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“स्तनयोर्गण्ड्योश्चैव षष्ठे चैव तथाधरे । पुरुषका रक्तवर्ण अधर सुलक्षण है । इसीतरह स्त्रियोंका पाटलवर्ण, पतला और मध्यरेखा-युक्त अधर अच्छा होता है । स्थूल और कृष्णवर्ण ओष्ठ अशुभ है,- “पाणिपादतलौ रक्तौ नेवान्तरनखानि च । ( क्ली० ) ३ मदनगृह, मदनालय, योनि । ४ नीच, कमीना | ५ नीचेको झुका हुआ । ६ कुत्- सित, हकौर । ७ विजित, शान्त । ८ पहला, पूर्वका ।
अधरकण्टक (सं० पु० ) दुरालभा । अधरकण्टिका (सं० स्त्री० ) क्षुद्र शतावरी, छोटी शतावर । अधरकण्ठ (सं० पु० - क्लो०) निम्नकण्ठ, नोचेको गर्दन | अधरकाय ( (सं० पु० ) शरीरका निम्नभाग, जिस्मका नीचेवाला हिस्सा । अधरज (हिं० स्त्री० ) १ ओष्ठको रक्ताभा, होंठोंकी सुर्खी । २ मिस्सोको घड़ी या पानको लाली, जो होंठोंपर जम जाती है । अधरतस्, अधरत्तात्, अधरस्तात्, अधरस्मात्, अधरात्, अधरेण (सं० अव्य) नीचे, निम्नप्रदेशमें । अधरपान ( स ं० क्लो०) श्रष्ठका चूसना, श्रष्ठचुम्बन ; stoका बोसा । अधरम (हिं० ) अधर्म देखो। अधरमकाय, अधर्मास्तिकाय देखो । अधरमधु (सं० क़ौ० ) अधरस्य मधु इव खादाति- अधररस, अधरामृत, वक्तासंव, लबको शोरोनी । शयात् । अधरस्तात्, अधरतस् 'देखो । अधरस्मात् अधरतस् देखो । अधरखस्तिक (सं० क्लो० ) अध: स्वस्तिक देखो। नौचेको तर्फ पैदा अधरः अस्त्यर्थं प्रति । अधरात् (सं० अव्य० ) उत्तराधरदक्षिणादातिः | ५| ३ | ३४ 1 अधरतः, अधरेण, अधस्तात् ; नीचेसे, निम्नभागसे । अधरात्तात् (वै० १० अव्य० ) नीचे, निम्नभागमें । अधराधर ( सं० पु० ) निम्न ओष्ठ, नोचेका होंठ ; लब | अधरामृत (सं० क्लो० ) अधरस्य अमृतमिव । अधर- सुधा, होंठका अमृत, शोरोनी-ए-लब । भागवतमें लिखा है, - “सिञ्चाङ्गनस्त्वदधरामृतपूरकेण हासावलोककलगीतज हृच्छयाग्निम् | १०|२८|३२| 'हे कृष्ण ! आपको सहास्यदृष्टि और आपके मधुर सङ्गीतसे हमारी जो मन्मथाग्नि जल उठी है, उसे आप अधरामृत पिला निर्वाण कीजिये ।' अधरारणि (वै० स्त्री० ) यज्ञ करनेको अग्नि उत्पन्न करनेके लिये जो दो लकड़ियां घिसी जाती हैं, उनमें छोटी लकड़ी । अधरावलोप काटना । (सं० पु० ) अधरखण्डन, होंठका अधरीकृत (सं० त्रि०) १ विजित, हारा हुआ। २ अकर्मण्य बनाया या नाकाम किया गया । अधरीण (सं० ति० ) अधरे भवः, अधर-ख । |