पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६३

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फराजो-फरासी टीकाकार अबहनीफका मतानुसरण करके वे लोग जगत्-: १८६२ ई०में ढाका नगरमें उनकी मृत्यु हुई। उनके दो क्रिया और ईश्वरतत्त्व सम्बन्धमें विशेष भक्ति प्रदर्शन पुत्र आज भी फगजीदलकी धर्मनायकता करते हैं। अभी करते हैं। सुन्नो सम्प्रदायके अन्तर्भुक्त होने पर भी वे उनमें वैसा धर्मोन्माद नहीं है। वे अभी राजभक्त, निरोह पूर्वप्रचलित अशास्त्रीय कुलाचारको नहीं मानते । उन , और शान्तस्वभावके हो गये हैं। लोगोंका कहना है, कि कुरान शास्त्र ही मोक्षसाधनका , मुसलमान जातिकी धर्मोन्नति, धर्ममें उत्साह और प्रधान अवलम्बन है । प्रस्तावित नीति पालनके विषय में उनका विशेष लक्ष्य है। __ फरीदपुर शब्दमें लिखा है, कि गङ्गा ( पद्मा ) और वे अपने धर्म में इतने कट्टर हैं, कि जब कभी कोई उनके ब्रह्मपुत्र नदीके मध्यवत्ती जो डेल्टा अवस्थित है, वहांके धर्मको निन्दा करता, तभी वे उस पर टूट पड़ते हैं। प्रायः सभी मुसलमान उस देशके आदिम अधिवासी हैं। फरामोश ( फा० वि० ) १ विस्मृत, भूला हुआ, चित्तसे अफगान और मुगलोंके आक्रमणके समय डरके मारे गिरा हुआ । ( पु० ) २ लड़कोंका एक खेल। इसमें वे उन्होंने इसलाम धर्म ग्रहण करने पर भी उनके हृदयसे! आपसमें कुछ समयके लिये यह बद लेते हैं, कि यदि एक अभ्यस्त हिन्दुभाव और आचार व्यवहार दृर नहीं हुआ, दूसरेको कोई चीज दे, तो वह फौरन 'फरामोश' कह दे । ज्योंके त्यों बना रहा । हाजी सरितुल्ला मुसलमान समाजको यदि चीज पाने पर पानेवाला 'फरामोश' न कहे, तो वह अवनति देख कर बड़े दुःखित हुए। उन्होंने इस विषयमें हार जाता। असम्मति प्रकट कर जनमाधारणको देवपूजाके बदलेमें फरागिरि आसामप्रदेशके गारो पहाड़के दक्षिण-पूर्व में कुरान-णित एकेश्वरोपासना और सरल तथा साधु अवस्थित एक ग्राम । यह समुद्रपृष्ठसे ३९५२ फुट आचारोंका अनुष्ठान करने के लिये अनुयोग किया। उन्हों- ऊँचा है। ने विवाहमें जो फजुल खर्च होता था उसे बंद कर दिया फरार ( अ० वि० ) जो भाग गया हो, भाग हुआ। और सवको सुन्नत करनेके लिये फरमाया । उनके आच- फराल ( हि स्त्री० ) १ फैलाव, विस्तृत । २ तख्ता। रित धर्ममतके कुछ प्रधान नियम ये हैं । धर्मयुद्ध फरासडङ्गा इसका देशीय नाम चन्द्रनगर वा चन्दर ( जिहाद )-की कर्तध्यता, २ विश्वासहन्ता, पापण्ड और | नगर है। जवमे फरासीमियोंने यहां एक कोठी खोली, नास्तिकोंका पाप, ३ ईश्वरपूजामें क्रियाकलापादिका तभीसे यह फरामडङ्गा नामसे मशहूर हुआ है। अनुष्ठान और ४ सबोंको उस एक ईश्वरका अंशदान । चन्दननगर और फरासीस देखो। फराजो लोग काछ नहीं देते, धोतीको कमरमें एक बार फरासी फ्रान्सदेशके अधिवासी। लपेट कर पेटके सामने मोंस लेते हैं, घुटनेको जमीनमें फ्रान्स और खटान शब्दमें विस्त त विवरण देखो। टेक कर नमाज पढ़ते हैं, इत्यादि कुछ बाहरी आचार १६वीं शताब्दी में जो सब यूरोपीय शक्तियां वाणिज्य देनेसे हो पता लग जाता है, कि ये फराजी है। प्रव करनेकी इच्छासे भारतवर्ष आई थीं, उनमेंसे फरासीगण तक जब तक जीते रहे, तब तक इस मतका बहुत प्रचार चतुर्थ थे। पुत्तगीज, ओलन्दाज और अगरेजोंके बाद था। प्रायः पचास वषके अन्दर सैकड़ों मुसलमान उन फरासी लोग भारतवर्ष आये हैं। के शिष्य हो गये। अभी पश्चिम बङ्ग और बिहार आदि १५०३ ई०में फ्रान्सपति १२वें लुईके समय रौपन् स्थानोंमें भी फराजी मतावलम्बी सैकड़ों मुसलमान नामक स्थानके वणिकोंने पूर्घसागरमें वाणिज्य करनेका देखनेमें आते हैं। पहले पहल आयोजन किया । १५३७ और १५४३ ई० में हाजोकी मृत्युके बाद उनके बड़े लड़के दादूमियां १२वें लुईके उत्तराधिकारी १म फ्रान्सिस्ने अपनी प्रजाको फराजीदलके धर्मगुरु बने, किन्तु स्वभावदोपसे वे मुसल- सुदृरदेशमें जा कर वाणिज्य करनेका हुक्म दिया। किन्तु मान समाजके अप्रियभाजन हो गई। उनकी इस असत् नाना विप्लवोंसे पुनका उद्देश्य सिद्ध न हो सका। प्रकृतिके लिये वृटिश-सरकारने उन्हें कई बार कैद किया। १६०१ ई०में सेण्टमालोसे दो जहाज लपटेनाएट वाद- Vol. xv. 15