पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७१३

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७०७ भट्यारा-महमूंजा भट्यारा दाक्षिणात्यवासो. मुसलमान जातिकी एक उत्तेजित करना, उभारना। ३ किसीको इस प्रकार भ्रम शाखा। बबीका काम या दूकानदारी इनकी प्रधान में डालना, कि वह कोई काम करनेके लिये तैयार न हो। उपजोषिकालोग हिलोसेमाकर यहां निमश्रेणी ४ चमकना। ५ बढ़ावा देना। के हिन्दूधर्मत्यागी मुसलमानोंके मध्य विवाह शादी भड़कीला (हि० वि० ) भड़कदार, चमकीला । २ डर कर करके निम्नश्रेणी में गिने जाने लगे हैं। ये लोग स्वभावतः । | उत्तेजित होनेवाला, चौकन्ना होनेवाला । ही अपरिष्कार हैं। हनफी सम्प्रदायी सुन्नी मुसलमान | भड़कीलापन ( हि० पु० ) चमक दमक, भड़कीले होनेका भाव। कह कर अपना परिचय देने पर भी ये कभी भी कलमा भःभड़ ( हिं० स्त्री०) १ भडभड़ शब्द जो प्रायः एक चीज पाठ नहीं करते। पर दूसरी चीज जोर जोरसे पटकने अथवा बड़े बड़े भठियाना (हिं० क्रि०) समुद्रमें भाटा आना, समुद्र के पानी ढोल आदि बजानेसे उत्पन्न होता है, आघातोंका शब्द । का नीचे उतरना। २ व्यर्थकी और बहुत अधिक बात चीत , ३ जनसमूह, भठियारपन ( हिं० पु०) १ भठिसारका काम । २ भठि- जिसमें छोटे बड़े या खोटे खरेका विचार न हो, भीड़। यारोंकी तरह लड़ना और अश्लील गालियाँ बकना। भडभड़ाना (हिं० क्रि०) १ भडभड़ शब्द करना। २ किसी भठियारा (हिं० पु०) सरायका प्रबन्ध करनेवाला चीजमेंसे भड़भड़ शब्द उत्पन्न होना। भाटियारा देखो। भडभडिया ( हि० वि० ; बहुत अधिक और व्यर्थकी बातें भठियाल ( हिं० पु० ) ज्वारका उल्टा, भाटा । करनेवाला, गप्पी। भठुली (हि. स्त्रो०) ठठेरोंकी मिट्टोकी बनो हुई वह छोटी भड़भाड़ ( हि पु०) एक टोला पौधा। धमोय देखो। भट्टी जिसमें किसी चीजको गड़नेसे पहले तपाते या भड़भूजा--हिन्दुओंकी एक छोटी जाति जो अन्न भूननेका लाल करते हैं। काम करती है। इनके दो थोक है, परदेशी और मराठा । भड़बा (हिं० पु. । आडम्बर, दिखौआ शान । मराठा बहुत कुछ महाराष्ट्रियोंसे मिलते हैं । परदेशी उत्तर भड़ (सं० पु०) भड़ परिहासे परिभाषणे वा अच । वर्ण भारतसे दक्षिणापथमें आ कर जुन्नर, घेड़, सिकर, बीजा. सङ्कर जातिविशेष। इसकी उत्पत्ति लेट पिता और पुर, पुरन्धर आदि स्थानोंमें बस गये हैं। तीवर मातासे हुई थी। ___परदेशी भड़भूजा अपनेको साधारणतः कनोजिया "लेटस्तीवर कन्यायां जनयामास यन्नरान । और काश्यपगोत्रीय बतलाते हैं। ये लोग आपसमें पुल माल्ल मल्ल मातरञ्च भडं कोलञ्च कन्दरम् । कन्याका आदान-प्रदान तथा भोजनादि करते हैं । मांस ___(ब्रह्मवैवर्तपु० ब्रह्मख० १० १०) मछलो इनको बहुत प्रिय है। शीतलादेवोको पूजामें छाग भड़ (हिं० स्त्री०) १ एक प्रकारको बहुत हलकी नाव। २ बली देते हैं। परिश्रमी होने पर भी ये लोग अपरिच्छन्न वीर, योद्धा। हैं, किन्तु देवता-ब्राह्मणमें इनको विशेष भक्ति देखो जाती भड़क (हिं० स्त्री०) १ दिखाऊ चमक दमक, चमकीला है। प्रत्येक घरमें बहिरोबा, भवानी, खनदोवा, और पन। २ भड़कनेका भाव, सहम । महादेव माविकी मूर्तियां रहती हैं। परदेशी-बामण भड़कदार (हिं० वि०) १ जिसमें खूब चमकदमक हो, सभी कर्मोमें उनको याजकता करते हैं । आलण्डी, चमकीला ।२ रोबदार। कोन्दनपुर, पएढरपुर और तुलजापुर आदि इनके प्रधान भड़कना (हिं० कि० ) १ प्रज्वलित हो उठना, तेजीसे जल | पवित्र तीर्थ स्थान हैं। ये शिवरात्रि, आषाढी एकादशी, उठना। २ कुछ होना। ३ बढ़ जाना, तेज होना। ४ गोकुलाष्टमी, अनन्तचतुर्दशी, कार्तिक एकादशी तथा डर कर पीछे हटना, चौंकना । इस शब्दका प्रयोग विशे- 'प्रदोष' अर्थात् प्रतिमास के कृष्णात्रयोदशी आदि पर्व- षतः घोड़े आदि पशुओं के लिये होता है। दिनोमें उपवास करते मौर सिमगा, नागपञ्चमी, दशहरा भड़काना (हिं० कि०) १ प्रज्वलित करना, जलाना। २ तथा दीवालीके दिन उत्सव मनाते हैं।