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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/३४३

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अदेवक—अड्डा
अदेवक (सं॰ वि॰) देवतासे सम्बन्ध न रखने वाला, जो देवताके लिये न रखा गया हो।

अदेवता (सं॰ स्त्री॰) जो देवी न हो, निशाचरी।

अदेवत्र (सं॰ त्रि॰) न देवान् त्रायते प्रीणाति अनेन, त्रै-क करणे। देवताओंको असन्तुष्ट करनेवाला, जिससे फ़रिश्ते नाराज़ हो जायें।

अदेवमातृक (सं॰ पु॰) न देवमातृकः, नञ-तत्। देवमातृक-भिन्न देश, नदीमातृक देश, वह मुल्क जिसमें खेती दरयाके पानीसे सींची जाये।

अदेवयत् (वै॰ त्रि॰) देवताओं से अश्रद्धा रखने-वाला, धर्महीन।

अदेवयु (वै॰ त्रि॰) न देवं याति आप्नोति, देव-या-कु। देवयुधार्मिकः, इति उज्वलदत्तः। अधार्मिक, देवताको न पानेवाला।

अदेवराजा—तुलुब, अन्ध्र या तेलिङ्गका राजगण। इन राजाओंमें प्रतापरुद्रका राजकाल सन् ११६२ ई॰ था। इनसे पहले उन्नीस अदेव राजाने तीन सो साठ (३६०) वत्सर (२११?) राजत्व किया, अट्ठारह जन अन्ध्रवंशोद्भव होनेसे अनुमित हुए थे। इनमें श्रीरङ्गने सन् ८०० ई॰ के समय सिंहासनकी शोभा बढ़ाई। Prinsep's Indian Antiqnities, p. 278.

अदेवृघ्नी (वै॰ स्त्री॰) अपने देवर या ननदोईको नष्ट न करनेवाली स्त्री।

अदेश (सं॰ पु॰) न देशः, नञ् तत्। मन्ददेश, अयोग्य स्थान, म्लेच्छ देश, बुरा मुल्क। प्रदेशमें श्राद्ध तर्पणादि दैवक्रिया न करना चाहिये। स्मृति में लिखा है,—"नादेशे तर्पणं कुर्यात् न सन्ध्रां नापि पूजनम्।"

अदेशकाल (सं॰ क्ली॰) अयोग्य देश और समय, बुरा मुल्क और ज़माना।

अदेशज (सं॰ ति॰) कुत्सित देशमें उत्पन्न हुआ, जो बुरे मुल्क में पैदा हो।

अदेशस्थ (सं॰ वि॰) १ बुरे देशमें रहनेवाला। २ अपने देशसे अनुपस्थित।

अदेश्य (सं॰ त्रि॰) आज्ञादेने, मन्त्रणा सुनाने या कुछ समझाने के अयोग्य। २ अनुपस्थित, मौक़े से ग़ैरहाज़िर।

अदेस (हिं॰) आदेश देखो।

अदेह (सं॰ त्रि॰) १ शरीररहित, बेजिस्म। (पु॰) २ कामदेव, पञ्चवाण।

अदैव (सं॰ क्ली॰) न दैवं वैश्वदेविक श्राद्धम्, नञ्-तत् अभावार्थे। वैश्वदेविक श्राद्धभिन्न अन्य श्राद्ध, नित्यश्राद्ध। (त्रि॰) नास्ति दैवं वैश्वदेविक श्राद्धमत्र, बहुव्री॰। २ वैश्वदेविक श्राद्धशून्य। ३ दुर्भाग्ययुक्त।

अदोख (हिं॰) अदोष देखो।

अदोखिल (हिं॰ वि॰) १ दोषरहित, वेऐब। २ निष्कलङ्क, जो बदनाम न हो।

अदोग्धृ (सं॰ त्रि॰) दूध न देनेवाली।

अदोमद (वै॰ त्रि॰) क्लेश न देनेवाला, जो तकलीफ़ न पहुंचाये।

अदोष (सं॰ पु॰) न दोषः, नञ्-तत् अभावार्थे। १ दुरदृष्ट साधनका अभाव, ऐबका न होना। (त्रि॰) नास्ति दोषो यस्य यत्र वा। २ दोषशून्य, बेऐब। ३ निरपराध, बेगुनाह। ४ पापरहित, इज़ाबसे बाहर।

अदोस (हिं॰) अदोष देखो।

अदोह (सं॰ पु॰) दूध न निकलनेका समय, वह वक्त़ जिसमें दूध दूहा न जाये।

अदौरी (हिं॰ स्त्री॰) उड़दकी सूखी हुई बरी, मिथौरी।

अद्ग (सं॰ पु॰) अद्यते देवैः, अद-गन् कर्मणि। गन् गम्यद्योः। उण् १।१२०। पुरोडाश, होमके उपयुक्त कठिन वस्तु चरु आदि।

"होमं यत् कठिनं द्रव्यं पुरोडाशः स उच्यते।" (उज्ज्वलदत्त)

अद्ध—अर्द्ध देखो।

अद्धरज, अध्यर्युं देखो।

अद्धा (वै॰ अव्य॰) अत्-धा-क्विप्, अत्यते अत् तं सन्ततं गमनं ज्ञानं वा दधाति। (वा॰) १ इस मार्गसे, इसतरह। २ स्पष्ट रूप से, साफ़-साफ़। ३ निःसन्देह, बेशक। ४ अनुमानतः, अन्दाज़न। ५ सम्मुखमें, रूबरू। ६ अत्यन्त रूपसे, ज्य़ादा-ज्य़ादा। (हिं॰ पु॰) ७ अर्द्धखण्ड, आधा टुकड़ा। ८ पूरी