, पाथुर, नहीं हुई है। जो बरार किसी समय महाराष्ट्र और मुगलों सेन्दुरजना, सेगांव और जेउटमाल मगर बरार प्रदेशको के अत्याचारोंसे जनशून्य हो गया था, वही बरार- समृद्धिके परिचायक हैं। अमरावती, आकोला, खाम- अंग्रेजोंके शान्तिमय शासनसे जनपूर्ण हो गया । बङ्गाल.' गांव, सेगांव और यासिममें म्युनिसिपलिटी है। के भूतपूर्व गवर्नर (छोटे लाट ) सर रिचर्ड टेम्पलने इस भारतके राज-प्रतिनिधि लार्ड कर्जनके राजनैतिक स्थानके राजकीय विवरणमें बरारकी तत्कालीन समृद्धि- कौशलसे १६०६-७ ई०में बरार प्रदेश निजाम-सरकारके का वर्णन किया है। अमेरिकाके युद्धके समस्त यहांका : अधिकारसे च्युत होनेसे पहले, यह प्रदेश एक चीफ कईका व्यवसाय बहुत बढ़ा चढ़ा था। यहां तक कि उस . कमिश्नरके द्वारा शासित होता था। उनके अधीन १ समय रुपये देने पर भी भादमी नहीं मिलते थे। लोग : जुडिसियल कमिश्नर तथा १ राजस्व-विभागीय कमि- मुह-मांगे दाम ले कर काम पर लगते थे, प्रेट इण्डि- : श्नर, ६ डेपुटी कमिश्नर, १७ असिस्टेण्ट कमिश्नर और