पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५१८

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वैनि-बैठवाई एक बार जो हुकुम दे देतो था उसकी तामोल न करनेसे ३ बैठनेका ढंग वा देव। ४ #ग, मेल । ५ एक प्रकारको वह बहुत रंज होती थी। पिताके आदरसे लालित कमरत । इममे बार बार खा : डोना और बैठना पड़ता पालित और निज प्रवृत्तिवशसे परिचालित हो उनका है। ६ पदम्तल, आधार । ७ अधिवेशन, सभासदोंका चरित्र धीरे धीरे पुरुपोचित वुद्धि और विक्रममे पूर्ण पकान हाना । ८ बैरनेका व्यापा., पेठाई। ६ बैठनेको क्रिया.। हो गया था। स्वामीके ऐश्वर्य और वीरत्वने उनकं १० कांव वा धातु आदिका दंट जिसके सिरे पर बत्ती हृदयमै राजशकिका प्रभुत्व प्रभाव मम्पूणरूपसे ऑकिन बरनी गा मोमबत्ती खाँसो जाता है। कर दिया था। बेटका । पु० । वह नीपा दालान आदि जहां जा १८२७ ई मे स्वाभाका मृत्यु होने पर उन्होंने राज्य कार लोग उसमे मिलने या उ.पंथी पास बैठ कर वात. भार अपने हाथ लिया। कुछ दिन पाछे जनक..।नाम नोन करने हों। अपने स्वामीक किमा आत्मायका उन्हान गोद ले राज्यविहा- कोकी । हे०७.० ।। बार वार ठने और उठनेको कस- सनका भावी उत्तराधिकारी स्थिर किया था। जनकजाक रत, बक। आसन, आर। नावालिग होनेके कारण वे ही राजकार्यको पालाचना वैन । त्रिो०)। चने कया । २ व ठनेका भाव । करतो था। किन्नु नावालिगके ऊपर कठार व्यवहारले उनका नंग। आन और अत्याचार करनेसे भ। वे कमा बाज नहीं आता था। व कि) १ किलो पर इस प्रकार टिकना इस प्रकार उपर्य परि माताके प्रपोइनका जनकजी सहन किम शरीरका आ, निचला भाग उस न कर सके। उन्हाने इन सब अत्याचारी छुटकारा - जगा , आसन जाना। २ तौलमें ठहरना पाने के लिये टिश-सरकारका शरण ला । अतः सरकारने परना पड़नः। गलता । माना, विगड़ना। ४ १८३३ मे जनकजाका सिन्दराजका गद्द। पर कठाया। गहुभाननाना अभ्यस्त होना, इसस बंजाबाईका प्रभुत्व विलकुल जाता रहा। हाल को अवकाशमें ठोक रूप- भावसे राजप्रासादम रहना अच्छा नहीं समझा, साज

ए होने पर उसमें घुली

वह राजप्रासादका परित्याग कर आगरा आ रहन लगा। नगना। ८पानो या यहां कुछ दिन रह कर वह फर्रुखाबादका चला ग । iiiii . : आदि पा कर नोचे आखिर दाक्षिणात्यमा उनका जानार था वहां उन्धान

1: न पर स्थिर हो कर अपना शेप जाबन बिताया था। ना। १० ११ स्वच होना, बजि ( संकान) बाज सम्बन्धी । माना । १२ यता पानेमें गोला हो बंजक (सं० त्रि०) १ शिव तैल । २ हेतु। ३ आत्मा। मा।लित वस्तु काट स्थान पर पहुंचना । ४ सद्याऽङ्कर, हालकी उगी हुई कॉपल। बाई आदि पर अपार हो. i ! १५ पौधेका जमीनमें बैंजोय सत्र.) बीजसम्बन्धीय। पड़ जाना, लगना। १६ विमा पद पर स्थित होना, बजेय सपु०) वाजभव, बायाकं उत्पन्न। जमना। १७ ममना, अटना। किम स्त्रोका किसी बैटरो ( अ० स्त्री०) १ चाना या शाश आदिका पात्र । पुरावा यहां स्त्रांक ममान राना, घरमें पड़ना। १६ इसमें रासा:नक पदार्थाक यागस रासायनिक प्रक्रिया पक्षांका ' पेना। २०२१४ करना, जोड़ खाना। काबिजली पैदा करके काममलाई जानी है। २ताप काम रटना, निम्योगह। २२ गुडका बह जाना खाना। यापिघल जाना। बैया (हि० सी०) रुई ओटनेको चखी, आटना। वरना । हि स्वा० । करधेमे पह स्थान जहां जुलाई बैठ (हिं० पु०) राजकाय कर वा उसका दर। ___ कपड़ा बुनते समय बठत है . बैठक ( हि० स्रो० ) १ बैठनेका स्थान । २ आसन, पाठ। बैठवाई ( हिं० स्त्रो० ) बैठानेकी मजदूरी।