पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५१२

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५०६ वेलगांव ( बेलगाम)-बेलदार चैत्र मासमें देवीके उद्देशसे पूजा होती और तीन दिन तक बांसकी पैदाइश बहुत है। इस लिए कनाडो भाषामें मेला लगता है। उस समय यहां करीब ४० हजार तीर्थ. इसका नाम बेन्नुग्राम था, और उसीसे बेशु, बेलु वा यात्रियोंका समागम होता है। कात्तिकमें मूल मन्दिरसे | बेलगाम हो गया है। यहांका गिरिदुर्ग छोटा होने पर कुछ दूरी पर एक छोटेसे पीठमें जा कर मारण-क्रियावोधक , भी सुरक्षित है। आयतन लम्बाईमें १००० गज और चौड़ाई पूजादि होती है। इसके बाद आई हुई स्त्रियां बलमा ! में ७०० गज है। १८१४ ई में पेशवाके अधःपतन पर देवीके पति-वियोग-जनित दुःखमें समवेदना प्रकट करनेके ; अनरेजी-सेनाने दुर्ग पर अधिकार कर लिया। २१ दिन लिप रोनेके स्वरमें भीषण चीत्कार करती हैं । बीम-तोम अबरोधके बाद दुर्गस्थ सैनिकोंने अंग्रेजोंक हाथ आत्म- हजार स्त्रियों का एक साथ मिल कर चीत्कार करना कैम समर्पण किया था। भीषण होता होगा, इसका सहज ही अनुमान किया जा . किम्बदन्ती है, कि १.५१६ ईमें यह दुर्ग बना था। इसके सकता है। फिर घे स्त्रियां देवों के वैधव्यकी ममवेदना भीतर आमद खांको दरगाह वा मजिद सफा और दो अपने हाथोंकी चूड़ियां और कड़े आदि गहने तोउ. या जैन मन्दिर हैं, जो क्रमशः १२वीं और १३वीं सदीमें बने खोल डालती हैं। हैं। दरगाहके प्रवेशद्वारमें १५३० ईका एक शिलालेख है। २ बम्बई प्रेसिडेन्सीके बेलगाम जिले का एक उपवि- अंग्रेजोंके अधिकारमे आनेके बादसे बेलगांव नगर- भाग। यह अक्षा० १५.४१ से १६३ उ० तथा देशा० : को नाना विषयोंमें श्रीवृद्धि हुई है। वाणिज्यके प्रभाव ७४.२ से ७४४३ पू० के मध्य अवस्थित है। इसका से नगर धन और जनसे परिपूर्ण है। सेना-निवास भूपरिमाण ६४४ वर्ग-माइल है। इसमें बेलगाँव नामक स्थापित होने के साथ ही यहां देशीय वालकोंके शिक्षार्थ १ शहर और २०१ प्राम लगते हैं । जनसंख्या डेढ़ लाखके स्कूल आदिको व्यवस्था हो गई है। विनगुरला बन्दर करीब है। .. यहाँका प्रधान बाणिज्य केन्द्र हैं। उसी स्थानसे यहां ___ इस उपविभागमें निम्नलिखित गिरिदुर्ग विद्यमान को चोज वस्तु रवाना होता है और बाहर से आती है। है : --१ बेलगामदुर्ग । २ महीपतगढ़दुर्ग यह चेलगाम . यह सूती कपड़े बुननेका व्यवसाय होता है। शहरमें से माइल पश्चिमोत्तरमें सुन्दी नामक स्थानमें अब- कुल मिला कर ३०० करणे, ६ म्युनिसिपल प्राइमरी स्थित है। ३ कलानिधिगढ़ जो वेलगाममे १७ माइल स्कृल और २ हाई स्कूल हैं। अलावा इसके गुरोपियन पश्चिममें कलियडे नामक स्थानमें है। ४ गन्धर्वगढ़ और यूरेशियन लड कोंके लिये भी दो स्कूल हैं। बेलगांवसे १६ माइल पश्निमोत्तरमें कोराज नामक स्थान- बेटगिरी ( हि० स्त्री० ) ये टके फलका गूदा । में अवस्थित। ५ पारगढ़- यह बेठाराममे ३२ माइल बेठनक ( हि० पु० ) बेलचा देखा। पश्चिम-दक्षिणमें पारमढ़ पहाड के शिखर पर। ७ वेलच। ( फा० पु० ) १ एक प्रकारका छोटो कुदाल । इम- चांगद जो बेलगामसे २२ माइल पश्चिममें अवस्थित से मालो लोग बागको क्यारियां आदि बनाते हैं। २ है। यहां खेलनाथका मन्दिर है। कोई छोटो कुदाल। ३ एक प्रकारको लंबो खुरपो। ३ उक्त जिलेका प्रधान नगर। यह समुद्रपृष्ठसे व लजियम -यरोपखण्डके अन्तर्गत एक छोटा राज्य । २५०० फुटकी ऊंचाई पर बेलगनाला नामक ार्कण्डो . अन्तस्थ 'व'में देखो। नदीके एक प्राखास्रोतके ऊपर स्थापित है। मागडो बेलजत ( फा० वि० ) १ स्वादु-रहित, जिसमें किसा और घाटप्रभाने परस्पर सम्मिलित हो कर कृ.पानलोके । स प्रकारका स्वाद न हो। २ जिसमें कोई सुख न मिले। येलडी ( हि० स्त्री०) छोटी बेल या लता। कलेवरको पुष्ट किया है। यह शहर अक्षा० १५.५६ - बेलदार -बिहार और पश्चिम-बङ्गालमें रहनेवाली एक उ० तथा देशा० ७४ ३२ पृ०के मध्य अवस्थित है। 24 मचायत है। ! निम्नश्रेणीकी जाति । ये लोग 'बेल' ( कुदालीकी तरहका जनसंख्या ३५ हजारसे ऊपर है । इसके पूर्वमें दुर्ग तथा एक औजार )-से मिट्टी आदि खोदते हैं। इसलिए इनका पश्चिगम सेनानिवास है । आकृति असमवन है। यहां नाम 'बेलनार' पड़ा है । रानोगा भौर बराकरको