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केन्दुविल्वग्राम (केंदुली) है। इसी जगह जयदेवके कृष्णचन्द्र श्रीराधिकाके पैर पकड़े आंखोंसे आंसू बहाते जाते थे- "प्रिय चारुशील मुञ्च मयि मानमनिदानम् ।"
ग्रीष्मकालमें अजयनदके बीच जल नहीं रहता। केवल बालू छायापथकी तरह चमका करती है। बालूके ऊपर जगह-जगह छोटे-छोटे झरने अपने मनोहर शब्दसे आकाशको मुखरित करते हैं। वर्षाकाल अानेसे दुकूल उमड़ पड़ते हैं, ग्राम भूमि समस्त डूब जाती है। इसीलिये स्थान-स्थानमें ऊंचे ऊंचे बांध बंधवा दिये गये हैं। अजयपाल (सं० पु०-क्लो०) १ रागविशेष । २ कनौजके एक नृपति का नाम।३ जमालगोटा। अजया (स. स्त्री०) नास्ति जयो मादकत्वेन अस्याः । १ विजया। भांग, बूटी। (हिं०) २ बकरी। अजय्य (सं० वि०) न-जी-यत् शक्यार्थे, नञ्-तत्। दुर्जय, जीतने के अयोग्य। अजर (स० त्रि०) नास्ति जराऽस्य । १ पौड़ाशून्य । २ वार्धक्यशून्य। ३ भारौ, जो पचाया जा न सके । अजरक ( स० क्लो०) अजीर्ण, बदहजमी । अजरन्ती (वै० स्त्री०) न जोर्यंतीं जरारहितां। बुड्ढों न होनेवाली, सदा तरुण बनी रहनेवाली।( वाज० स० २१४५) अजरयु (वै. वि.) बुड्ढा या नष्ट न होनेवाला। अजरस् (वै० वि० ) १ पीड़ाशून्य। २ वाईक्यशून्य।३ गरिष्ट, मुक़व्वी। अजरा (सं० स्त्री०) नास्ति जरा अस्याः। घृतकुमारी, घोकुआर। घृतकुमारी वृक्ष कभी सूखता नहीं, इसीलिये इसका नाम अजरा पड़ा है। अजराज (सं० पु०) अजोंके राजा या बादशाह । ऋग्वेदके एक मन्त्र में लिखा है, कि सुसादको अध्यक्षतामें तृत्सुसोंने अजोंको हराया था। अजरायल (हिं० वि०) अजर, जो कभी पुराना न हो। सदावसन्ती। सदाबहार। अजराल (हिं० वि०) जो बुड्ढा या पुराना न हो। शक्तिशाली। ताकतवर।
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अजर्य (सं० क्लो०) न-जृ-यत् सङ्गमने कर्तरि निपात्यते ; न जोर्यतीत्यजयम् । अजर्य सङ्गतम्। पा ॥१॥१०५। अजर्षभ (व पु०) सबसे अच्छा बकरा। अजलम्बन(स० क्लो०) अजलम्ब-ल्युट, अज इब लम्बते गृह्यते । स्रोतोञ्जन, रसाञ्जन, सुरमा। अजलोमन्, अजलोमा (सं० पु०) अजस्य लोम इवलोम यस्य, बहुव्री०। १ केंवाच । २ जिसके शरीर में बकरेके से बाल हों। इस शब्दके पर्याय यह हैं-गोशिष और शिखौ, केशी, महाइस्खा और अग्रपर्णी । अजवल्ली (सं० स्त्री० ) मेढ़ासींगी। अजवस् (सं० पु०)न जवस, जु-असुन्।वेगशून्य। जकै एक नृपतिका नाम । ३ जमालगोटा। अजवस्ति (हिं० पु०) अजस्य वस्तिरिव वस्तिर्यस्य ।ऋषिविशेष। अजवाइन, अजवायन (हिं० स्त्री०) यवानिका,यवानी।एकप्रकारका औषध। अजवाह (सं० पु०) अजं वाहयति यद्देशम्, अजवह-घञ् अधिकरण। देशविशेष । अजवोथी (सं० स्त्री०) अजा अजाता नित्यकालव्यापिनी इति वा वोथि नक्षत्राणां श्रेणी, कर्मधा० ।छायापथ, हाथोकी राह। आकाशके उत्तर-दक्षिण-व्यापिनी नक्षत्रमाला। अजशृङ्गिका, अजशृङ्गी (सं० स्त्री०) अजस्य मेषस्य शृङ्गमिव फलं यस्याः, बहुव्री० । मेढ़ासींगी। इसके पर्याय यह हैं-विषाणो, विषाणिका, चक्रश्रेणी,अजगन्धिनी, मौर्वी, नेत्रौषधि, आवर्तिनी, वर्तिका,सर्पदंष्ट्रिका, चक्षुष्या, तिक्तदुग्धा, पुत्रशृङ्गी और कर्णिका। यह गुणमें कटु और तिक्त होती है।इससे कफ, अर्श, शूल, शोथ, खास, हृद्रोग, विषरोग,कास, कुष्ठ, प्रभृति पोड़ायें नष्ट हो जाती हैं। अजश्री (सं० स्त्री०) फिटकरी। अजस (हिं० पु.) अजशः, अख्याति, बदनामी। अजसी (हिं० वि०) अख्यात, बदनाम। अजस्तुन्द (वै० क्लो०) नगरविशेष, वेदोक्त एक शहरका नाम। |
पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/२०६
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अजयपाल-अजस्तुन्द