पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७६८

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भवभूति

पंक्तिपायन, पञ्चातिक र सोमवारी ब्रह्म दो, : उस मालूम होता है, कि भवति टम शताब्दीमें हुए ब्राह्मणोंका वास.. था। उनके वंशमैं) वाजपेयय ये हैं। अयोध्यापति रामचन्द्रके चरिताख्यानको ले कर सम्पादनकारी पूज्य महाकवि गोपाल भवका जन्म हुआ। जितने भी नाटक रचे गये हैं, उनमें कविका उन्हीं गोपालके पौत्र और पवित्रकीति नीलकण्ठके पुत्र- चरित और वीरचारेत सर्वापेक्षा प्राचीन है, इसमें मग. रूपमें भवतिने जन्मग्रहण किया ।* नहीं । कालिदास और भवभूतिके काथ्योंकी दास्पर आपके पितृपुरुषगण वेदविद्या में सुपण्डिा थे । वंशगत तुलना करनेसे कालिदासको हो श्रेष्ठ मानना पड़ता है। विद्यानुशीलन तथा अपनी असाधारण प्रतिभा और . कालिदासकी कविता सरल और स्वाभाविक है, भष- अध्यवसायसे ये संस्कृत-रचनामें पारदर्शिता प्राप्त करने : भूतिका काव्य दीर्घ-समासके कारण जटिल हो गया हैं, के कारण अनन्य साधारण श्रीकण्ठ उपाधिसे समलङ्कन परन्तु उनको स्वभाववर्णना प्रकृतिको विशेष अनुकारिणी हुए थे । आपकी माताका नाम जानुकणीं था।। है। वाल्यकालमें आप सर्वशास्त्रज्ञ ज्ञाननिधि नामक एक कविकी रचनाशक्ति और वर्णनाशक्ति युगपत् उपाध्यायके निकट अध्ययन करते थे। विस्मयोद्दीपक है । इस प्रकारका भाषाधिपत्य अन्य किसी विदर्भदेशमें ा जन्मग्रहण करने के बाद भवभूतिने भी कविके काव्यमें नहीं देखा जाता। आपकी लेखनी- अपना वाल्यजीवन कहां और किस प्रकार बिताया इसका से निकला हुआ दुरूहपद-समन्वित दीर्घसमास-विन्यास कोई विशेष विवरण नहीं मिलता। मालतीमाधवके मेघमन्द्र के समान स्निग्ध, गम्भीर और चित्तग्राही है। प्रकारणको पढ़ कर हम इतना तो जान सकते हैं, कि । मालतीके प्रणयस निराश हो कर माधव आत्मविसर्जन- उनके समय में कुण्डिनपुर में विदर्भको राजधानी थी।। के लिए श्मशान घाट में उपस्थित हुए हैं । कविने जिस पद्मपुरमें कविका जन्म हुआ था, वह स्थान अब विभीपिका पूर्ण उस श्मशानका जो चित्र अङ्कित किया है, जनशन्य घोर अरण्य हो गया है। उसे हम उदाहरणार्थ यहां उद्धत करते हैं:- __ ऐतिहासिकाने भवभूतिके आविर्भाव-कालके निर्ण- "गुव्रतकुञ्जकुटीरकौशिकघटा यार्थ गभोर गवेषणा-पूर्वक जो प्रमाण संगृहीत किये हैं, गुत्कारसंबल्गित क्रन्दत् फरव चण्डतात्वृतिभृतप्रागभारभीमस्तटः।

  • "अस्ति दक्षिणापथे पद्मपुरं नाग नगरम् । तत्र केचि- .

अन्तःशीर्ण-करक-कपरपयः संरोध कुलङ्कन । तैत्तिरीयिणाः काश्यपाश्वरगागुरवः पंक्तिपावना पञ्चाययो धृतव्रताः प्रांतानिर्गमघार घर्घरवा पारे श्मशानं सरित ।" सोमपीथिनः उडम्परा ब्रह्मवादिनः प्रतिवसन्ति । तदामृध्याय- निशोथ समयम भीपण श्मशान भूमिमें आनेवाले मनुष्य- यस्य तत्र भवनो वाजपेयाजिनो महाकवेः पञ्चसुगृहीतनाम्नी भह- ___ के हृदयमें स्वभावतः ही भौतिभाव उत्पन्न हुआ करता गोपालस्य पौत्रः पवित्रकोत्तं नीलकण्ठस्यात्ममम्भवः श्रीकण्ठपद- । है। उस पर भो नैशान्धकार-विजड़ित उस चित्ताग्निको लाञ्छनो भवभूतिर्नामजातूकीपुत्रः कविमित्रधेयमस्माकमित्यत्र क्षीणदीप्त प्रभामें गाढ़ अन्धकारमय श्मशानपुरीका दृश्य भवन्तो विदांकुर्वन्तु।" ____x अध्यापक बिल्लसन, आनन्दराम बड्या आदि मनीषियोंने __भवांतकी माता जातुकांगोत्रसम्भूता थीं। जानुकर्या- नाना युक्तियोंसे यह बात प्रमाणित कर दी है । बालरामायण गोत्रसम्भवत्वात् भवभूतिजनयित्री जातुकर्णी इत्यभ्यधायि ।' और प्रचण्डपाण्डव नाटकके प्रणेता राजशेखरने रामचरित्र-रचर्को (उत्तरच. टीका) . का इस प्रकार पौर्वापर्य लिखा है :-- “श्रेष्ठः परमहंसानां महर्षीणामिवाङ्गिराः। "वभूव वल्मीकिभवः कविःपुरा यथार्थनामा भगवान् यस्य ज्ञाननिधि रुः ।" ( वीरच०) ततः प्रपेदे भवि भत्त मेयठताम् । पा वर्तमान घरार प्रदेश। स्थितः पुनर्यो भवभतिरेखया + अब बिदार नामसे प्रसिद्ध है। स वर्त्तते सम्प्रति राजशेखरः ॥" (प्रचण्डपाण्डव)