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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/३५९

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अधर्मचारिन्—अधश्चौर
धर्मकर एक काल्पनिक उपाय द्वारा मनको समझा लेता है। ऐसे ही कूट तर्क खड़ेकर निरस्तिवादी धर्माधर्मको नहीं मानते।

२ ब्रह्माके एक पुत्र। (वायु और ब्रह्माण्डपुराण १०।१ ।) अधर्मकी भार्याका नाम मिथ्या था, जिसने माया नामकी कन्या और दम्भ नामके पुत्रको उत्पन्न किया। निर्ऋतिने अपुत्रा होनेके कारण माया और दम्भ दोनोको ले लिया था। (श्रीभागवत ४२) श्रीमद्भागवत और विष्णुपुराण में इसका उल्लेख नहीं, कि अधर्म किसके पुत्र थे। टीकाकार श्रीधरस्वामीने निम्नलिखित शुकोक्त वचन अवलम्बनकर अधर्मको ब्रह्माका ही पुत्र बताया है,—

"धर्मः स्तनादृदक्षिणतो यत्र नारायणः स्वयं।
अधर्मः पृष्ठतो यस्य मृत्यर्लोकभयङ्करः॥"

(विष्णुपुरास्प्तकी टीका १।७।२९।) अधर्म शब्द पुराणादिमें रूपक भावसे व्यवहृत है। फलतः यह एक मनोवृत्ति है जो अनिष्ट कार्योत्पादक होनेसे मृत्यु, पातक प्रभृति नामों पर प्रयोग की गई है। ३ सूर्यके एक सहचरका नाम।

अधर्मचारिन् (वै॰ त्रि॰) धर्मं चरति अनुतिष्ठति, चर-णिनि; न धर्मचारी, ६- तत्। पापाचारी, धर्मका अनुष्ठान न करनेवाला, जो मज़हबके खिलाफ़ काम करे।

अधर्मतस्, अधर्मतः (सं॰ अव्य॰) अधर्मसे, झूठ-मूठ, बेइन्साफ़ीसे।

अधर्मदण्डन (सं॰ क्ली॰) अधर्मका दण्ड, बेइन्साफ़ी की सज़ा।

अधर्ममय (सं॰ त्रि॰) अधर्मः प्रकृतः, प्राचुर्यार्थे मयट्। तत्प्रकृतवचने मयट्। पा ५।४।२१। पापमय, प्रचुर पापयुक्त, पापपूर्ण; लामज़हब, जो बहुत बुरा काम करे। (स्त्री॰) अधर्ममयी।

अधर्मात्मन् (सं॰ त्रि॰) अधर्मः प्रधान: आत्मा यस्य। अत्यन्त अधर्मचारी, महा पापिष्ठ, दुराचारी, कुमार्गी, जिसके हृदयमें पाप भरा हो; इज़ाब से भरपूर।

अधर्मास्तिकाय (सं॰ पु॰) अधर्मका विभाग, ईज़ाबकी मद। जैनशास्त्रमें जो छः द्रव्य माने गये हैं, उनमें

एक अधर्मास्तिकाय भी है। इसमें नित्यता और रूप नहीं और यह जीव और पुद्गलकी स्थितिको साहाय्य देता है। इसमें स्कन्ध, देश और प्रदेश नामक

तीन भेद रहते हैं।

अधर्मिन् (सं॰ त्रि॰) अधर्म-इनि अस्त्यर्थे। अधार्मिक, अधर्मात्मा, पापाचारी; गुनहगार इज़ाब करनेवाला।

अधर्मिष्ठ (सं॰ त्रि॰) अतिशायने अधर्म-इष्ठन् भत्वाद् टिलोपः। अतिशयने तमविष्ठनौ। पा ५।३।५५। अतिशय पापयुक्त, अतिशय अधर्मशील, महापापी।

अधर्मी (हिं॰ पु॰) पाप करनेवाला व्यक्ति, पापी मनुष्य।

अधर्म्य (सं॰ त्रि॰) न धर्माय हितं यत्। पापोत्-पादक, अन्याय-सम्बलित, नियम या धर्म विरुद्ध, पापमय ; इज़ाब से भरा, लामज़हब, गुनहगार।

अधर्षणी (सं॰ त्रि॰) प्रचण्ड, पुरज़ोर; प्रबल, ताक़तवर; निर्भय, बेख़ौफ़; जो दबाया या डराया न जा सके, जिसपर कोई प्रभाव डाल न सके, जीतनेके अयोग्य।

अधवा (सं॰ स्त्री॰) न विद्यमानो धवः पतिर्यस्याः, बहुव्री॰। विधवा स्त्री, मृतभर्तृका, रांड, जिसका पति विद्यमान न हो, बेशौहरकी औरत।

अधवारी (हिं॰ स्त्री॰) वृक्षविशेष, एक पेड़ या दरख्त। इसका काष्ठ भवन और साजसज्जाके निर्माणमें लगता है।

अधश्वर (सं॰ पु॰) अधः अधोभागे खनित्वा चोरयति चोर एव स्वार्थे अण्। सेंध लगानेवाला चोर।

अधश्चौर (सं॰ पु॰) अधः अधोभागे खनित्वा चोरयति चोर एव स्वस्थ अण्। सेंध मारनेवाला चोर, जो मकानकी दीवार काटकर चोरी करे।

पहले भारतवर्षमें सभी विद्याओं की विशेष रूपसे उन्नति हुई थी। लोग कहा करते हैं,—'यदि मार न पड़ती, तो चोरी जैसा कोई रोजगार न था।' उस समय इस देशमें चोरविद्याकी भी विशेष उन्नति देख पड़ती थी। चोर कितना ही हिसाब-किताब बना वैज्ञानिक उपाय द्वारा गृहस्थ के घर में सेंध लगाते