पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६५५

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भजना-भड़ौमा भजना (हिं० कि०) १ विभक्त होना, टुकड़े टुकड़े होना।। दाने निकलते हैं। इन दानोंको पेरनेसे तेल निकलता २ किसी बड़े सिक्के या छोटे छोटे सिक्कोंसे बदला है। इस तेलको लोग जलाते और दयाके काममें लाते जाना, भुनना। ३ बरा जाना । जैसे-रस्सी वा हैं। इसके पौधेसे पीले रंगका दूध निकलता है जो .तागेका भजना। ४ मोड़ा जाना, भांजा जाना। घाव और चोट पर लगाया जाता है। इसकी जड़ भी भजनी (हिं० स्त्री०) करघेका एक अंग। यह तानेको फोड़े फुसियों पर पीस कर लगाई जाती है। इसके विस्तृत रखनेके लिये उसके किनारे पर लगाया जाता | । नरम उठलकी गूदीकी तरकारी भी बनाई जाती है। है। इसे बांसकी तीन चिकनी सीधी और दृढ़ लक- भंडरिया (हिं० पु०) एक जातिका नाम । इस जातिके डियोंसे बनाते हैं। वे लकड़ियां पास पास समाना लोग फलित ज्योतिष या सामुद्रिक आदिकी सहायतासे न्तर पर रहती हैं। इन्हीं तीनों लकड़ियोंके बीचकी लोगोंको भविष्य बता कर अपना निर्वाह करते हैं। ये सन्धियोंमेंसे ऊपर नीचे हो कर ताना लगाया जाता है। लोग शनैश्चरादि ग्रहोंका दान भी लेते है। कहीं कहीं यह बुननेवालेके सामने किनारे पर रहता है। इस जातिके लोग तीर्थों में यात्रियोंको स्नान और दर्शन भंजाना (हिं० क्रि०) १ भागों वा अंशोंमें परिणत कराना, आदि भी कराते हैं। इस जातिके लोग ब्राह्मणोंमें विल. तुड़वाना। २ बड़ा सिक्का आदि दे कर उतने ही मूल्य कुल अंतिम श्रेणीके समझे जाते हैं। २ पाखण्डो, ढोंगी। के छोटे सिक्के देना, भुनाना। ३ दूसरेको भोके : ३ धूर्त, मक्कार । (स्त्री० ) ४ दीवारों अथवा उनकी लिये प्रेरणा करना वा नियुक्त करना। जैसे--रस्सी संधियोंमें बना हुआ वह ताग्व या छोटी कोठी जिसके भंजाना, कागज भंजाना। आगे छोटे छोटे दरवाजे लगे रहते हैं और जिनमें छोटी भंझा ( हिं० पु०) वह लकड़ी जो कूए के किनारेके खंभे चीजें रखी जाती हैं। वा प्रोटेके ऊपर आडी रखी जाती है और जिस पर भंडसार (हिं० स्त्री०) वह गोदाम जहां सस्ता अन्न खरीद गडारी लगा कर धुरे टिकाए जाते हैं। कर महगीमें बेचनेके लिए इकट्ठा किया जाता है। भंटकटैया ( हिं० पु० ) भटकटैया देखो । भंडा (हि पु०) १पान, भांड़ा। २ भंडारा। ३ रहस्य, भंटा ( हिं० पु० ) बैंगन । भेद। ४ वह लकड़ी या बल्ला जिसका सहारा लगा कर भडताल ( हिं० पु.) एक प्रकारका गाना और नाच। मोटे और भारी बल्लोंको उठाते या खसकाने हैं। इसमें गानेवाला गाता है और शेष समाजी उसके पीछे : भंडाना ( हि क्रि० ) १ उपद्रव करना, उछल कृद करना। तालियां पीटते हैं। २ नष्ट करना, तोड़ना फोड़ना। भंडना (हिं० क्रि० ) १ हानि पहुंचाना, विगाड़ना । २ भंग भंडार ( हिं० पु० ) १ कोष, खजाना। २ अन्नादि रखने- करना, तोड़ना। ३ नष्ट भ्रष्ट करना, गड़बड़ करना। का स्थान, कोठार। ३पाकशाला, भंडारा। ४ उदर, अपकीत्त फैलाना, बदनाम करना । पेट। ५ अग्निकोण । ६ भंडारा देखा। भंडफोड़ (हिं० पु०)१ मट्टीके बरतनोंको गिराना या भंडारा (हिं० पु०) १ भंडार देखो । २ समूह, अछ। ३ तोड़ना फोड़ना। २ मट्टीके बरतनोंका टूटना फूटना। साधुओंका भोज । ४ उदर, पेट। ३ भेद खोलनका भाव, रहस्योद्घाटन। भंडारी (हिं० स्त्री०) १ छोटी कोठरी। २ कोश, खजाना। भडभाड (हि० पु.) एक कटीला क्षुप। इसकी पत्तियां (पु०) ३ कोषाध्यक्ष, खजानची। ४ रसोइया, रसोई- नुकीली, लम्बी और कटोली होती हैं। जाड़े के दिनों में दार। यह उगता है। इसका फूल पोस्तके फूलके आकारका भेंडेरिया ( हिं० पु.) भँडरिया देखो। पीले या बसंती रंगका होता है। जब फूल झड़ जाते हैं भंड़ेरियापन (हिं० पु०) १ मक्कारी, ढोंग । २ चालाको । तब पोस्तकी तरह लम्बो और कांटोंसे युक्त ढेंदी लगती भंडौआ (हिं० पु० ) १ भौड़ाके गानेका गीत । २ हास्य हैं जिसमें पकने पर काले रङ्गके पोस्त-से और कुछ बड़े आदि रसोंकी साधारण अथवा निम्नकोटिको कविता। Vol. xv. 163,