| नहीं। (पु॰) २ अधिदेवता, प्रधान देव। ३ परमेश्वर। ४ राजा, बादशाह। ५ रक्षक, परवरिश-कुनिन्दा। (स्त्री॰) अधिष्ठात्री।
अधिष्ठान (सं॰ क्ली॰) अधि-स्था-ल्युट् षत्वम्। १ स्थिति, अवस्थान; मुक़ाम, पड़ाव। २ वासस्थान, रहनेकी जगह। ३ नगर, शहर। ४ आश्रय, सहारा। ५ भ्रमका आरोप करनेवाली वस्तु, वह चीज़ जिसमें दूसरी चीज़ भूलसे देखी जाये; जैसे मरीचिका में जल, रस्मीमें सांप और सांपमें चांदी। ६ सांख्यमतसे — भोक्ता और भोग्यका संयोग; जैसे—आत्मा, शरीर और इन्द्रियां विषयसे संलग्न हैं। नियन्तृत्व, अधिकार, सरदारी। ८ चक्र, पहिया। ९ प्रभाव। १० पहुंच, पासका खड़ा होना। ११ आशीर्वाद, दुआ। अधिष्ठान-शरीर (सं॰ पु॰) वह सूक्ष्म देह जिसमें मृत्युके पीछे आत्मा पितृलोकमें रहता है, मृत्युके बाद पितृलोकपर रहनेको आत्माका सूक्ष्म शरीर। अधिष्ठापक (सं॰ त्रि॰) शासन, पर्यावेक्षण या रक्षण करनेवाला, जो हुकूमत, निगहबानी या हिफ़ाजत रखे। अधिष्ठित (सं॰ त्रि॰) अधि-स्था-क्त कर्मणि। १ अध्युषित, बसा हुआ। २ निर्वाचित, चुना गया। ३ नियुक्त, मुक़रर। ३ पर्यावेक्षित, देखा-भाला। ४ नियमपूर्वक सञ्चालित, क़ायदेसे चलाया गया। ५ पर्यावेक्षक, देखभाल रखनेवाला। अधिस्त्रि (सं॰ अव्य॰) स्त्री या पत्नीके विषय में, औरत या जोड़ू की बाबत। अधिस्त्री (सं॰ स्त्री॰) श्रेष्ठ या सुप्रसिद्ध स्त्री, ऊंचे दरजेकी या मशहूर औरत। अधिहरि (सं॰ अव्य॰) अव्ययी॰। हरिको अधिकार कर, भगवान्के विषयमें। अधीकार, अधिकार देखो। अधीत (सं॰ क्ली॰) अधि-इङ्-क्त भावे। १ अध्ययन, मुतालह। कर्मणिक्त। २ कृताध्ययन, पठित, पढ़ा या मश्क किया हुआ पाठ। (त्रि॰) २ जिसे अध्ययन कर चुके हों, मुतालह किया हु। |
अधीति (सं॰ स्त्री॰) अधि इङ्-क्तिन्। १ अध्ययन, मुतालह, पढ़ाई। (वै॰) २ इच्छा, ख़्वाहिश। ३ स्मृति, याददाश्त।
अधीतिन् (सं॰ त्रि॰) अधीतमनेन, अधीत-इनि। इष्टादिभ्यश्च। पा ५।२।८८ । अध्ययनविशिष्ट कृताध्ययन; ख़ूब पढ़ा हुआ, जिसका पढ़ना पूरा हो चुका हो। अधीत्य (सं॰ अव्य॰) अध्ययन करके, पढ़के। अधीन (सं॰ त्रि॰) अधिगतमिनं प्रभुम्, अत्या॰ स॰। तदधीनवचने। पा ५।४।५४ । १ आयत्त, दबैल। २ वशतापन्न, मातहत। ३ वाध्य, लाचार। यह शब्द प्रायः समासके अन्तमें रहता है। अधीनता (सं॰ स्त्री॰) वाध्यता, मातहती। अधीनत्व (सं॰ क्ली॰) अधीनता देखो। अधीमन्थ, अधिमन्थ देखो। अधीयत् (सं॰ त्रि॰) १ पढ़ता हुआ। २ स्मरण करता हुआ। अधीयान (सं॰ पु॰) १ विद्यार्थी, तालिबेइल्म। २ वेद पढ़ने या पढ़ानेवाला। अधीर (सं॰ त्रि॰) न धीरं धैर्यान्वितम्, नञ्-तत्। १ अस्थिर, चञ्चल; चुलबुला, बेसब्र। २ कातर, व्याकुल, परेशान्, घबड़ाया हुआ। ३ असन्तुष्ट, जो आसूदा न हो। ४ मूर्ख, बेवकूफ़। (पु॰) ५ अयोग्य वैद्य, नालायक, हकीम। अधीरता (सं॰ स्त्री॰) धैर्यका अभाव, बेसब्री। अधीरा (सं॰ स्त्री॰) १ विद्युत्, बिजली, जो ठहरती नहीं। २ मानकी अवस्थामें मध्या और प्रगल्भा नायिका विशेष। अधीरा नायिका ज्येष्ठा और कनिष्ठाके भेदसे दो प्रकारकी होती है। यह मानके समय नायकके प्रति अव्यङ्ग्य कोप दिखाती और परुषवाक्यप्रयोग, तर्जन-गर्जन और ताड़ना किया करती है,— रमि आये कहु वामसों अवशि आज घन श्याम। अधीवास (वै॰ पु॰) अधि-वस-घञ् आच्छादने। उपरि सर्वतः सञ्छाद्यतेऽनेनेत्यधीवासो महाकञ्चु कः।" (काव्या॰) महाकञ्चुक, अबरक़। |
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अधिष्ठान—अधीवास