पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५७४

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पौध-व्यवहारो बारियोंको प्रच्छन्न तथा जीवन्त बौद्ध माननेमें कोई : किसीके भी साथ विवाद होनेकी सम्भावना नहीं. यहो मापत्ति न रहो। । बौध्यके उपदेशका स्तूल- तात्पर्य है। बौध (सं० पु०) बुधस्यापत्यं पुमान् बुध-अण। बुधके (भारत-शान्तिप० १७५ म.) पुत्र, पुरूरबस । बोधो देशभेदोऽभिजनोऽस्य शान्तिकादित्वात् ध्या बोधभारती- संख्यवाचस्पति व्याख्याके प्रणेता। (त्रि०) २ पिनादिक्रमसे उस देशके अधिवासो। बौधायन ( सं० पु० ) १ आङ्गिरस भिन्न बोधऋषिकी बौना ( हिं० पु०) बहुत छोटे डोलका मनुष्य, अत्यंत ठिंगना या नाटा मनुष्य । सन्तति । २एक ऋषि । इन्होंने श्रौतसूत्र, गृद्यमत्र और बौभुक्ष ( स० त्रि.) १ दरिद्र । २ अनाहारावसम्म धर्मसूत्रकी रचना की। दर्शन व्यक्ति । ३ कृश। ४ क्षु धित। बोधि (सं० पु० ) बोध घञ् । आङ्गिग्म भिन्न बोधका बीर हि० पु० ) आमको मंजरी, मौर। गोलापत्य । । बौरई ( हिं० स्त्रो० ) पागलपन, सनक । बौध्य (सं० पु०) बोध घन । आङ्गिरस गोत्रापत्य। बौरना ( हिं० कि०) आमके पेड़में मंजरो निकलना, महाभारत-शान्तिपर्वमें बौध्यगीता अर्थात् वौध्यका जो आमका फूलना। उपदेश है, उसका स्थूल तात्पर्य इस प्रकार है : एक बौरहा ( हि वि० ) विक्षिप्त, पागल। दिन ययातिने बौध्यसे पूछा था, 'आपने किसके उपदेशसे बौरा ( हिं० वि० ) १ विक्षिप्त, पागल । २ गूगा।। शान्तिलाभ किया है ?' बौधने उत्तर दिया, 'मैंने पिंगला: अज्ञान, भोला । वेश्या, कौश, सर्प, भमर, शरनिर्माता और कमारी इन बौराना ( हि० क्रि०) १ विक्षिप्त हो जाना, समक जाना। छः जनोंके उपदेशसे शान्ति पाई है। आशा सबसे २ उन्मत्त हो जाना, विवेक या बुद्धिसे रहित हो जाना। बलवती है। आशाका विनाश कर सकनेसे ही परम बौरी ( हि स्त्रो०) बावली स्त्री। बौरा देखो। सुख प्राप्त होता है। पिंगलो आशाका परित्याग कर ! बौलडा (हिं० पु.) एक प्रकारका गहना जो सिर पर सुखसे सोई थी। निरामिष व्यक्तियोंने क्रौञ्चको आमिष पहना जाता है। इसका आकार सिकड़ी-सा होता है। ग्रहण करते देख उसे मार डाला था, यह देख कर किमो व्यंग ( हिं० पु० ) अन्तस्थ 'व' में देखो। एक क्रौञ्चने आमिषका परित्याग कर परमसुख प्राप्त : व्यंजन (हिं० पु०) व्यञ्जन देखा । किया था । स्वयं घर बना कर रहना सुखका हेतु नहीं है। व्यक्ति ( सं० पु० ) व्यक्ति देखो । सांप दूसरेके बनाये हुए घरमें सुखसे सोता है। तपस्वि-: ब्यजन (सं० पु. ) व्यजन देखा । गण भिक्षावृत्तिका अवलम्बन कर भृङ्गकी तरह पर्यटन व्यथा ( सं० स्त्रो० ) व्यथा देखा। करते हुए आनन्दपूर्वक जीविका-निर्वाह करते हैं। एक व्यथित ( हि० वि० ) व्यथित देखा। शर बनानेवाला शर बनाने में ऐसा मशगूल था. कि उस व्यलीक (सं० वि० ) व्यलीक देखो। के सामने राजाके खड़े होने पर भी वह बिलकुल अन- | व्यवसाय ( सं० पु० ) व्यवसाय देखो। 'जान रहा, किसी प्रकार उनका स्वागत न कर सका। व्यवस्था (सं० स्त्री० ) व्यवस्था देखो। एक दिन एक कमारो प्रच्छन्नभावले कुछ अतिथियोंको व्यवहारिया (हिं० पु० ) व्यवहार या लेनदेन करनेकी भोजन करानेको कामनासे ऊखलमें धान कूट रही थी। महाजन । चोट देनेसे उसके हाथमेंको चूड़ियां झन झन शब्द करने व्यवहार (हि • पु० ) १ रुपयेका लेन देन। २ कपाल लगीं। उसने समझा, कि बहुतोंके एक जगह रहनेसे ही लेन देनका संबंध । ३ इष्टमित्रका सम्बन्ध । ४ारि कलह पैदा होता है सो उसने सब चूड़ियाँ फोड़ डाली देखो। केवल एक रहने दी। अतएव अकेला विवरण करनेसे म्यवहारी (हि. पु. ) १ कार्यकर्ता, मामला करनेवाला।