|
इसका रङ्ग एकसा नहीं होता, गहरी सुखी लिये भूरे या काकरेजीसे बिलकुल काला पड़ जाता है। साधारणतः इसकी दज भद्दी और मोमदार होती और किनारोंपर भी प्रायः पूर्ण रूपसे मेली रहती है। जब इसमें चिकनी और चमकदार दर्ज दिखलाई देती है, तब इसे बहुत अच्छा समझते हैं। इसका सुगन्ध अग्राह्य और घृणोत्पादक है। रासायनिक प्रक्रिया द्वारा इसका रङ्ग बना,रेशमको बैंजनी, ऊनको काला और नैको गुलाबी रंगते हैं। इसका जो भूरा रङ्ग गन्धकके तेज़ाबसे तैयार होता, वह चमकीला और पक्का रहता, तथा दूसरे रङ्गको अपेक्षा उसमें खर्च भी कम लगता है। पत्तोमें खूब रेशा होता है। उसे निकाल लेने के पश्चात् पत्ती फेंक दी जाती है। यदि रेशा भी किसी काममें लाया जाये, तो बहुत लाभ हो सकता है। इसका गाढ़ा रस रेचक है और मिरगीके रोगियों को बड़ा लाभ पहुंचाता है। पत्तोका ताजा रस दस्तावर, ठण्डा और ज्वर, यकृत्, हृद्रोग तथा पञ्छेदार गांठमें लाभदायक है, एवं कुछ आंखको बीमारियों में उपरसे भी लगाया जाता है। पञ्चीका गोंद लोग। फोड़ेपर व्यवहार करने और योनिके लिये प्रभावोत् पादक तथा मासिक धर्मके लिये भी लाभदायक बताते हैं। पशुओंके औषधमें भी यह बहुत काम आता है। इसकी जड़ पेटके दर्दको अकसोर दवा है । (त्रि०) २ खण्डभिन्न, जो टुकड़े-टुकड़े न हो। अदला-बदली (हिं० स्त्री०) लेन-देन, ओतप्रोत । अदलो (हिं. वि०) १ इनसाफी, न्यायो, सुविचार करनेवाला। २ पत्रविहीन, जिसमें पत्ती न हो। अदवाइन, अदवान (हिं. स्त्रो०) ओनचन, रस्सी जो खाटकी करधनीके पैताने, छेदोंमें डाल, पाटीपर खींचकर बुनावट कड़ी रखने के लिये बांधते हैं। अदशन् (स. त्रि.) दश नहीं। अदशमास्य (स.वि.) दश मासका पुराना नहीं, जो दश महीनेका न हो। |
अदंश (सं० पु०) महामूलक, बड़मूला । अदःकृत्य (सं० अव्य०) उसे करके । अदम् (त्रि.-सर्व०) न-दस-क्किए, न दस्यते निर्देशाय उत्क्षिप्यतेऽङ्गुलियंत्र, अपुरोवर्तित्वात् । (वाच०) १ वह। कोई वस्तु जो सम्मुख न हो, उसे बतानेके लिये यह सर्वनाम प्रयुक्त होता है। जिस स्थलमें वस्तु वक्ताके सामने नहीं रहतो अर्थात् जब वह उसे अङ्गलि द्वारा निर्देशकर बता नहीं सकता, उस स्त्रलमें यह सर्वनाम लगाया जाता है,- {{Block center।“इदमस्तु सन्त्रिकष्ट' समोपवर्ति चैतदोरूपम् । 'निकटको वस्तु बतानेको 'एतद्' सर्वनामकी तरह 'इदम्' सर्वनामका प्रयोग होता है। फिर दर्शनातीत वस्तु बतानेको तद्' सर्वनामको तर अदस् शब्द लगता है। 'यह (अयं) वृक्ष है' कहनेसे समझा जायेगा, कि वृक्ष वक्ताके पास ही है, और वह उसे अङ्गुलि द्वारा दिखा सकता है। फिर 'वह (असो) वृक्ष है' कहनेसे समझ पड़ेगा, कि वृक्ष वक्ताके सामने नहीं। (अव्य०) २ इस प्रकार, ऐसे, यों। ३ सदा, हमेशा। अदहन (हिं० पु०) पानी जो बरतनमें भरकर आग पर दाल या चावल उबालेने को चढ़ाते हैं। अदा (अ० स्त्री०) १ हावभाव, नखरा। २ प्रकार, ढङ्ग। (त्रि.) ३ समर्पित, दिया हुआ। अदांत (हिं० वि०) दन्तविहीन, बेदांत । अदाई (हिं० वि० ) १ भावगर्भ, चालबाज ।
अदाक्षिण्य (सं० लो०) १ अक्तपा, नामहरबानी। २ बर्बरता, सख़्तो। अदाग, अदागी (हिं० वि०) १ चिह्नरहित, बेदाइ। २ निर्मल, साफ । ३ निष्कलङ्क, खुशनाम । ४-निर्दोष, ३ऐब। ५ पवित्र, पाक। अदाता (सं० पु.) १ न देनेवाला पुरुष, आदमी |
पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/३२६
दिखावट
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
३१९
अदला-बदली -अदाता