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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/३१

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अकबरपुर—अकरास
४६ वर्षों का हाल लिखा है। तीसरा खंड, आईन–इ अकबरी है। अकबरके शासनकालके जो कुछ ज्ञातव्य विषय हैं, वह सभी इस खण्डमें पाये जाते हैं।
अकबरपुर—२४ परगनेके अन्तर्गत एक परगनेका नाम। मालदहमें अकबरपुर नामका एक परगना है। उसका स्थूल क्षेत्रफल १४ वर्ग मील है। इस परगनेमें पच्चीस जमीन्दार हैं, दो नदियाँ बहती हैं; एक ओर गङ्गा और दूसरी ओर कालिन्दी; इनके अतिरिक्त कङ्कर, गोबरा, गौरैंया, धर्म्मादौला, कोसिका और काप नामकी कालिन्दीकी कई शाखायें भी इस परगनेमें हैं। वर्षामें यह नदियाँ खूब भर जाती हैं। इसमें प्रधान नगर हतायपुर है। सुलतानगञ्ज, हरिश्चन्द्रपुर, भेगाल, भलुकराई, केदारगञ्ज, देवोपुर और कमलपुर गाँवोंमें प्रति सप्ताह बाज़ार लगती है।
अकबर-बन्दर—रंगपुर ज़िलेके अन्तर्गत एक स्थानका नाम है। यह तिष्टा नदीके तटपर बसा है। यहाँ तम्बाकू और पाटका अच्छा व्यवसाय होता है।
अकबरशाही—वीरभूमि ज़िलेके अन्तर्गत शन्सल या सुरुलका प्राचीन नाम। सुरुल देखो।
अकबराबाद—मालदहके अन्तर्गत एक परगनेका नाम है। इसका विस्तारकोहि १४ वर्ग मील है। इस परगनेमें तीन ज़मीनदार हैं। इस परगनेकी भूमि खूब उपजाऊ है। खेती बहुत अच्छी होती है; जलवायु भी स्वास्थ्यके लिये अच्छा है।
वर्त्तमान आगरा शहरका नाम भी अकबराबाद है। यह शहर पहिले यमुनाके उस पार था, परन्तु सम्राट् अकबरने यमुनाके पश्चिम तटपर यह नवीन नगर बसाया। प्राचीन आगराका चिन्ह अभीतक वर्त्तमान है। आगरा देखो।
अकबरी (स्त्री॰) एक प्रकारकी फलहारी मिठाई। यह तीखुर और उबाली हुई अरुईको घीके साथ फेंटकर टिकियाके रूपमें बनाई जाती है और फिर घीमें तलकर चाशनीमें पागी जाती है। लकड़ीपर-की एक प्रकारकी नक्काशी, जिसका व्यवहार पञ्जाबमें विशेषकर होता है। सहारनपुरके कारखानोंमें भी इसका अच्छा चलन है।

अकबरी अशरफी। अकबरके समयका एक सोनेका सिक्का, जिसका मूल्य पहिले १६) था, पर अब २५) हो गया है।
अकबा (सं॰ त्रि॰) न कव्यते वर्ण्यते (वैदिक शब्द) जो वर्णन न किया जा सके।
अक़बाल (पु॰) (इक़्बाल शब्द देखो।)
अकर (सं॰ वि॰) दुष्कर। न करने योग्य। कठिन। विकट। बिना हाथका। बिना कर या महसूलका
अकरकरा (हिं॰ पु॰) यह पौधा अफ्रिकाके उत्तर अलजीरियामें बहुत होता है। इसकी जड़ कामोद्दीपक और पुष्टि करनेवाली होती है। इससे मुँहमें थूक आता और दांतका दर्द भी अच्छा हो जाता है।
अकरखना (हिं॰ क्रि॰ [सं॰आकष्टेण] खींचना। तानना। चढ़ाना।
अकरण (सं॰ पु॰) कर्मका अभाव। न किये हुएके समान कर्मका फल होना। सांख्य शास्त्रके मतसे सम्यक ज्ञान प्राप्त हो जानेपर फिर कर्म्म अकरण अर्थात् बिना किये हुएके समान हो जाते हैं और उनका फल कुछ भी नहीं होता। इन्द्रियोंसे रहित ईश्वर।

कर कुठार मैं अकरन कोही। आगे अपराधी गुरुद्रोही।तुलसी।

न करने योग्य। कठिन या असम्भव कार्य्य।
रीती भरै, भरी ढरकावै अकरन करन करै।सूर।

अकरणीय (सं॰ वि॰) न करने योग्य।
अक़रब (अ॰ पु॰) जिस घोड़े के मुँहपर सफेद रोएँ हों और उनके बीच-बीचमें दूसरे रंगके रोएँ भी हों, वही अक़रब कहलाता है। ऐसा घोड़ा ऐबी समझा जाता है।
अकरा (हिं॰ वि॰) न मोल लेने योग्य। महँगा। कीमती। उत्तम। "नाम प्रताप महा महिमा अकरे किये खोटेउ छोटेउ बाढ़े।" तुलसी।
अकराथ (हिं॰ वि॰) व्यर्थ। निष्फल। बेफायदा। "आपा राखि प्रबोधिये, ज्ञान सुने अकराथ।" कबीर।
अकराल (सं॰ वि॰) सौम्य। सुन्दर। अच्छा। जो भयावना न हो।
अकरास (हिं॰ पु॰) अगड़ाना। देहका टूटना। आलस्य। सुस्ती।