पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७३

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६७ फरवक-फर्रा करते थे। समय समय पर उन्होंने स्वाधीन होनेकी कि यह राग अमीर खुसरोने निकाला था। २१४ मात्रा- कोशिश भी की थी जिससे वे अधिराजके हाथ कई बार ओंका एक ताल। इसमें ५ आघान और. २ खाली होते अच्छी तरह शासित हुए थे। विभिन्न आक्रमणकारियोंके हैं। इसके तबलेके बोल यों हैं: ...१ धिने धिन, २ बाकेटे, हाथमें पड़ कर बुर्हानपुर तबाह हो गया था और फरुखि- ३ तागधिन् धा गगेना, तेटेकता, गदिधेन । धा। गणने अशीरगढ़ जा कर आश्रय ग्रहण किया। पञ्चम फर्क ( हि पु०) फरक देखो। राजा आदिल खाँ ( शाह इ-झरखन्द ) के राज्यकालमें इस फर्च हि वि० ) फरच देखो। वंशकी विशेष श्रीवृद्धि दिखाई दी थी। उन्होंने गर्हाः फर्चा (हिं० पु. ) फरचा देग्यो । मण्डल तक राज्य जीत कर गोंड़ोंसे कर वसल किया फर्जद (हिं पु०) फरजंद देखो। था। उनकी बनाई हुई जमा मसजिद् इद्गा आदि आज फर्ज ( अ० पु०) १ मुसलमानो धर्मानुसार विधिधिहित भी बुर्हानपुरमें देखनेमें आती है। १६०० ई में सम्राट । कर्म जिसके नहीं करने प्रायश्चित्त करना पड़ता है। २ अकबरशाहने फरुखिवंशके शेष राजा बहादुर खाँको कल्पना, मान लेना। ३ कत्त व्यकम । ४ उत्तरदायित्व । अशीरगढके युद्ध में परास्त कर खान्देश अपने साम्राज्यमें फजी (फा० वि० ) १ कल्पित, माना हुआ। २ सत्ताहीन, मिला लिया था। नाममात्रका। (पु.)३फरजी देखो। फरुयक (सं० क्ली०) पूगपात्र । फर्द ( फा० स्त्री० ) १ कागज वा कपड़े आदिका टुकड़ा फरुहा (हिं० पु०) फावड़ा देखो। जो किसीके साथ जुड़ा या लगा न हो। २ रजाई शाल फरहो ( हिं० स्त्री० ) १ छोटा फावड़ा । २ लकड़ीका एक आदिका ऊपरीपल्ला जो अलग बनता और बिकता है। प्रकारका औजार जो फावड़े के आकारका होता है। यह ३ कागजका टुकड़ा जिस पर किसी वस्तुका विवरण, घोड़े की लीद हटानेमें काम आती है। क्यारी बनानेके सूची वा सूचना अदि लिखी गई हों या लिवी जाय । ४ लिये गृहस्थ खेतकी मिट्टी हलसे हटाते हैं। ३ मथानी। परण । ५ वह पशु या पक्षी जो जोढ़के साथ न रह कर ४ एक प्रकारका भूना हुआ चावल जो भुनने पर फूल अलग और अकेला रहता है । ( वि० ) फरद देखो। कर भीतरसे खोखला हो जाता है, लाई । फर्दू सी-फिदौसी देखो। फरहरी (हिं. स्त्री०) फुरहरी देखो। फफर ( स० वि० ) स्फुर-अच् पृषोदरादित्वान् साधु । फरेंद ( हिं० पु. ) जामुनकी एक जातिका नाम। इसके अत्यन्त चञ्चल। फल बहुत बड़े बड़े और गूदेदार होते हैं। इसकी पत्तियाँ फफरी ( स० स्त्री० ) कराग्र, पंजा। जामुनको पत्तियोंसे अधिक चौड़ी और बड़ी होती है। फर्फरीक ( स० पु० ) स्फुरतीति स्फुरणे ( फफ रोकाद- फल आषाढमें पकते हैं और मीठे होते हैं। जामुनके : यश्च । उण ४।२०) इति ईकन्, धातो फर्फरादेशश्च । समान यह पाचक होता है। जामुन देखो। १ कराप्र, पंजा । २ उपानत्, जूता । ३ मार्दव, सरलता। फरेन्द्र (सं० पु०) जम्बू वृक्ष, जामुनका पेड़। . ४कोंपल। फरेव (फा० पु०) कपट, धोखा। " फर्फरीका ( स० स्त्री० ) फर्फरीक-टाप। १ पादुका, फरेरा (हिं० पु० ) फरहरा देखो। जूता। २ मदन । फरेरी (हिं० स्त्री०) जंगलके फल, जंगली मेवा।। फर्माना (फा० क्रि०) फरमाना देखो। फरैदा ( फा० पु०) एक प्रकारका तोता । फर्याद (फा० स्त्री० ) फरियाद देखो। फरो (फा०वि०) तिरोहित, दवा हुआ। फर्रा (हिं० पु. ) गेहूं या धानकी फसलका एक रोग। फरोख्त ( फा० स्त्री० ) विक्रय, विक्री । यह रोग उस अवस्थामें उत्पन्न होता है जब फूलने फरोदस्त (फा० पु०) १गौरी, कान्हड़ा और पूरबीके समय तेज हवा बहती है। इसमें फूल गिर जानेसे मेलसे बना हुआ एक प्रकारका संकर राग। कहते हैं, बालोंमें दाने नहीं पड़ते।