पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७१६

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७१॥ भगिड-मतोली वा भोजनादि नहीं होता। साधारणतः ये साफ सुथरे अच् स्वार्थे अन्-टाप् अत इत्वं । मजिष्ठा, मजोठ । और विलासो होते हैं। प्रायः सभी मद्य, ताड़ी और भएडोरी (सं० स्त्री० ) भण्डोर-गौरादित्वात् कोप् । गांजा पीते हैं। मादकताके वशीभूत होने पर भी ये मञ्जिष्ठा, मजीठ। . . मिताचार और आतिथ्यादि गुणोंसे भूषित हैं। पुरुषवर्ग भण्डोल ( स० पु० ) भण्डीर-रलयोरेकत्वं । मजिष्ठा, सिर घुटाते और चोटी रखते हैं। स्त्रियां और बालकगण मजीठ। . नाना कार्यों में पुरुषोंको सहायता करते हैं। भूतपति महा- भण्डु क (सं० पु० ) भड़ि-उक् । १ मत्स्यविशेष, भाकुर देव ही इनके प्रधान उपास्यदेव हैं। देशी और नामक मछली। गुण- मधुर, शीतल, वृष्य, श्लेष्मकर, खर्हाद ब्राह्मण इनके सभी कार्यों में पौरोहित्य करते हैं। गुरुविष्टम्भी और रक्तपित्तहर । २ श्योनाकगृक्ष । हिन्दुओंकी मांति प्रायः सभी पर्यों में ये उपवासादि करते भतरौड़ (हिं० पु० ) १ मथुरा और वृन्दावनके बीचका एक हैं। पएढरपुर, गोकर्ण और बनारस आदि तीर्थस्थानों- स्थान । इसके विषयमें यह प्रसिद्ध है, कि यहां श्रीकृष्णने में जानेके लिये इनमें विशेष उत्सुकता पाई जाती है। चौबाइनोंसे भात मगवा कर खाया था।२ ऊंचा स्थान । जन्म और विवाहका में ये ब्राह्मणके परामर्शानुसार ३ मन्दिरका शिखर)। कार्य करते हैं। अन्यान्य जातीय वा सामाजिक झगड़ों- भतवान ( हि० पु०) विवाहकी एक रीति । इसमें विवाह- का निबटेरा इनको जातीय सभा ही कर दिया करती है। के एक दिन पहले कन्यापक्षके लोग भात, दाल आदि ये मुर्दोको जलाते भी है और गाड. भी देते हैं। कश्ची रसोई बना कर वर और उसके साथ चार और भण्डि (स स्त्री० ) भडि. इन् । बीचि, लहर । कुआरे लड़कोंको बुला कर भोजन कराते हैं। भण्डिका ( स० स्त्री०) मञ्जिष्ठा, मजीठ। भतार (हिंपु) पति, खाविंद। भण्डिजस (सपु.) पाणिन्युक्त ऋषिभेद । भताला--मध्यप्रदेशके चान्दा जिलान्तर्गत एक गण्ड भण्डित (सं० पु०) भड़ि-त। ऋषिभेद, एक गोत्रकार | प्राम। यह भाण्डक नगरसे १३ कोस उत्तर-पश्चिममें ऋषिका नाम। अवस्थित है। एक समय यह स्थान प्राचीन भद्रावती भण्डिन्-हर्षचरित-प्रणेता कवि बाणभट्टका नामान्तर । राज्यके अन्तर्भुक्त था। निकटवर्ती पर्वतके ऊपर सुर- भण्डिर ( स० पु०) भण्डिल रलयोरैक्यम् । शिरीषवृक्ष, क्षित प्राचीन देवमन्दिर और दुर्गादि स्थानीय प्राचीन सिरसा। किर्तिका परिचय प्रदान करते हैं। पर्वतके पादमूलस्थ भण्डिल (सं० पु० ) भण्ड्यते परिहसतीधेति भाषते | सुरम्य पुष्करिणी आदिसे इस स्थानको शोभा अनिर्वच इति वा, भडि. ( समिकल्यनिमहिभडिभण्डीति। उण | नीय हो रही है। यहां पत्थरको एक उत्कृष्ट खान है। १५५) इति इलच । १ शिरीषवृक्ष, सिरसका पेड। भतीजा (हि० पु० ) भाईका पुल, भाईका लड़का। २ दूत । ३ शिल्पी । (वि०) ४ शुभ, अच्छा।। | भतुआ (हिं० पु०) सफेद कुम्हड़ा, पेठा। भएडो (सं० स्त्रो०) भण्ड्यते इति भडि-इन् कृदिकारादिति | भतुला (हिं० पु.) गकरिया, बाटी।। पक्षे डोप । १ मजिष्ठा, मजीठ । २ शिरोषवृक्ष, सिरसा। भतोली-मुजफ्फरपुर जिलेके अन्तर्गत एक प्राचीन ३ श्वेत विवृत, सफेद निशोथ । प्राम। यह मुजफ्फरपुर नगरसे ६ कोसकी दूरी पर भएडोतकी (संलो०) भण्डो सतो तकतीति तक-अच, अवस्थित है। यहां 'झवरि दो' नामक एक १०० फुट गौरादित्वात् कोष । मज्जिष्ठा, मजोठ । उच्च सुपृहत् स्तूप है। स्थानीय प्रवाद है, कि उस स्थान भण्डोर (सं० पु०) भण्डि बाहुलकात् ईरन् । १ समष्ठिल पर चेक राजाओंका एक दुर्ग था। मुसलमान अमलदारो- क्षुप, भंडभीड़। २ तण्डु लीय शाक, चौलाई । ३ शिरीष-1 से बहुत पहले यह आगसे बिलकुल बरबाद हो गया था। वृक्ष, सिरसा। ४ वटवृक्ष । स्तूप खनते समय देखा गया है. कि उसका गठनकार्य भण्डोरलतिका (सं० स्त्री०) भण्डोर इव लतते इति लतिः। और इष्टकावि प्राचीन हिंदू दंगकी बनी हुई हैं। मलावा