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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/३४८

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अद्रिका - बद्रिसानुजा

उतरना और पेशाबके गर्म रहने-जैसे प्रमेह और पित्तरोगके लक्षणोंको भो वह मिटा देता है । कभी- कभी उससे सोज़ाक बिलकुल अच्छा हो जाता है । दो वर्षके बालकको एक ही छोटी जड़ यथेष्ट होती है, तीन वर्षसे छः वर्षतकके बालकको एक बड़ी जड़ या दो छोटी-छोटी जड़ें देते हैं। पुरुषोंको चारसे छः तक छोटी-छोटी या तीन से पांच तक मोटी-मोटी जड़ें खिलाना चाहिये। कानमें दर्द और सूजन होनेसे इसकी पत्तीके गर्म अर्क में नमक डालके कानकी चारो ओर लगाते हैं। नीली अपराजिताको जड़ सांप काटनेसे ज़हरमोहरेका काम देती है ।

अद्रिका ( सं० स्त्री० ) १ धान्यक, धनिया । २ महानिम्ब ।
अद्रिकीला(सं० स्त्री० ) अद्रयः कुलाचलाः कोला: शङ्खव इव यस्याः, बहुव्री० । १ भूमि, पृथिवी, जमोन ।(पु० ) अद्रेः सुमेरोः कोल इव वा । २ विकुम्भ पर्वत ।
द्रितस्थली (सं० स्त्री० ) अप्सरा विशेष, एक - परीका नाम ।
अद्रिविद् ( सं० पु० ) वज्र, जो पर्वतको छेद डाले ।
अद्रिज (सं० क्लो० ) अद्रौ पव जायते, जन-ड । ३ गेरू । ( त्रि० ) १ शिलाजतु । २ तुम्ब ुरु वृक्ष । ४ पर्वतसे उत्पन्न, पहाड़से पैदा ।
अद्रिजतु (सं० क्लो० ) शिलाजतु ।
अद्रिजा सं० [स्त्री० ) १ गिरिराजकन्या, पार्वती । . २ गङ्गा । ३ सैंहलो वृक्ष। ( पु० ) ४ पर्वतजात : दावानल, पहाड़से पैदा हुई आग । ५ सूर्यजात हंस । ६ रूप, शक्ल । ७ आत्मा, रूह ।
अद्रिजूत (वै० त्रि०) पत्थरको रगड़से पैदा हुआ ।
अद्रितनया (सं॰ स्त्रो०) अस्तनया, ६- तत् । १ पार्वती । २ भागीरथी, गङ्गा । ३ तेईस वर्णका छन्द ।
अद्रिदुग्ध (वै० पु० ) अद्रिभिग्रवभिर्दुग्ध: अभिषुतः, ३-तत् । सोम ।
अद्रिद्रोणि (सं० नि० ) अद्रौणिरिव । पर्वत- सम्भव नदी, पहाड़से निकला दरया ।
अद्रिद्दिष् (सं० पु० ) अद्रिभ्यः देष्टि, द्दिष- क्विप् । सत्सुद्दिषुम इत्यादि । पा ३

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अद्रिनन्दिनी ( सं ० स्त्री० ) पर्वतकी कन्या, पार्वती ।
अद्रिपति (सं० पु० ) अद्रोणां पतिः, ६- तत् । पर्व - तोंका पति, हिमालय ।
अद्रिबर्हस (वै० त्रि० ) अद्रेर्बह इव बहऽस्य । १ पर्वत-जैसा उच्च, पहाड़को बराबर ऊंचा । २ अति- कठिन, निहायत सख्त ।
अद्रिबुध्न (वै० त्रि० ) अद्रेर्बुध्न इव बुध्नोऽस्य । १ अति- कठिन, निहायत सख़्त । २ पर्वतसे उत्पन्न, जो पहाड़में पैदा हुआ हो।
अद्रिभिदु (वै० पु० ) अद्रिं भिनत्ति, भिद- क्विप् । १ इन्द्र, जो पर्वतोंको अपने वज्रसे छेद डालते हैं। (त्रि०) २ पर्वतों को छेदनेवाला ।
अद्रिभू (सं० स्त्री० ) अद्रौ भवतीति, भू-क्किप् ; ७-तत् । अपराजितालता । अद्रिकर्णी देखो । २ पार्वती । (त्रि० ) ३ पहाड़ी, जो पर्व तपर उत्पन्न हुआ हो ।
अद्रिमाट (सं० पु० ) अद्रिर्मेघस्तज्जलं मिमीते, मातर्च् । १ मेघजल-निर्माता, बादलमें, पानी पैदा करनेवाला । ( त्रि० ) २ जिसकी माता पर्वत हो ।
अद्रिमाष (सं० पु० ) पहाड़ी उड़द ।
अद्रिमूर्धन् (सं० पु० ) पर्वतशिखर, पहाड़को चोटी ।
अद्रिराज (सं० पु० ) अद्रोणां राजा, टच् स० । हिमालय, जो सब पर्वतोंका राजा है ।
अद्रिवत् (वै० पु०) पर्वत या वज्र-जैसा सुसज्जित योद्धा ।
अद्रिवह्नि '::(सं० पु० ) पहाड़ी आग ।
अद्रिशय्य (सं० पु० ) महादेव, जो पर्वतपर शयन करते हैं ।
अद्रिशृङ्ग (सं० क्लो० ) पर्वतशिखर, पहाड़की चोटी ।
अद्रिषु(वै० पु० ) अद्रिभिः ग्रावभि: सुत: अभिषुतः षत्वम्, ३- तत् । सोम ।
अद्रिसंहत( सं० पु० ) अद्रिभिः ग्रावभिः संहतः अभिषुतः, ३- तत् । १ सोम । ( त्र० ) अद्रिरिव संहतं कठिनम् । २ अतिकठिन, निहायत कड़ा, पत्थर - जैसा ।
अद्रिसानु (वै० बि० ) पर्वतपर लड़खड़ानेवाला, जो पहाड़पर घिसलता रहे ।

{{Outdent| अद्रिसानुजा ( सं० स्त्री० ) त्रायमाणा, एक प्रकारका अञ्जीर।