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अजूरा—अज्ञातवास
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अजूरा (हिं० वि०) १ न इकट्ठा किया हुआ, अगृहीत। २ न मिला हुआ, अप्राप्त। ३ गैर-हाजिर, अनुपस्थित। ४ अलग, पृथक्; जुदा, भिन्न।
अजूह (हिं० पु०) युद्ध, जङ्ग; लड़ाई-भिड़ाई।
अजे — अजय देखो।
अजेइ — अजेय देखो।
अजेतव्य (सं० त्रि०) जो जीता न जा सके, अजेय।
अजेय (सं० त्रि०) न-जि-यत। अजेतव्य, जय के अयोग्य, जो जीता जा न सके; फ़तह के नाक़ाबिल।
अजै — अजय देखो।
अजैकपाद (सं० पु०) अजस्य छागस्य पाद इव एकपादो यस्य। १ रुद्रविशेष। २ शम्भु। ३ वीरभद्र। ४ पूर्वभाद्रपद नक्षत्र।
अजैडक (सं० क्ली०) भेड़-बकरा।
अजोग — अयोग्य देखो।
अजोता (हिं० पु०) चैत्र की पूर्णमासी, जिस दिन बैल नहीं जुतते।
अजोरना — अंजोरना देखो।
अजोष (वै० त्रि०) असन्तुष्ट, नाराज़।
अजोष्य (वै० त्रि०) सन्तुष्ट होने के अयोग्य, आसूदा होने के नाक़ाबिल।
अजौं (हिं० क्रि०-वि०) आज भी, अभी तक; अद्यापि, अद्यावधि।
अज्जका (सं० स्त्री०) अर्जयति या सा। अर्जि-उक्, पृ० रकारस्य जत्वम्। नाट्योक्त वेश्या, नाटक की रण्डी।
नाट्यादन्यत्र प्रयोगे नास्तीत्यर्थः (महेश्वरः)। अज्झटा (सं० स्त्री०) अजति दोषं क्षिपति, अज-क्विप्; झटति संहन्यते, अज-झट-अच्। भूम्यामलकी, पानी आँवला। यह आसाम, बङ्गाल, ब्रह्म, बम्बई और पश्चिम घाट का एक छोटा वृक्ष है, जिसकी कृषि साधारणतः भारत में की जाती है। इसके बीज से तेल निकलता, किन्तु उसका प्रयोग अज्ञात है। इसकी पत्ती और नई डाल को लोग गरिष्ठ और कसैली बताते और संग्रहणी, धातुक्षीणता और क्षयरोग में खिलाते हैं। पित्त बिगड़ने से इसका फल भी लाभदायक होता है। मैसूर में इसकी
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पत्ती बिका करती है। इसका फल बैंजनी बेर जैसा होता और वर्षाऋतु के समय ढाके के बाज़ार में बिकने आता है। आसाम में भी लोग फल को खाद्य-स्वरूप व्यवहार करते हैं। इसकी लकड़ी भारी, भूरी और कड़ी होती है और रन्दा फेरने से खूब चमकने लगती है।
अज्झल (सं० क्ली०) अञ्चति क्विप्-अक्; हलति विलिखति, हल-अच्; कर्मधा०। ढाल, फलक।
अज्ञ (सं० त्रि०) न जानाति, ज्ञा-क। स्यादज्ञो जड़-मूर्खयोः (मेदिनी)। मूर्ख, ज्ञानशून्य; बेवकूफ़, बेइल्म। सहज विषय भिन्न कठिन तत्त्व में जिसका बोध प्रविष्ट नहीं होता, प्रायः जो लिखना-पढ़ना नहीं जानता, समाज के मध्य में जो अच्छी तरह बातचीत नहीं कर सकता और जो किसी विषय का सिद्धान्त करने में अक्षम है, उसे ही हम अज्ञ कहते हैं।
अज्ञका, अज्ञिका (सं० स्त्री०) बेसमझ स्त्री, भोली-भाली औरत।
अज्ञता (सं० स्त्री०) मूर्खता, बेवकूफ़ी।
अज्ञत्व (सं० क्ली०) बेसमझो, नादानी।
अज्ञात (सं० त्रि०) न-ज्ञा-त। १ अपरिचित, जाना हुआ नहीं। २ ज्ञान का अविषयीभूत, अक्ल से बाहर।
अज्ञातक (सं० त्रि०) बेजाना, नावाकिफ़।
अज्ञातकुलशील (सं० वि०) जिसका कुल मालूम न हो, बेजाने-बूझे खानदान का।
अज्ञातकेत (वै० त्रि०) गुप्तभेदी, पोशीदा राज़ वाला।
अज्ञातनामा (सं० त्रि०) जिसका नाम ज्ञात न हो, नामालूम इस्म का।
अज्ञातभुक्त (सं० त्रि०) बेजानी चीज़ खाने वाला।
अज्ञातयक्ष्म (वै० पु०) रोगविशेष, राजयक्ष्मा।
अज्ञातयौवना (सं० स्त्री०) ज्ञान न रखने वाली मुग्धा, चढ़ती जवानी को न पहचानने वाली नई औरत।
अज्ञातवास (सं० त्रि०) जिसके रहने की जगह जानी न हो।
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