पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७३४

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


७२९ भर प्राचीन और प्रसिद्ध सूर्यवंशीय राजाओंका शासन प्रभाव 'छतो' नामसे परिचित हुए गा.। उपर्युक घटना परम्परा विलुप्त होने पर यहां भरजातिका आधिपत्य विस्तृत द्वारा किसी ऐतिहासिक सत्य पर नहीं पहुंचा जा हुमा। सूर्यवंशीय राजा कनकसेनके राजत्वकालमें सकता। कारण; सिवा एक किम्बदन्तीको इस विषयमें इस अनार्य भरजातिने हिमालयके पार्वतीय निवाससे और कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अवतीर्ण हो कर अयोध्यामें प्रतिष्ठा प्राप्त की। राजा इनमें भरद्वाज, कनोजिया और राजभर नामक तीन कनकसेन दुद्धर्ष भरोंका आक्रमण सह न सके जिससे खतन्त्र श्रेणियां हैं। मिर्जापुरी भर भुंइहाय, राज- वे गुजरातकी तरफ भाग गये। उनके साथ होनबल भर और दुसाद नामक तीन श्रेणियों में विभक्त हैं। क्षत्रिय-सन्तानगण भी नाना स्थानोंमें फैल गये हैं। मुंहार लोग अपनेको उन लब्धप्रतिष्ठ भरराजों के वंश- दस्युवृत्ति और लूट मार आदि इनका प्रधान कार्य है। धर और सूर्यवंशीय राजपूत कहा करते हैं। . . अपन में किसीको धर्मचर्चा करते हुए देखते हैं, तो उसे ये सगोत्रमें, अथवा पितृ वा मातृ-कुलमें विवाह नहीं विशेष लाञ्छित करते हैं। गाजोपुर, बस्ती, मोर्जापुर, करते, किंतु यदि ४ या ५ पीढ़ीमें पिण्ड वाधक न हो, तो भरोंच मावि जिलों के दुर्गादिके ध्वंसावशेषसे प्रमाणित ये लोग बूआको कन्याके साथ भी विवाह कर लेते हैं। होता है, कि इस दुद्धर्ष जातिने किसी समय सुदूर अपने घरमें विवाह करना हो इनको विशेष अभिप्रेत है। विस्तृत युक्तप्रदेशमें आधिपत्य विस्तार किया था। आजमगढ़ के राजभर वास्तवमें हिंदू हैं। इनके सम्पूर्ण कौशिक राजपूतों द्वारा वे गोरर पुरसे भगाये गये थे। क्रियाकलाप हिंदुओं के समान हैं । ये हिंदू भरगण विन्ध्याचलके निकटवत्तीं पम्पापुरमें इनकी राजधानी 'पतैत' कहलाते हैं । निम्नश्रेणोके भरों को 'खुन्तैत' थी। कहते हैं। पतैतों ने अपने आचारादि द्वारा समाजमें प्रत्नतस्वविद्गण केवलमात्र किम्बदन्तियों पर उच्च स्थान प्राप्त किया है, और खुन्तैत लोग शूकर-पालन भास्था स्थापन कर भरजातिकी पूर्व प्रतिपति स्वोकार : जैसे निकृष्ट व्यवसायमें जीवन बिताते हैं। उक्त दोनों करने में सहमत नहीं हैं। साहबुद्दीन गोरीके भारता- श्रेणियों में परस्पर आदान प्रदान प्रचलित रहने पर भी कमण और कनोज-पति जयपालके अधःपतनके समय शूकर-व्यवसायियों के साथ उन्नत व्यक्ति अपनी सन्तान- राजपूतजाति पूर्व प्रान्तमें अध्युषित हुई । उस समय का विवाह-सम्बन्ध नहीं करते । शूकर-पालन भर समाज- भर लीग राजपूतों से पराजित हुए थे। ये आजमगढ़ में नोच समझा जाता है । यदि कोई अविवाहिता बालिका और गाजीपुरसे सेनगरों द्वारा, मिर्जापुर और इलाहा- स्वजातीय किसो युवकके साथ अवैध प्रणयसे आसक्त बादके आसपाससे गहरवाड़ों द्वारा, गोरखपुरसे हो, तो जातीय सभा उस कन्या के पितासे जुर्माना ले कौशिकों द्वारा, फैजाबाद और अयोध्यासे बाई तथा कर लड़कीको जाति । ले लेती है। इस वर्षसे बड़ी भद्रोही और प्रयागके पश्चिमभागसे मोना, वाई, सोनक कन्याका विवाह निषिद्ध है। वह कन्या समाजमें मादि जातियों द्वारा भगाये गये थे। 'रजस्वला' होनेके कारण निन्दनीय है, उसके साथ कोई भो इस प्रकारसे भर-शक्तिके अधःपतन होनेके बाद समा युक्तपदेश राजपूतजातिकी विभिन्न श्रेणियों के पा करेंगी साहबका कहना है कि पूर्वाभिमुखी विशाल राज- सरदारों के शासनाधीन हो गया था। उक्त राजपूतगण । पूतवाहिनी नागवंशीय राजाओं द्वारा पराजित हुई थी। जो क्षत्री - अब उक्त प्रदेशमें प्रबल हैं वे भरके सिवा और कोई नहीं हो वर्तमान प्रत्नतत्त्वबिद्गण भरजातिकी इस पूर्वतन गौरव- : सकते। भारतमें आर्योंके प्रभावके समय इनका प्रभाव घट गया वार्ताको स्वीकार नहीं करते। पहले जो ध्वंसावशेष भरजातिके था। अन्य विद्वान इनके गठन साहभ्यसे अनुमान करते हैं, कि ये कीर्तिस्तम्भ समझे गये थे, अब उनमें से बहुतसे विभिन्न राजवंशों : विड़ीय कोल अथवा शबरजातिके होंगे। विन्ध्याचलके कैमूर द्वारा आरोपित प्रमाणित हुए हैं। अधित्यकावासी अनार्यजातिके साथ इनका बहुत कुछ सुसाइभ्य है।