पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५५

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Y फतेपुर पर उनके पूर्वदेशीय राज्य नवाब वजीरने ५० विधाशिक्षामें यह जिला बहुत पीछे पड़ा हुआ है। लाख रुपयेमें अंगरेजोंसे खरीद लिये । १७६८ ईमें जिले भरमें १७७ सरकारी और १८० खानगी स्कूल हैं। यहांकी पूर्वस्मृद्धिका ह्रास हुआ । वजीरके यहां राज-कर स्कूल के अतिरिक्त यहां ६ अस्पताल हैं जहां रोगियोंकी बाको पड़ जानेके कारण १८०१ ई०में इलाहाबाद और अच्छी चिकित्सा की जाती है । कोरा अंगरेजोंके हाथ लगा। इस समय फतेपुरका कुछ २ उक्त जिलेकी एक तहसील। यह अक्षा० २५ अंश इलाहाबादमें और कुछ कानपुर में मिला दिया गया ४३से २६४ उ० और देशा० ८०'३८ से ८१४ पू०के तथा १८१४ ई०में गङ्गाके किनारे बिठुर नगरमें नई राज- मध्य अवस्थित है। क्षेत्रफल ३५६ वर्गमील और जन- धानी बसाई गई। संख्या दो लाखके करीब है। इसमें इसी नामका एक १८५७ ई०के जूनमासमें सिपाही-विद्रोहके समय इस शहर और ३७४ प्राम लगते हैं। स्थानके गृहादि जला दिये गये और अगरेज-अधि- ३ उक्त तहसीलका प्रधान नगर। यह अक्षा० २५ वासियोंका यथासर्वस्व लूटा गया था। निराश्रय रम- २६ उ० और देशा० ८०५० पू०के मध्य अवस्थित है। णियों और बालिकाओंमें हाहाकार मच गया था। जनसंख्या प्रायः १९२८१ है। बहुत प्राचीनकालसे यह विद्रोहीदल अङ्गरेजको देखते ही जानसे मार डालते थे। नगर स्थापित है। सम्राट् बाबरने अपने इतिवृत्तमें प्रायः एक मास तक फतेपुर सिपाहियोंके अधिकारमें रहा। इसका उल्लेख कर गये हैं। औरङ्गजेबके शासनकालमें ३०वीं जूनको जेनरल नीलने मेजर रेण्डको इलाहा। इसकी बहुत कुछ उन्नति हुई थी। अयोध्याके सचिव वादसे कानपुर भेजा। १९वीं जुलाईको जेनरल हेबलकने नवाब बाखरअली खाँका समाधिस्तम्भ और मसजिद् खागामें जा कर रेणडका साथ दिया। १२वीं जुलाईको। तथा कोरावली हाकीम अबदल हुसेनका धर्ममन्दिर ही विद्रोहीदल अच्छी तरह परास्त हुए। इसके बाद अङ्ग उल्लेख योग्य है। यहां चमड़े, साबुन, चाबुक और रेजोंकी गोलावृष्टिसे विद्रोहियोंको फतेपुरसे भागना पड़ा।। अनाजका विस्तृत कारवार है। १५वीं जुलाईको हेवलकने औङ्गकी और अग्रसर हो कर फतेपुर-१ अयोध्याके बारबांकी जिलेकी एक तहसील । यह विद्रोहियोको पाण्डुनदीके उस पार मार भगाया। इस अक्षा० २६ १५८ से २७ २१ उ० और देशा० ८० ५६ से नदीके किनारे दूसरी बार दोनों पक्षमें लड़ाई छिड़ी। पके मध्य अवस्थित है। क्षेत्रफल ५२१ वर्ग- पीछे सिपाही-दल कानपुरको भाग गये, लेकिन तो भी . मील और जनसंख्या प्रायः ३३५४०७ है। इसमें २ शहर अगरेजराज इस स्थानको अपने दखलमें न कर सके। और ६७३ ग्राम लगते हैं। फतेपुर, कुसी, महम्मदपुर, जब तक लखनऊ नगरका पतन नहीं हुआ और लाड, बिटोली. रामनगर और बादोसराय आदि परगने इसके क्लाइवकी सेनाने ग्वालियरके विद्रोही सेनादलको मार अन्तर्गत हैं। न भगाया, तब तक सभी लोग अगरेज शासनकी उपेक्षा . २ उक्त तहसीलका एक परगना । भूमिपरिमाण करते रहे थे। इस जिले में ५ शहर और १४०३ ग्राम लगते हैं। जन- १५४ वर्गमोल है। यह प्रसिद्ध खानजादाव'शका आदि संख्या सात लाखके करीब है। गङ्गातीरवती शिवराज- वासस्थान है। लखनऊके ख्यातनामा सेखजादागण पुरका तीर्थक्षेत्र हिन्दूका एक पवित्र स्थान है। शस्यके फतेपुरके सेखजादा वंशसम्भूत है। ३ उक्त बारबाँकी जिलेका प्रधान नगर। यह अक्षा० अलावा यहां तमाकू और पीतलके बरतन तथा सोडेका २७१० उ० देशा० ८१.१४ पू०के मध्य अवस्थित है। विस्तृत कारवार है। शिवराजपुरमें कार्तिकमासमें एक जनसंख्या लगभग ८१८० है । मुगलसाम्राज्यकी उन्नति- मेला लगता है। इस समय नाना स्थानोंके पण्यद्रव्यके अलाषा मवेशी, छागल, भेड़े, घोड़े आदि भी बिकने के साथ साथ इस नगरकी श्रीवृद्धि हुई थी। आज भो आते हैं। यहां १८३७ और १८६८ ईमें घोर अकाल उन सब मुसलमान-निर्मित अट्टालिकादिका ध्वंसावशेष पड़ा था। । देखने में आता है । मसिरउहीन हैदरके कर्मचारी मौलवी Vol. xv. 13