पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७४

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६५ फर्राय-फल फर्राटा हि पु० ) १ क्षिप्रता, तेजी। २ खर्राटा देखो। बहुत ही प्रत्यक्ष है। यद्यपि वैज्ञानिक दृष्टिसे गेहूं, चना, फर्राश (अ० पु०) १ वह नौकर जिसका काम डेरा गाड़ना, जौ, मटर, आम, कटहल, अंगूर, अनार, सेव, वादाम, सफाई करना, फर्श बिछाना, दीपक जलाना और इसी किशमिश आदि सभी फल हैं, परन्तु व्यवहारमें लोग प्रकारके दूसरे काम करना होता है। २ नौकर, खिद- गेहूं, चने, जौ, मटर आदिकी गिनती बीज वा अनाजमें मतगार। और आम, कटहल, अनार, सेव आदिको गिनती फलोंमें फर्राशी ( फा० वि० ) फर्श या फर्राशके कामोंसे सम्बन्ध करते हैं। फल प्रायः मनुष्यों और पशु-पक्षियोंके खानेके रखनेवाला। (स्त्री०) २ फर्राशका काम। ३फर्राशका काममें आते हैं। इसके भेद भी अनेक होते हैं । कुछमें पद। केवल एक ही बीज या गुठली रहती है, कुछमें अनेक । फर्लो (अं० स्त्री० ) फरलो देखा। इसी प्रकार कुछके ऊपर बहुत ही मुलायम और हलका फर्श ( अ० स्त्री० ) १ विछावन, बिछानेका कपड़ा। २ आवरण या छिलका और कुछके ऊपर वहुत कड़ा या फरण देखो। कांटेदार रहता है। फर्सि -युद्धास्त्रविशष। __ ३ गुण, प्रभाव। ४ प्रतिफल, बदला । ५ प्रयत्न वा फर्हत खा -सम्राट् हुमायुनके एक क्रीतदास । इसने किसी क्रियाका परिणाम, नतीजा।६ धर्म या परलोककी दृष्टि- युद्ध में बेगबाबाके हाथसे हुमायुनको बचाया था। इस से कर्म का परिणाम जो सुख और दुःख है, कर्म भोग। प्रत्युपकारमें सम्राट्ने सरहिन्द जानेके समय इसे लाहोर- ७ शुभ कर्मों के परिणाम जो संख्या चार माने जाते हैं। का शिकदार बना दिया। कुछ समय बाद यह अकबर- इन चारों के नाम हैं--अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष । ८ शाहके साथ मिल गया। अकबरने सिंहासन पा कर हलकी फाल । ६ ढाल। १० फलक । ११ बाण, भाले, छुरी इसे कोराके तुजलदका पद प्रदान किया। अहमदाबादके आदिका तेज अगला भाग। यह भाग लोहेका बना होता समीप इसने महम्मद हुसेन मिर्जाको परास्त कर विशेष : है और उससे आघात किया जाता है। १२ गणितकी सुख्याति प्राप्त की। उक्त सम्राटके शासनके १वें वर्षमें किसी क्रियाका परिणाम। १३ पासे परकी विदी या यह पुनः युद्ध करनेके लिये बिहार भेजा गया। इस बार चिह्न । १४ उद्धश्यकी सिद्धि । १५ राशिककी तीसरी भी इसने सफलता प्राप्त की जिससे सम्राट्ने प्रसन्न हो राशि वा निष्पत्तिमें प्रथम निष्पत्तिका द्वितीय पद। १६ कर इसे जागीरदार बना दिया। पीछे राजा गजपतिके मूलका व्याज वा वृद्धि, सूद। १७ क्षेत्रफल । १८ साथ जो इसका युद्ध हुआ उसीमें यह मारा गया। फलित ज्योतिषमें ग्रहोंके योगका परिणाम जो सुख दुःख फही-युक्तप्रदेशके मैनपुर जिलेका एक नगर । यह मुस्त आदिके रूपमें होता है। १६ जातीफल, जायफल । २० फावादसे ४ कोस दूरमें अवस्थित है। यहां नील, रुई प्रयोजन, दरकार । २१ त्रिफला । २२ कक्कोल, कंकोल । और शस्यादिका कारबार है। २३ कूटज वृक्ष, कोरैयाका पेड़ । २४ दान। २५ मुष्क। फलंक (फा० पु० ) अन्तरिक्ष, आकाश। २६ इन्द्रयव । २७ स्त्री-रज। २८ सर्वतोभद्ररस । २६ फल ( स० क्ली० ) फलतीति फलनिष्पत्तौ नि फला विश- मदनफल। ३० वमन । ३१ महर्षि गौतमोक्त प्रेमका रणे वा अच । १ लाभ । २ वनस्पतिमें होनेवाला वह भेद। महर्षि गौतमने स्वकृत सूत्रमें इसका लक्षण इस बीज अथवा पोषक द्रव्य या गूदेसे परिपूर्ण वीज-कोश जो प्रकार बतलाया है..... किसी विशिष्ट मृतुमें फूलोंके आनेके बाद उत्पन्न प्रवृत्ति और दोषजनित जो अर्थ है वही फल पदार्थ होता है। है। इस विषयकी कुछ विशदरूपसे यहां आलोचना वैज्ञानिक दृष्टिसे बीज ( दाने या अनाज आदि) और करनी चाहिये। मानवोंका गमन, भोजन वा मानसिक बीजकोश ( साधारण बोलचालवाले अर्थ में फल) कोई . चिन्ता आदि चाहे जो कोई व्यापार क्यों न हो, उसके विभेद नहीं माना जाता। परन्तु व्यवहारमें यह विभेद परिणामसे सुख अथवा दुःख भोग उत्पन्न होता है।