पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/८१

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फलाहार-फलेपुष्पा ७५ फलाहार ( स० पु०) फलानां माहारः। फलभोजन, भी नहीं होता, बल्कि उसके स्थान पर एक पंक्तिमें कई केवल फल खाना। छोटे छोटे बीज होते हैं। लोग इन्हें खाते नहीं, बच्चे फलाहारी (हिं० पु० ) १ वह जो फल खा कर निर्वाह | हो तरकारी आदिके काममें लाते हैं । प्रायः सभी करता हो। (वि०)२ फलाहार सम्बन्धी, जो केवल फलियां खानेमें पौष्टिक होती है और सूख जाने पर फलोंसे बना हो। पशुओं के भी खानेके काममें आती हैं। फलि ( स० पु०) फल-इन् । मत्स्यविशेष, एक प्रकारकी | फलोकार ( सं० पु०) फल-च्चि-क कर्मणि घन । मछली। इसका मांस भारी, चिकना, बलकारक और फलेच्छा, फलकी कामना। वितुषीकरण। ३ अफल- स्वादिष्ट होता है। का फ्लसम्पादन। फलिका (सं० स्त्री०) फलमस्या अस्तीति फल-ठन्-टाप् । फलीता (अ० पु०) १ बड़ आदिके वररोह या छाल आदि- १ एक प्रकारको निष्पावी जो हरे रंगकी होती है । २ के रेशोंसे वटी हुई रस्सोका टुकड़ा। इसमें तोड़ेदार शरादिका अग्रभाग, सरपत आदिके आगेका नुकोला बन्दूक दागने के लिये आग लगा कर रखी जाती है। २ भाग। वर्ति, बत्ती । ३ पत्ती डोर जो गोट लगाते समय सुन्द- फलित ( स० वि०) फलमस्य जातं अस्त्यर्थे तारकादि- रताके लिये कपड़े के भीतरका किनारा छोड़ कर ऊपरसे त्वादि तच । १ फलवान्, फला हुआ। २ सम्पूर्ण, बखिया की जाती है। पूर्ण। (पु० ) ३ वृक्ष, पेड़। ४ पत्थर-फूल, छरीला। फलीभूत (सं० त्रि०) फलदायक, लाभदायक । फलितव्य ( स० क्लो० ) फल तव्य । जो फलनेके योग्य फलीय (स० वि० ) फल-उत्करादित्वात् चतुरा छ। हो, फलने लायक। १ फलयुक्त, जिसमें फल लगा हो । २ फलसन्निकृष्टादि । फलिन् (सं० वि०) फलमस्यास्तीति फल इनि । फलंदा (हिं० पु०) एक प्रकारका जामुन । इसका फल फलयुक्त वृक्षादि, वह वृक्ष जिसमें फल लगते हों। बड़ा, गूदेदार और मीठा होता है। इसके पेड़ और पत्ते फलिन ( स० त्रि०) फलानि सन्त्यस्येति फल (बहू - भी जामुनसे बड़े होते हैं। मन्यत्रापि । उण २२४८) इति इनच । १ फलवान्, फला फलेप्रहि (सं० पु० ) फलं गृह्णातीति फल-ग्रह ( फलेपहिरा- हुआ। (पु०) २ फलवानवृक्ष, वह पेड़ जिसमें फल लगते मम्भरिश्च । पा ३२२६) इति उपपदस्य एदन्तत्व हो । ३ पनस वृक्ष, कटहल । ४ श्योमाकवृक्ष । ५ रोठा।। प्रहेरिन् प्रत्यश्च निपात्यते। यथासमयमें फलधरवृक्ष. फलिनी ( स० स्त्री० ) फलिन् स्त्रियां डीप। १ प्रियंगु- वह वृक्ष जो उपयुक्त समयमें फलता है। वृक्ष । २ अग्निशिखावृक्ष । ३ मुषली, मूसली। फलेग्राहि (सं० पु० ) फले गृह्णातीति ग्रह इन्, पृषोदरा- ४ लक्षणाकन्द । ५ एलादि, इलायची। ६ द्राक्षासब, दित्वात् वृद्धिः निपातनात् सप्तम्या अलुक् । पास्त्रका बना हुआ आसब। ७ नखकरञ्ज वृक्ष, मेंहदी। फलेग्रहि देखो। ८ लागलीवृक्ष, जल-पीपल। ६ वायमाणा लता । १० फलेच्छुक (स० पु०) १ यक्षभेद । (त्रि०) २ फलकाम। दुग्धिका, दूधी। फलेन्द्र (सं० पु०) फलेन इन्द्रः ऐश्वर्यशालीव वृहत् फल- फली (सं. खो०) फलमस्त्यस्या इति अर्श आदि त्वादेवासा तथात्वं । बृहज्जम्बू, बड़ा जामुन । पर्याय --- भ्योऽच स्त्रियां ङीप् । १ प्रियंगुवृक्ष । २ फलिमत्स्य । ३ नन्द, राजजम्बू, महाफला, सुरभिपना, महाजम्बू । गुण - मुषली, मूसली। ४ चमकषा, चमरखा । ५ आम्रातक | स्वादु, विष्टम्मी, गुरु और रुचिकर। वृक्ष। अमला। ६ फलयुक्त वृक्षादि, वह वृक्ष जिसमें फलेपाको (सस्त्री० ) गन्धमुस्त, गधमुस्ता । फल लगते हो। ७ श्योनाक। ८ पनस, कटहल। फलेपुष्पा (सं० स्त्री० ) फले फलमुखे पुष्पं यस्या, फली ( हि० स्त्री०) छोटे छोटे पौधों में लगनेवाले एक सप्तम्या अलुक् । क्षद्र क्षपविशेष, गूमा । पर्याय-गुरु, प्रकारके फल ये लम्बे और चिपटे होते हैं। गूदा कुछ खादु, रुक्षा उष्ण, वातपित्तकारक, क्षार, लवण, स्वादुपाक,