पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७२

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फर्रुखाबाद (फरकाबाद )-फरुखि हो कर मफदरके हाथसे फरुखाबाद छीन लिया और वर्गमील और जनसंख्या प्रायः २५०३५२ है। इसमें इलाहावादमें घेरा डाला। विस्तृत विवरण रोहिलागड १ शहर और ३८७ ग्राम लगते हैं। बाजरा, आलू और और बरेली शब्दमें देखो। तमाकू यहांको प्रधान उपज है। यहां आम भी बहुता- रोहिलाओंको १७७४ ईमें परास्त करके सुजा- यतसे मिलता है। भोजपुर, महम्मदाबाद, पहाड़ा और उद्दौलाने यह स्थान अपने अधिकारमें कर लिया। इसके शमसाबाद परगने ले कर यह तहसील गठित हुई है। बाद १८०१ ई०में यह अङ्रेजों के हाथ लगा । १८५७ ३ उक्त जिलेका प्रधान नगर । यह अक्षा० २७ २४ उ. ईमें यहां विद्रोहानल खूब जोरसे धधक उठा। . और देशा० ७६ ३४° पू० गङ्गाके पश्चिम कूलसे फतेगढमें बहुतसे अडरेज मारे गये । फतेगढ देखो। प्रायः ॥ कोसको दूरी पर अवस्थित है। जनसंख्या मईसे जनवरी मास तक यह जिला नवाब और बखत् । पचास हजारके करीब है। १७१४ ई०में नवाब महम्मद खाँके अधीन रहा । १८५८ ईमें जब ब्रिगोडियाकी . खांने सम्राट फरुखसियरके नाम पर यह नगर बसाया। फौजने विद्रोहियों को परास्त किया, तब नवाब और यहां एक किला है। कहते हैं, कि पहले उसीमें नवाव- फिरोजशाह जान ले कर बरेलीको भाग गये। पीछे का प्रासाद था। यहांसे गङ्गागर्भका दृश्य अति मनो- मई माममें विद्रोहियों ने आकर फिरसे कायमगञ्जको रम लगता है। पहले यह नगर युक्तप्रदेशका वाणिज्य घेर लिया। किन्तु इस बार वे वहां अधिक दिन ठहर केन्द्र था। इष्टइण्डिया भौर कानपुर-फरक्काबाद-लाइट न मके। रेलपथके खुल जानेसे नगरका वाणिज्य-गौरव घट गया ____इस जिलेमें फर्रुखाबाद, फतेगढ़, कायमगञ्ज, शाम- है। भिन्न भिन्न मालोंकी रफ्तनी रेल द्वारा हो होती है। साबाद, कनोज, छिवामी, तिरबा और तेलोग्राम नामके यहाँको ऐतिहासिक घटना जिलेके साथ संश्लिष्ट रहनेके ८ शहर और १६८० ग्राम लगते हैं। जनसंख्या दो कारण उसी जगह वर्णित हुई है। शहर चारों ओर लाखसे ऊपर है। सैकड़े पीछे ८८ हिन्दू और १२ मट्टोको दीवारसे घिरा हुआ है। शहरके बाहर नवाबका मुसलमान हैं। अयोध्या, रोहिलखएड, कानपुर, कल समाधि-मन्दिर है जो अभी भग्नावस्थामें पड़ा है। कत्ते आदि स्थानोंमें यहांसे चावल, गेहुँ, जौ, ज्वार, शहर में एक हाईस्कूल, American Presbyteian mission वाजरा, उड़द, बील आदि जात द्रव्योंकी रफ्तनी होती है। स्कूल, एक मिडिल स्कूल तथा बहुतसे प्राइमरी स्कूल रेलपथके खुल जानेसे वाणिज्यकी विशेष सुविधा हो हैं। अलावा इसके एक चिकित्सालय और एक जनाना- गई है। १.७०से १६०० ई० तकके अभ्यन्तर प्रायः दश अस्पताल है। हालमें एक मैदेका कारखाना भी खुला है। बार दुर्भिक्ष पड़ा था। फरुखि ---खान्देशके मुसलमान राजवंश। १३७० ई०में विद्या शिक्षामें यह जिला बहुत गिरा हुआ है, सैकडे मालकराज फरुखिने दिल्लीश्वरसे दक्षिण निमारका पाछे चार मनुष्य पढ़े लिखे मिलते हैं। पर अब इस ओर | शासनभार ग्रहण किया। ताप्ती नदीकी उपत्यका तक लोगोंका ध्यान कुछ कुछ आकृष्ट होता जा रहा है। वे राज्य फैला कर परलोक सिधारे, पोछे उनके लड़के अभी जिले भरमें २५० ऐसे स्कूल हैं जिनमें सरकारसे नशिर खाने अपनेको स्वाधीन राजा बतला कर तमाम कुछ कुछ सहायता मिलती है, ५० प्राइभेट स्कूल हैं घोषणा कर दी और १३६६ ई०को खान्देश राज्यमें फरुखि गवरमें ण्टसे कुछ भी सहायता नहीं मिलती और ४ राजवंशको प्रतिष्ठा की। उन्होंने अशीरगढ़ जीत कर खास गवर्मेण्टके स्कूल हैं। स्कूलके अलावा अल्पताल पीछे ताप्तीके दूसरे किनारे बुर्हानपुर और जैनाबाद नगर भी है। बसाया। बुर्हानपुर नगरमें उनको राजधानी थी। यहां २ युक्तप्रदेशके फर्रुखाबाद जिलेकी एक तहसील। खान्देश-राजवंशने १३६६से १६०० ई० तक शासन किया। यह अक्षा० २०६ से २७२८ उ० और देशा० ७१६५ से। किन्तु उनकी स्वाधीनता सदाके लिये अक्ष पण न रही। ७६४४ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ३३६ गुजरात और मालवराजके अधीन के सामन्तरूप राज्य