पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६९८

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राजाले उत्तर दिया, 'स्त्रीरूप ही मुझे पसन्द आता है। सिंहको गुरुकी तरह मानते थे। इस दलके सभी भङ्ग इसलिये मैं फिर पुरुष होना नहीं चाहता।' इसका पीनेमें मस्त रहते हैं। इसलिए इस सम्प्रदायके सिख- कारण पूछने पर राजाने जवाब दिया, 'देवराज ! संसर्ग- गण भङ्गी नामसे प्रसिद्ध हुए। कालमें खो-पुरुपके मध्य स्त्रीको ही विशेष आनन्दलाभ ___इस प्रकारसे नाना स्थानोंके सिन-सम्प्रदायिकोंके होता है, इस कारण मैं स्त्रीभावमें ही रहना चाहता हूं। द्वारा पुष्ट हो कर भङ्गी-सरदारने रात्रिके समय दस्यु- सच कहता है, जबसे मैंने स्त्रोत्वलाभ किया है, तबसे मैं वृत्ति करना प्रारम्भ कर दो। लूट-खसोटमें कृतकार्य बड़ा ही आनन्द लास करता आया हूं, इसीसे इस रूपके होने पर एक दिन उनके हृदयमें गुरुगोविन्दके भविष्यत् परित्याग करनेकी मेरी बिलकुल इच्छा नहीं है।' तभीसे वाक्यका स्मरण हो आया। धीरे धीरे उनके हृदयमें राज्ञा स्त्रीरूपमें ही रहने लगे। (भारत अनुशा० १२ अ०) राज्य करनेकी इच्छा हुई और इसके लिए वे अपना बल भङ्गि ( स स्त्री ) भज्यते इति भन्ज-इन-न्यवाादत्वात् बढ़ाने लगे। इसी बीचमें छजासिंहकी मृत्यु हो गई कुत्वं । १ विच्छेद । २ कुटिलता, टेढ़ाई। ३ विन्यास, और भोमसिंहने उस दलका नेतृत्व ग्रहण किया। उन्हींकी अंदाज़ । ४ कल्लोल, लहर । ५ भङ्ग । ६ व्याज। ७ प्रति अधिनायकतामें भंगी सम्प्रदायको सुङलता और कृति । ८ अवयवादिके सङ्गवत् विकृतभावके अनुकरण बलाधिक्य सस्पादित हुआ। नादिरशाहके भारत-आक्रमण रूप कार्य। के बाद, भोमसिंह अपने सहकारी मल्लसिंद्ध और जयत्- भङ्गिन (स० निर) सङ्ग-अस्त्यर्थे इति । सङ्गप्रवण, भङ्ग सिंहको ले. कर इस बलशाली सिखसम्प्रदायको स्थापना शील, नए होनेवाला। कर गये। भङ्गिभाव (स९ पु. ) वक्रभाव । भीमसिहकी मृत्युके बाद उनके दत्तक पुत्र हरिसिंह भङ्गिमत् ( स० त्रि०) भङ्गिः विद्यतेऽस्य मतम् । भङ्गि इस मिसलके सरदार चुने गये। इस निभीक और युक्त। साहसी-नेताके नीचे रद्द कर भङ्गीगणोंने लूट पाट कर भङ्गिमन् ( स९ पु०) भङ्ग-बाहुलकात् स्वार्थे इमनिन् । बहुत अर्थोपार्जन किया। इन्होंने करीब २० हजार १ भङ्गि, शाभा । (त्रि०) २ तरङ्गयुक्त । अनुचर ले कर सियालकोट, कड़ियाल और मोरोवाल भङ्गो ( स० स्त्री० ) भङ्गि कृदिकारादिति पक्षे ङीप । १ नामके स्थान अधिकार किये । गिलवाली ग्राममें इन्होंने भङ्गि । (पु०) २ भङ्गशील, नष्ट होनेवाला । ३ भङ्ग करने अपना प्रधान अडा कायम किया। चिनिभोत और वाला, भंगकारी। ४. रेखाओंके झुकावसे खोंचा हुआ। भंग लूटनेके बाद इन्होंने आबदाली-राज अह्मदशाइके चित्र वा बेलबूटा आदि । विरुद्ध युद्ध किया। १७६२ ई०में कोट ख्वाजा सैद भटो-(सिसल ) सिखाँका एक सम्प्रदाय । पाचवार आक्रमण करके ये लाहोरके अफगान-शासनकर्ता स्वाजा वासले जाठवंशीय. उज्जासिंह इस दलके, प्रतिष्ठाम हैं। ओघेदाका: यथासर्वस्व हरण कर लाये। इदोंने सिख गुरु वैरागी बन्दासे 'पहाळ' प्रहण किया था। ___उसके बाद हरिसिंह द्वारा परिचालित भगियोंने बन्दाकी मृत्यु के बाद भोमसिंह, मलसिंह और जयसिंह सिन्धुसमतट और डेराजात प्रदेशमें लूट मचाई तथा कासक वान. श्रात्मीयों ने उनके निकट दीक्षा लो । परस्पर- अत्यान्य सेनाओंने रावलपिण्डी, माला और मांधा प्रीति-सौहाद से और आत्मीयतामें सम्बद्ध होकर ये प्रदेश जय कर जम्मू लूटा। जम्मूाज रणजितदेष इनकी तोनों दस्युत्ति करनेको आशासे एक दल बांधनेको अधीनता स्वीकार करने के लिए बाध्य हुए। यमुनाके कोशिश करने लगे। धीरे धोरे मिहानसिंह, गुलावसिंह, समीप भगी सरदार रायसिंह और भगतसिंहने रोहिला करूरसिंह, और गुरुवरमसिंह, सागरसिंह, मङ्गोरा और और महाराष्ट्र सेनाका सामना कर नाजिब उद्दौलाको सनवनसिंह आदि सरदारोंने उक्त, छज्जासिंहके निकट विपर्यस्त और निहत किया । १७६३ ई०में रामपलिया: 'पहल' ले कर सिखधर्म धारण किया। ये सभी छजा- और कनहियादलके सहयोगले. लहोंने कसर आक्रमण