पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६०

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फनगना-फरकी जैसा सांपक फूकने या बैल आदिके सांस लेनेसे होता फफोर (हि० पु० ) एक प्रकारका जगली प्याज। यह हिमालयने छः हजार फुटको ऊँचाई तक होता है और फनगना (हिं० क्रि०) नये नये अंकुरोंका निकलना, कल्ला प्रायः प्याजकी जगह काममें आता है। फूटना। फफोला (हिं पु० ) आगमें जलनेसे चमड़े परका पोला फनगा (हिं० पु० ) १ नई और कोमल डाली, कल्ला। २ उभार जिसके भीतर पानी भरा रहता है, छाला। वांस आदिको तोलो। २ फतिंगा। फबकना ( हि ० कि० ) १ मोटा होना। २ फफदना देखो। फनमा (हिं० कि० ) कामका आरम्भ होना, काममें हाथ फबती ( हि स्त्री०) १ देशकालानुसार सूक्ति, यह बात लगाया जाना। जो समयके अनुकूल हो । २ हंसीकी बात जो किसी पर फनफनाना ( हिं० क्रि० ) १ हवा छोड़ कर वा चोर कर घटती हो, चुटकी। फनफन शब्द उत्पन्न करना। २ चंचलताके कारण फबन ( हिं॰ स्त्री० ) शोभा, छवि । हिलना या इधर उधर करना। फवना ( हि क्रि० ) उचित स्थान पर रखना, ऐसी जगह फनस (हिं पु० ) कटहल । लगाना या रखना जहां अच्छा जान पड़े। फनिधर ( हि पु० ) सर्प, सांप । फबीला (हिं० वि० ) जो फबता या भला जान पड़ता फनिपति (हिं पु० ) फणिपति देव । हो, शोभा देनेवाला। फनियाला ( हि पु०) १ गज डेढ़ गज लबी करघेको एक फम्फण ( स० पु० ) सन्निपात । लकड़ी जिस पर तानी लपेटी जाती है। इसके दोनों फर ( स० क्ली० ) फलतीति फल-अच, लस्य र । फलक । सिरों पर दो चूलें और चार छेद होते हैं । २ नाग, सांप। फरक ( हि स्त्री० ) १ फरकनेका भाव । २ फरकनेकी फनिराज ( हिं० पु. ) फणीन्द्र। किया। ३ फुरतीसे उछलने कूदनेकी चेष्टा । फनी ( हिं० स्त्री ) १ लकड़ी आदिका वह टुकड़ा जो फरक ( अं० पु० ) १ पार्थक्य, अलगाव । २ दो वस्तुओं- किसी ढीली चीजकी जड़ में उसे कसने या दृढ़ करनेके के बीचका अन्तर, दूरी। ३ कमो, कसर । ४ अन्यता, लिये ठोंका जाता है, पञ्चर । २ जुलाहोंका एक औजार परायापन । ५ भेद, अन्तर । जो कंघीकी तरहका होता है और बांसको तीलियोंका फरकन (हि पु० ) १ फड़कनेका भाव। २ फरकनेकी बना होता है। इससे दवा कर बुना हुआ बाना ठीक क्रिया । किया जाता है। फरकना ( हि क्रि० ) १ फड़कना, उड़ना । २ स्फुरित फफदना ( हिं० क्रि० ) १ किसी गीले पदार्थका बढ़ कर होना, उभड़ना । ३ उड़ना। फैलना। २फैलना, बढ़ना । फरका ( हि पु० ) १ छप्पर जो अलग छा कर वडेर पर फफसा ( हि पु० ) १ फुसफुस; फेफड़ा। । वि०)२ चढ़ाया जाता है। २ टट्टर जो द्वार पर लगाया जाता फूला हुआ पर भीतरमें खालो, पोला। ३ स्वादहीन, है। ३ बडेरके एक ओरकी छाजन, पल्ला । फीका। फरकाना ( हि क्रि० ) १ संचालित करना, हिलाना । २ फफूदी (हिं स्त्री० ) काईकी तरहकी पर सफेद तह जो फड़फड़ाना, बार बार हिलाना। ३ विलग करना, अलग बरसातके दिनोंमें फल, लकड़ी आदि पर लग जाती है, करना। भुकड़ी। यह यथार्थ में खुमी या कुकुरमुत्ते की जातिके फरला ( हि पु० ) गाड़ीका वह खटा जो हरसे के बाहर बहुत सूक्ष्म उद्भिद हैं। यह खास कर जन्तुओं या पेड़ पटरीमें लगाया जाता है। इस पर लकड़ी, बांस या पौधों, मृत या जीवित शरीर पर ही पल सकते हैं और बले रख कर रस्सियोंसे कस कर ढाँचा बनाया जाता उद्भिदोंके समान मट्टी आदि द्रव्योंको शरीरद्रध्यमे परि- है। णत करनेकी शक्ति इनमें नहीं होती। फरको (हिंस्त्री०) १ बांसकी पतली तीली। इसमें