पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/८६

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फाड़ना-फानूस फाडनेसे निकले। २ दहीके ताजे मक्खनकी छांछ जो फामना (हिं. क्रि०)१ सईको फटकना, धुनना । २ आग पर तपानेसे निकले। । अनुष्ठान करना, कोई काम हाथमें लेना। फाड़ना (हिं० कि० ) १ किसी पैनो वा नुकीली चीजको फानूस (फा० पु.) १.एक प्रकारका दीपाधार। इसके किसी सतह पर इस प्रकार मारना या खींचना, कि चारों ओर महीन कपड़े या कागजका मंडप-सा होता सतहका कुछ भाग हट जाय या उसमें दरार पड़ जाय, है। २ समुद्रके किनारेका यह उच्च स्थान जहां रातको चीरना।२किसी गाढ दव पदार्थको इस प्रकार करना, इसलिये प्रकाश जलाया जाता है. कि जहाज उसे देख कि पानी और सार पदार्थ अलग अल। हो जाय। कर बंदर जान जाय। ३शीशेकी मृदंगो, कमल वा ३ खण्ड करना, टुकड़े करना । ४ सन्धि या जोड़ फैला गिलास आदि जिसमें बत्तियां जलाई जाती हैं। ४ ईटों कर खोलना। आदिकी भट्ठी । इसमें आग सुलगाई जाती है और उसके फाणि ( सं स्त्री० ) गुड़। तापसे अनेक प्रकारके काम लिये जाते हैं। फाणित (सं० क्ली०) फण-गती-णिच क्त । १ अर्धा- फांसफाड़ी-दाक्षिणात्यवासी एक नीच जाति। शोला- वत्सित इक्षरस, आंट पर औटा कर खूब गाढ़ा किया । पुर बीजापुर आदि अञ्चलोंमें इनका बास है। किन्तु कोई हुआ गन्नेका रस, राब। इसका गुण--गुरु, अभिष्यन्दी, भी घेर बांध कर अथवा खेतोबारी करके स्थायी रूपसे हण, कफ और पित्तकारक, वात, पित्त और श्रम- नहीं रहता। फंदेसे पशुपक्षी पकड़ना ही इनका जातीय नाशक एवं मूत्र और वस्ति शोधक माना गया है। व्यवसाय है । ये लोग नीच प्रकृतिके होते हैं, कभी भी सौभाग्यकामी व्यक्तिको पूर्वफल्गुनी नक्षत्रमें उपवास सिरके वाल या मूंछ दाढ़ी नहीं मुड़वाते हैं । इनकी करके ब्राह्मणोंको भक्षाव्य फाणित संयुक्त करके पान भाषामें गुजराती, मराठी, कणाड़ी और हिन्दुस्तानी भाषा करना चाहिये। २ शीरा। मिश्रित है। फाएट ( स० लि. ) फण्यते स्मेति फण-गतौ तुन्ध गांवके बाहर ये साधारणतः झोपड़ी बना कर रहते स्यान्तवान्तेति । पा १८ ) इति निपातनात् साधुः।। और गो, महिष, छाग तथा गर्दभ आदि पोसते हैं। ये १ अनायास कृत, जो सहजमें बनाया गया हो । (क्लो०)२ स्वभावतः मद्यमांसप्रिय, क्रोधी और निष्ठुर हैं। छोटी कषायभेद । इसकी प्रस्तुत प्रणाली-एक पल कुट्टितष्य- . बातोंमें उत्तेजित होते और बदला लिये बिना उसका को ४ पल गरम जलमें डाल कर कुछ समय तक ढंक : । पिण्ड नहीं छोड़ते हैं। घोड़े की पूंछके रोएंसे ऐसा रखे। पीछे उसे मृदित और वस्त्र पूत कर ले। इसीका फदा बनाते हैं, कि उससे सब प्रकारके पक्षी और छोटे नाम फाण्ट है। (वयकपरिभाषा) छोटे पशु पकड़े जा सकते हैं। फाण्टाहत (स० पु०) १ फाण्टा-हृतिका अपत्य । २ उनके ये लोग अम्बाभवानी, खण्डोवा, जरिमरि और नाना छात्रादि। प्राम्यदेवताकी पूजा करते हैं । 'सिंगा' और 'दशहरा' ही फाण्टाहतायन (स.पु) फाण्टाहतिका अपत्य । इनका प्रधान उत्सव है। विवाहमें कन्याकी मांगमें सिन्दूर फाण्ड (सं० क्ली० ) गर्भ। और शरीरमें नई चोली पहनाते हैं। इस समय दलके फाण्डिन् (स० पु० ) नागभेद । सरदार ( नायक )को उपस्थित रहना जरूरी है, क्योंकि, फातहा-दवाज-दहुम-सुन्लोसम्प्रदायका अनुष्ठित महोत्सव- उसे भी कुछ मिलता है । सभी खजातीय विवाहके विशेष । इस समय वे लोग महम्मदके जन्म और मृत्यु- बाद खूब शराब पीते हैं। सम्बन्धनिर्णय या बात पक्की के उपलक्षमें मसजिद् अथवा अपने अपने घरमें मौलूद- हो जाने पर विवाहके दिन घरकन्या एकत्र की जाती है। शरीफका पाठ और भजन करते हैं। गांव ब्राह्मण आ कर 'गाठ बांध देते और मन्त्रोचारण फातिहा (अ० पु०) १प्रार्थना। २ वह चढ़ाया जो मरे करते हैं। विवाह हो जाने पर ब्राह्मण दक्षिणा ले कर हुए लोगोंके नाम पर दिया जाय। । दम्पतीको आशीर्वाद दे चले जाते हैं। पीछे भोज शुरु