पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७०३

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भनी घृणा नहीं करते। अन्यत्र चमार लोग ही झाड़ देते हैं | कर्मचारी 'मुन्सिफ' और 'नायब' आदि कहलाते हैं। और प्रायः डोम लोग ही मुर्दे जलाते हैं। मजहवी और उक्त पदोंके ग्रहण करते समय उस शाखाके तमाम लोगों- रंगरेटा भंगी सिखधर्मको मानते हैं। पहाल लेनेके बाद को एक भोज देनेसे पद-प्राप्तिमें फिर कोई बाधा नहीं .ये लोग सिर पर बड़े बड़े बाल रखाते हैं। ये साधा-! रहती। रणतः सफाईसे रहना पसन्द करते हैं। कभी भी दूसरेके : इस सामाजिक सभामें किसी विषयकी नालिश रुजू मलमूत्र आदिका स्पर्श नहीं करते। ताम्रकृट सेवन करनी हो तो पहले ११) सवा रुपया तलवाना देना पड़ता सभीमें निषिद्ध है। है। मामला संगीन होने पर सभापति और उसे श्रेणी- ये सिख-सम्प्रदायमें शामिल होने पर भी नीचत्वके के तमाम आदमियोंको खबर देनी पड़ती है, तथा जहां कारण अन्यान्य सिख इनके माथ नहीं रहते । गुरु तोग जिस समय विचार होगा उसकी भी इत्तला दो जाती बहादुरको ये अपना प्रधान गुरु कहते हैं । लालबेगो और है। विचार क्षेत्रमें एक नहुत लम्बी-चौड़ो चरपाई पर, हिन्दू छुहराओंमें इनके शादो-ब्याह होते हैं । सैनिक एक तरफ पहले जमादार, उसके बाद चारों कर्मचारो वृत्तिमें ये विशेष पटुता रखते हैं। रंगरेटा लोग अपनेको और फिर साधारण पुरुप बैठते हैं । * मजहवियोंसे ऊंचा बतलाते हैं। दस्युवृत्तिके लिए इनकी इस भावमें साधारणतः तीन प्रकारक विचार होते विशेष ख्याति है। हैं, --१ अर्थदण्ड, २ बल-पूर्वक भोग या खाना बसूली भंगी जातिको उत्पत्ति और विस्तृतिका कोई धारा- और ३ जातिच्युति (कुजात) करना । यदि कोई इस सभा- वाहिक इतिहास न रहने पर, भी वर्तमानमें इनकी जातीय के विचारको अग्राह्य कर अर्थदण्ड न दे, तो उसे समाज भित्ति अपेक्षाकृत प्रशस्ततर हो गई है। निम्नश्रेणीमें से वहिष्कृत कर दिया जाता है। असतो स्त्रियोंके लिए जन्म लेने पर भी इनके हृदयमें धर्मभाव प्रवल हैं। बड़ी भागे सजाकी व्यवस्था थी। बहुधा स्त्री-हत्याजनित अमृतसर, सरहरपुरके मकदुम शाहकीकत्र, बांदा जिले पातक भोगना पड़ता था, इस कारण वह व्यवस्था अब की कालिकामाई, विन्ध्याचलकी विन्ध्यावासिनी और उठा दो गई है। जातिसे वहिष्कृत व्यक्ति यदि फिर कभी गदपहाड़ी आदि तीर्थों में इनका समागम होता है। चैत्र मासके अन्तमें ये लोग महासमारोहसे उक्त शक्ति * बनारसके लालवेगियोंमें ८ अंगांी हैं। १ सदर या सेना- मूर्तियोंकी पूजा किया करते हैं। उस दिन ये लोग वहां निवासके साधारण कर्मचारी द्वारा रक्षित, २ काली-पल्टन या पुत्रपौत्रादिका चूड़ाकरणादि करते और देवीके समक्ष बनान-पदातिक सेनादनके अधीन, ३ लान कुरती या अंग्रेजी यथायोग्य पूजा वलि आदि चढ़ाते हैं। सेनाके परिचारक, ४ तेसान या राजघाट मुगलसराय आदि रेल्वे- बनारसके सिवालय (शिवालय ) घाटमें गुरुनानकके स्टेशनके कर्मचारी, ६ रामनगर या बारानसो सरकारके कर्मचारी, ७ नामसे पवित्र पंचायत-अग्बाड़ा है, वहां इनके सामा कोठीवाल अर्थात् भद्र साहब आदिके घरमें काम करनेवाले और जिक झगड़ोंका निबटारा होता है । इनमें भी समाज जनरली यानी अंग्रेजी सेनादलमें बनारसी शासनके समय परिचालक एक चौधरी होता है और उसके नीचे और भो अंग्रेजोंक अधीन काम करनेवालों के वंशधर । एक समाजगत होने कई कर्मचारी होते हैं। इस प्रकारसे इनकी सभा पर भी इन 5 सम्प्रदायोंमें परस्पर कुछ भिन्नता है; और इसीलिए संगठित है और उनके नीचेके कर्मचारीगण साधारण उनमें स्वतन्त्र कर्मचारी नियोगकी व्यवस्था है। सामाजिक झगड़े लोगोंमें सम्मानाह होते हैं। अंग्रेजी सेना निवासमें । मिटाने समय दलपतिके सामने उक्त कर्मचारीयोंको स्थान दिया काम करते रहनेके कारण, इन लोगोंने भी अपने अपने जाता है। उसके बाद साधारण लोगोंका स्थान है । अंग्रेजी दलपति आदिके अंग्रेजी नाम रख लिये हैं। आवश्यक सेनामें काम करते रहनेसे इन लोगोंने अपनेमें भी उसी तरहके होने पर उन कर्मचारियोंका चुनाव हो जाता है। चौधरी नाम रखे हैं। साधारण लोग सिपाही और दूत-रूपसे साधारण- वा दलपति 'ब्रिगेडियर-जमादार' और उसके नीचेके के निकट सूचनादि पहुंचानेवाले प्यादा कहलाते हैं Vol. xv. 175