|
अज्ञातशील ( सं० त्रि० ) जिसको चाल मालूम न हो, बेजाने चालचलनवाला । |
अज्यू (वै० त्रि० ) १ खेतका । २ मैदानवाला । अज्विन् (सं० त्रि० ) तेज़, चालाक । अज्ञात (सं० पु० ) असम्बन्धीय पुरुष, बेरिश्ता अमर (हिं० वि०) न भरनेवाला, और नाता ।}} पतनशून्य, न बरसनेवाला । १ विना अभोरो (हिं० स्त्री० ) थैली, अधारी । अञ्चक(सं० क्क़ी ० ) नेत्र, आंख ।
अञ्चति
(सं० पु० -क्ली०) अनच्-अति । अच को वा । उय् ४।६१
अञ्चल (सं० पु० ) अञ्च- अलच् । आंचल, प्रान्तभाग, दामन । कपड़ेकौ जिस ओर बेल-बूटे और किनारीका अधिक सौन्दर्य रहता, उसे आंचल या अंचला कहते हैं। इस देशको स्त्रियोंके वस्त्रों में ही आंचल होता है। पुरुषोंके वस्त्रोंका भी प्रान्तभाग है, परन्तु उसे चल नहीं कहते । est गृहिणी स्त्रियोंके चल लथेरते-लघेरते चलनेको बड़ा कुलक्षण समझती हैं । स्त्रियोंको ऐसा विश्वास है, कि भूतप्रेतादि कपड़े का आंचल पकड़ शरीरमें प्रवेश करते हैं ।
अञ्चलका अपभ्रंश आंचल या अंचला है। प्रतिमाको सज्जित करते समय जो डङ्गका गहना देवीको छातीपर लटका दिया जाता, उसे भी प्रांचल कहते हैं । नया कपड़ा जब कितनी हो उड़िया, बङ्गाली और विहारी स्त्रियां पहनतीं, तब अचलका एक कोना हलदोसे रंग लेतीं और आंचलका कुछ सूत खोल और टुकड़े-टुकड़े कर कांटे, खोंचे, चोर और अग्नि प्रभृतिको समर्पण करती हैं । इसका तात्पर्य यह है, कि कांटा प्रभृति समस्त शत्रुओंका अंश दिया गया, इस- लिये आगे कोई अनिष्ट न करेगा। जब भाग दे दिया गया, तब कांटा उसे क्यों छेदेगा या अग्नि ही उसे क्यों जलायेगी ? कोई बात मनमें बनाई रखनेके लिये स्त्रियां आंचल के एक कोने में गांठ लगा देती हैं । बालकोंके माथे में कपड़े का आंचल लगने- से अकल्याण होता है । इसलिये हठात् किसी शिशुके माथेमें आंचल छू जानेसे एकबार उसे मट्टोमें लथेरना पड़ता, जिससे सब दोष दूर हो जाता है । विवाहमें कन्याका आंचल और वरका दुपट्टा गांठ देकर जोड़ दिया जाता है । |
पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/२१७
दिखावट
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।
२११
अज्ञातशोल-अनंच्ल