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इस शापसे धर्मराजने विदूर रूपमें शूद्रयोनिसे जन्म ग्रहण किया था । अणीय—अणीयस् देखो ।
अणीयस् (सं० त्रि०) अणु-इयसुन् । अतिसूक्ष्म, अणुतर । निहायत बारोक, बहुत झीना ।
अणु (सं० त्रि० ) अण्-उण् ।अणश्च । उण् ११८ । 'लवलेश- कणाणवः' - इति उज्ज्वलदत्तः । १ सूक्ष्म, बारीक । २ क्षुद्र, छोटा । ३ लेश, घोड़ा । ४ अदृश्य । ( पु० ) ५ धान्य, धान । ६ कण, जरा। ७ सङ्गीतशास्त्रको मात्रा- विशेष, अणुमात्रा ।
"इदम् वा अग्रे नैव किञ्चिदासीत् । आसोदेकमेवाद्दितीयम् ।” 'इस जगत्को सृष्टिसे पहले एकमात्र अद्वितीय परब्रह्मके भिन्न और कुछ भी न था ।' अतएव जो ईश्वरको सर्वस्रष्टा और सर्व नियन्ता बताना चाहते, उनके मतसे परमाणु नित्य हो नहीं सकता । चार्वाक और बौद्धमतावलम्बी भी पर- माणके अस्तित्वको स्वीकार करते हैं । किन्तु वैदान्तिक परमाणुको नित्य नहीं समझते। उन्हें यही विश्वास है, कि कोई ज्ञानरूप पदार्थ विद्यमान है। पाशुपत - दर्शन-शास्त्रवेत्ता भी कहते हैं, कि परमाणु नित्य नहीं । समस्त सृष्टि महेश्वरकी रची है । परमाणुको नित्य और अजन्य माननेसे ईश्वर के कर्तृत्वमें दोष लगता है। अब बात यह है, कि क्या सचमुच परमाणु विद्य मान है। बहुकाल से इस विषयका कितना ही विचार हो रहा हैं, किन्तु सन्देह नहीं मिटता । समस्त हो वस्तु विभक्त को जा सकती हैं। विभाग |
करते-करते जब एक-एक अंश इतना सूक्ष्म हो जाता, कि किसी फिर तरह उसका विभाग नहीं होता, तब उस सूक्ष्म अंशको परमाणु कहा करते हैं । परमाणुतत्त्ववादी स्वीकार करते हैं, — सकल वस्तुओंके हो ऐसे सूक्ष्म कणा विद्यमान हैं, कि फिर किसी क्रमसे उनका विभाग नहीं होता । किन्तु यह मत अन्य सम्प्रदायसे विपरीत है । उन लोगोंका कहना है, कि देखनेके लिये उपयुक्त यन्त्र रहने और काटने या विभाग करनेके लिये सुतीक्ष्ण यन्त्र होने से जगत्में ऐसी सूक्ष्म कोई वस्तु नहीं, जो देखी या विभक्त को जान सके । अतिसूक्ष्म परमाणुको भी चिरकाल तक असंख्य भागों में विभक्त किया जा सकता है । सुतरां परमाणु कोई नित्य वस्तु नहीं । एक लोटेमें थोड़ी सी शक्कर डाल दो, समस्त जल मीठा हो जायेगा । इस स्थल में शक्कर अत्यन्त सूक्ष्म- सूक्ष्म अंशोंमें विभक्त हुआ करती है । फिर उसी लोटेके जलको बड़े घड़े के जलमें मिलाने से समस्त जलमें शक्कर घुल जाती है । इसके बाद समुद्र- प्रमाणजलमें वह घड़े-भर जल डाल देनेसे अनुमान द्वारा यही सिद्ध होता, कि समस्त समुद्रके जलमें शक्करको मिठास मिश्रित हो सकती इसोसे कोई-कोई पण्डित कहते हैं,— सकल द्रव्य हो इच्छानुसार सूक्ष्म-सूक्ष्म अंशोंमें विभक्त किये जा सकते हैं, इस विभागका कोई अन्त नहीं। इसलिये पदार्थ के किसी अंशको परमाणु बताना विवेचनासङ्गत नहीं । किन्तु परमाणुवादी इस बातको स्वीकार नहीं करते । वह कहते हैं—किसी वस्तुको क्षुद्र अंशों में विभाग करनेसे अन्तमें ऐसा सूक्ष्मांश आ जाता, कि फिर उसका विभाग नहीं होता । आजकल के -वैज्ञानिक पण्डितोंमें भी अनेकोंका यही मत है । नाना भांतिको वैज्ञानिक और रासायनिक परीक्षाओं द्वारा इसके सम्बन्धमें उन्होंने अनेक प्रमाणोंको संग्रह किया है । इन समस्त प्रमाणोंसे जो सकल वैज्ञानिक सूत्र आविष्कृत हुए, उन्हें परमाणुतत्त्व ( Atomic theory ) कहते हैं। किन्तु इस नूतन शास्त्रका मूल परमाणु नहीं; अणु ( molecule ) ही इसका |
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अणौय—– अणु