पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७४३

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. भरतपुर-भरतवीणा ७३७ १कोस दक्षिण-पश्चिममें विजयमढ नामक एक दुर्ग है जहां मध्य विस्तृत है। जनसंख्या प्राय: ४३६०१ है। यहां बौधेय राजवंशकी एक शिलालिपि देखने में आती है । रूपे- राजपूतानेकी राजकीय रेलवे लाईनके खुल जानेसे जाने रल नदीके दूसरे किनारे सिकरी नामका जो बांध है। आनेको विशेष सुविधा हो गई है। वह बहुत पुराना है। कहते हैं कि १८४० ई में महाराज यहांका वर्तमान दुर्ग १७३३ ई०में राजा वदनसिंहने बलवन्त सिंहने उस बांधको वनवाया था। पीछे उस बनवाया था। १८०५ ई०में लार्ड लेक और १८२७ ई०में बांधका हाता और भी बढ़ाया गया जिसमें डेढ़ लाखसे कम्बरमियरके अवरोधके लिये इस दुर्गने भारतवर्ष में ऊपर रुपये खर्च हुए थे। विशेष प्रसिद्धि लाभ की है। ___ वृटिश-शासनप्रणालीके अनुसार राजकार्य चलाया शहरमें बहुत बढ़िया चामर तैयार होता है जो दूर दूर जाता है। सबसे निम्नश्रेणीकी अदालत नायब तहसील देशोंमें भेजा जाता है। भरतपुरके प्रायः सभी अधिवासी दारको है। ये तृताय श्रेणोके मजिष्ट्रेट हैं और दीवानी कृष्णभक्त हैं और श्रीकृष्णको 'विहारी' नामसे पूजते हैं। ५० रु० तकके मामले पर विचार करते हैं। इनके ऊपर तह- निरीह स्वभाव परमवैष्णव होने पर भी जरुरत पड़ने पर सीलदार हैं जिन्हें द्वितीय श्रेणीके मजिष्ट्र टका अधिकार शत्रुके साथ हिंसावृत्तिका आचरण करते हैं। यहांके जेल- है। ये २००) रु० तकके दीवानो मामले पर विचार कर में उत्कृष्ट कम्बल तैयार होता है। शहर में कुल मिला कर सकते हैं। दोनों अदालतकी अपील जिलेके नाजिम अदा आठ स्कूल हैं जिनमेंसे पांच दरवारके द्वारा और तीन लतमें सुनी जाती है। इन्हें डिष्ट्रिक्ट मजिष्ट्रटमा सा चर्च मिशनरी सोसाइटीके द्वारा परिचालित होते हैं। अधिकार है। इनसे भो ऊपर सिभिल और सेसन जज दरबार हाई स्कूलमें मैट्रिक तककी शिक्षा दी जाती है है । कांसिल ही सबसे बड़ी अदालत है । इन्हें मृत्युदण्ड और वह इलाहाबाद विश्वविद्यालयके अधीन है। स्कूल- भी देनेका अधिकार है, पर इसमें गवर्नर-जनरलके एजेण्ट- के अलावा पांच अस्पताल और एक चिकित्सालय है । की अनुमति लेनी पड़ती है। राज्यकी कुल आय मिला कर भरतपुर---मध्यप्रदेशके चाङ्गमकार राज्यका सदर । यह ३१ लाख रुपयेकी है। राज्य में सरकारो सिक्का ही चलता अक्षा २३४४°30 तथा देशा० ८१.४११०के मध्य है। पहले यहां दो टकसाल थी एक दीगमें और दूसरी वनारु नदोसे २ मील उत्तर-पश्चिममें अवस्थित है। जन- राजधानीमें, पर दोनों ही क्रमशः १८७८ और १८८३ ई०में संख्या ६३५ है। बंद कर दी गई। पहले यहां जो सिक्का चलता था, उसे भरतप्रसू (म० स्त्री०) प्रसूते इति सू-क्विप् प्रसू, भरतस्य 'हालो' कहते थे । उसका मान सरकारी दश आनेके वरा- प्रसूः । भरतको माता कैकयी । बर था। भरतरी ( हिं० स्त्री०) पृथ्वी । ___ राजपूतानेके बीस राज्यों के मध्य विद्याशिक्षामें इस भरतवर्ष (हिं० पु.) भारतवर्ष देखो। राज्यका स्थान ग्यारहवां पड़ता है । अभी कुल मिला कर भरतवीणा ( स० स्त्री० ) बीणायन्त्र विशेष, एक प्रकारको ६६ स्कूल हैं जिनमेंसे १६ दरवार द्वारा और ३ चमिस- वीणा । भरतबीणाका नाम सुन कर बहुतसे इसका यौगिक नरी सोसाइटो द्वारा परिचालित होते हैं। उक्त स्कूलों में अर्थ---भरतऋषि प्रणीत बीणा--प्रहण कर इसे प्राचीन से हाई स्कूल, संस्कृत स्फूल और एङ्गलो वर्नाक्यु- सङ्गीतशास्त्रानुमत अति प्राचीन यन्त्र समझ सकते हैं, लर स्कूल प्रधान हैं। चार बालिका स्कूल भी हैं। विद्या- परन्तु वास्तवमें यह बात नहीं है। यह बीणा अत्यंत शिक्षामें टेटके करीब पचास हजार रुपये वार्षिक व्यय आधुनिक है। रुद्रबीणा और कच्छपीबीणाके मिश्रणसे होते हैं। स्कूल के अलावा ७ अस्पताल और १० चिकित्सा- इसकी उत्पत्ति हुई है। भरतबीणाका ध्वनिकोष अषि- लय भी हैं। कल रुद्रवीणाके समान काष्ठनिर्मित और धर्माच्छादित है २ उक्त राज्यकी राजधानी । यह दुर्ग द्वारा सुरक्षित है। तथा दन्त, कीलक, तारोंको संख्या, खरबन्धन, धारण और और अक्षा० १७.१३ उ० तथा देशा० ७७°३० पू०के वादनप्रणाली आदि सभी कच्छपीबीणाके सदश है। Vol, XV, 185