पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६८३

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भगत-भगनहा ६७७ ग्रहोंके अपने अपने भगण द्वारा गुणा करके उस कुदिन भतिया ( हिं० पु० ) राजपूतानेकी एक जातिका अर्थात् चतुयुग परिमित दिन १५७७९१७८२८ अङ्क द्वारा नाम। इस जातिके लोग वैष्णव साधुओंकी संतान भाग देनेसे जो भागफल होगा, वही भगण है । पीछे हैं जो अब गाने बजानेका काम करते हैं । इस जाति- ऊपर बताये गये नियमसे राज्यादि निकाल कर भगणको की कन्याएँ वेश्या वृत्ति करके अपने कुटुम्बका भरण- अलग कर दो और राश्यादिको पूर्वाङमें जोड़नेसे विषुव- पोषण करती हैं और भगतिन कहलाती है। दिनके जितने दण्डादिमें सूर्य मेषराशिमें गये हैं, उस भगदत्त (सं० पु०) भगमैश्वयं दत्त-मस्मै इति । १ नरक- दिनके भी उतने दण्डादिका मध्य होगा । राजके ज्येष्ठ पुत्र । ये प्रागज्योतिषपुरके राजा थे। भगवान् श्रीकृष्णने नरकको मार कर इन्हें राजा बनाया प्रहस्कुट और ग्रहणादि गणनामें भगण स्थिर करके , था। राजसूययज्ञके समय अर्जुनके साथ इनका आठ गणना करनी होती है। (ग्रहार्णव ) खगोल देखो। दिन युद्ध हुआ था। पीछे इन्होंने युधिष्ठिरकी वश्यता २ छन्दःशास्त्रानुसार एक गण । इसमें आदिका एक वर्ण गुरु और अन्तके दो वर्ण लघु होते हैं। स्वीकार को थी । इन्द्रके साथ इनका अच्छा सद्भाव भगत (हिं० वि० ) १ संवक, उपासक । २ साधु । ३ जो : था । महाभारत-युद्ध में ये कौरवोंकी ओर थे । मांस आदि न खाता हो. सकटका उलटा । ४ विचार- युद्धस्थलमें इन्होंने विराट, भीम, अभिमन्यु, घटोत्कच और अर्जुन आदिके साथ लड़ कर वीरताको परा- वान् । (पु०) ५ वैष्णव या वह माधु जो तिलक लगाता और मांस आदि न खाता हो। ६ भूत प्रेत उतारने- काष्ठा दिखलाई थी । द्रोणने जब कुरुसैन्यका सेना. पति होना मंजूर किया, तब एक दिन भीमके साथ वाला पुरुष, ओझा। ७ वेश्याके साथ तवला आदि इनका युद्ध आरम्भ हुआ । उस दिन कुछ समय बजानेका काम करनेवाला पुरुष, सफर-दाई। ८ राज. तक युद्ध करनेके बाद भीमने अञ्जिलकाविद्याप्रभावसे पूतानेकी एक जातिका नाम । इस जातिको कन्याएं वेश्यावृत्ति और नाचने गानेका काम करती है। विशेष अपने गज शरीरमें लीन हो गजको यन्त्रणा देना शुरू विवरण भगतिया शब्दमें देखो। किया । इधर पाण्डव सेनाने, भोम मारे गये हैं होलीका वह ऐमा जान कर भगदत्तके साथ युद्ध ठान दिया । स्वांग जो भगतका किया जाता है। स्वांगमें एक . आदमो सफेद बालोंको दाढ़ी मोछ लगाता और ; - पीछे युद्धिष्टिर, सात्यकि, अभिमन्यु आदिके साथ भी सिर पर तिलक, गलेमें तुलसी वा किसी और काठ- । इनका तुमुलसंग्राम हुआ। युद्धमें सैकड़ों सेना निहत को माला पहनता है। सारे शरीरमें वह राख लगा कर ! हो रही हैं, यह देख कर महावीर अर्जुनने युद्ध में प्रवेश किया। उस समय दुर्योधन और कर्ण दोनों ओरसे अर्जुन हाथमें एक तुबी और सोंटा ले लेता है। इस प्रकार । पर टूट पड़े । अजु नने थोड़े ही समयके अन्दर अपनेको सजा कर वह स्वांगी जोगीड़े में नाचनेवाले ५ .उन्हें परास्त कर भगदत्त पर आक्रमण किया । भग- लौंडेके साथ मिल जाता है और बीच बीचमें नाचता भौर भीड़ोंकी तरह मसखरापन करता जाता है। दत्त ने अजुन पर जब वैष्णवास्त्र फेंका, तब श्रीकृष्ण- ने उसे अपने वक्षमें धारण कर लिया । पीछे

  • "युगे र र्यज्ञशुक्राणां खचतुष्करदार्गावाः ।

बड़ी वीरताके साथ लड़ कर पे अर्जुनके हाथसे मारे कुजार्विगुरुशीघ्राणाः भगणां पूर्वयायिनाम् ॥ गये । ( कालिकापु० ३६ अ०, भारत सभा और द्रोणप.) २एक राजा । येगीड़, औड, कलिङ्ग और कोशल इन्द्रो रसामित्रित्रीषु सप्तभुधरमार्गणाः । राज्यके अधिपति थे । चन्द्रकेन्द्रऽद्रिरामैक वायांगाश्विनगेषवः ॥ • भगदर (हिं. स्त्रो०) अचानक बहुत से लोगोंका किसी कुजस्य दन्तनागत्तु नन्दलोचनदस्रकाः । कारणसे एक ओर न्यस्त व्यस्त हो कर भागना । बुध शीघऽङ्गसप्ताभ्रशैलामिनन्दमैत्रकाः ॥” इत्यादि। ) करेरुमा नामक कंटोलीबेली ( ग्रहाव ६, ७, ८) करेकआ देखो। Vol. xv, 170 - A - -. . NA - . AtIHET