पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५९

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फथअली हुसेनी-फनकार ४ युक्तप्रदेशके आगरा जिलेकी तहसील । यह अक्षा० बाद भेज दिये गये। जो कुछ हो, कुछ समय बाद उन्हें २६५६ से २७८ उ० और देशा० ७७५५ से ७८ मुक्ति मिली और निभेग्नी ( निजाम शाहकी माता )-के २६ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण २४१ वर्गमील आदेशसे सेनाध्यक्ष नियुक्त किये गये। परन्तु पीछे वे और जनसंख्या लाखसे ऊपर है। इसमें १ शहर और फिरसे पदच्युत न हो, इस भयसे उन्होंने सुलतानको १६१ प्राम लगते हैं। उन्मादग्रस्त बतला कर कैद कर रखा और उनके सहचर फथअली हुसेनी -एक मुसलमान जीवनी-लेखक । इन्होंने उमराव आदिको यमपुर भेज दिया। इस हत्याकाण्डके 'ताजकिरात्-उस-सुआरे हिन्दी' नामक ग्रन्थमें १०८ हिन्दी विषयमें इन्होंने सम्राट शाहजहानको सूचित किया कि, और दक्षिणदेशवासी कवियोंकी आख्यायिका लिखी है 'उमराव दल दिल्लीसिंहामनकी अधीनता उच्छेद करनेको और उनकी रचना भी उद्धत की है। कोशिश कर रहे थे, इस कारण मैंने उन्हें यमपुर भेज कर फथअली शाह-पारस्यके अधिपति। ये कछार जातिके सम्राट की गौरवरक्षा की है।' अफगान थे, १७६७ ई में मामाके सिंहामनके अधिकारी सम्राट फथखाँकी सहानुभूति पर बड़े प्रसन्न हुए हुए । अफगानशत् जमानशाहका दमन करने और और सुलतानकी भी हत्या करनेको उन्होंने हुक्म दे बोनापार्टीका भारतप्रवेश रोकनेके लिये कलकत्तसे दिया। वस! फिर क्या था, फखखाँको यह चाहते ही लाउँ वेल्सलीने सर जान मैकमको दूत बना कर उक्त थे, उन्होंने १६२७ ई०में बन्दीराजको मार कर उनके पारस्य राजसभामें भेज दिया। लड़के हुसेनको राजा बनाया। १६३४ ई०में फथ खाँ फथउल्ला इमादशाह----बरारके शासनकर्त्ता । पहले पे आत्मसमर्पण करनेको वाध्य हुए और हुसेन निजामशाह दाक्षिणात्यके बाहमनी राज्यके सुलतान २य महमूदशाह- ग्वालियर के दुर्गमें कैद रखे गये। पीछे फथखां सम्राट का के अधीन काम करते थे। १४८४ ई०में इन्होंने दिल्लोका अनुप्रह लाभ कर लाहोर चले गये और वहीं जीवनके अधीनता-पाश तोड़ डाला और अपनेको स्वाधीन बतला : शेष पर्यन्त उन्हें २० लाख रुपया मासिक मिलता रहा। कर तमाम घोषणा कर दी। १५१३ ई में उनको मृत्यु फथशाह -बङ्गालके शासनकर्ता। १४८२ ई०में युसुफ- हुई। शाहकी मृत्युके बाद वे सिंहासन पर बैठे। १४६१ ई में फथ्-उल्ला सिराज़ी-सिराज़बासी एक पण्डित । ये दाक्षि- खोजा सुलतान साहजादाके हाथ उनकी मृत्यु हुई। णात्यमें वीजापुरके राजा सुलतान अली आदिलशाहकी फदकना (हिं कि० ) १ फद फद शब्द करना, खवदवद राजसभामें काम करते थे। आदिलकी मृत्युके बाद वे करना। २ फुदकना देखो। दाक्षिणात्यका परित्याग कर १५८२ ई में दिल्ली पहुंचे। फदका ( हिं० पु०) गुड़का वह पाग जो अधिक गाढ़ा न सम्राट अकबरशाहने उन्हें अपने साथ रखा और हो गया हो। उच्च पद देकर सम्मानित किया । १५८६ ई में काश्मीरकी फदिया ( हिं० स्त्री० ) फरिया देखो। राजधानी श्रीन रमें उनकी मृत्यु हुई। इस समय भी फन ( हिं० पु० ) १ सांपका उस समयका सिर जब कि सम्राट अकबरशाह उनके साथ थे। वह अपनी गर्दनके दोनों ओरकी नलियोंमें वायु भर कर फथखों । फतेखा )-अहमदनगरके आविसिनिया देशीय उसे फैला कर छत्रके आकारका बना लेता है। २ वाल। सेनापति मालिक अम्बरके पुत्र। १६२६ ई में पिताको ३ भटवांस । ४ फ न देखो। मृत्युके बाद वे दाक्षिणात्यके निजामशाही राज्यके सर्वे- फन (फा० पु० ) १ गुण, खूबी। २ विद्या। ३ दस्त- सर्वा हो गये। इस प्रकार असन्तुष्ट हो मुर्ताजा निजाम- कारी। ४ छलनेका ढंग, मकर । शाहने उन्हें बड़ी चातुरीसे खैवर दुर्गमें आवद्ध रखा। वहां- फनकना (हिं० कि० ) हवामें सन सन करते हुए हिलना, से किसी प्रकार भाग कर उन्होंने फिरसे राजाके विरुद्ध | डोलना या चलना, फनफनाना । अखधारण किया। इस बार भी बन्दीभावमें वे दौलता- फनकार ( हिं० स्त्री० ) फनफन होनेका शब्द, वैसा शब्द Vol. xv. 14