| अधोश्रपित्त, अधोरक्तपित्त देखो।
अधोऽखम् (सं॰ अव्य॰) अश्वके निममें, घोड़ेसे नीचे। अधौड़ी (हिं॰ स्त्री॰ ) १ चरसेकी आधी पट्टी, पूरे चमड़ेका आधा हिस्सा। २ स्थूल त्वक्, मोटी ख़ाल। 'नरी' अधौंड़ीसे पतली रहती है। अध्मान (सं॰ पु॰) रोगविशेष, पेटकी एक बीमारी। यह पेटको फुलाता, उसमें दर्द पैदा करता और अधोवायुको (पाद) रोकता है। अध्यंस (सं॰ त्रि॰) स्कन्धोपरि अवस्थित, कन्धेपर रखा हुआ। अध्यक्त (सं॰ त्रि॰) सुसज्जित, तय्यार। अध्यक्ष (सं॰ त्रि॰) अधिगतोऽचम्, अत्या॰ तत्। अधिगतं सर्वविषये दत्तमक्षि येन, अत्या-बहुव्री॰। १ प्रधान कर्मकर्त्ता, कर्मके प्रधान सम्पादक; अफ़सर, नायक, मुखिया। (पु॰) अधिगतं अक्षं इन्द्रियम्, अत्या॰-तत्। २ प्रत्यक्ष ज्ञान, आंखों देखी बात। ३ प्रत्यक्षसाक्षी, चश्मदीद गवाह। ४ इन्सपेकृर, सुपरिण्टेण्डे ण्ट, जो कामकी देखभाल रखे। ५ शरीर का वृक्ष, खिरनी। अध्यक्षर (सं॰ अव्य॰) अक्षरको अधिकार कर, हर्फ़ बहर्फ़। २ सब अक्षरोंपर। अध्यग्नि (सं॰ अव्य॰) १ अग्नि के समीप, आगके पास। (क्ली॰) २ विवाहकालमें अग्निके समीप स्त्रीको दान किया जानेवाला धन, स्त्रीधन; माल जो शादीके वक्त, आगके पास औरतको दिया जाता है। अध्यग्निकृत, अध्यग्निउपागत (स॰ क्ली॰) विवाहमें स्त्री॰ को दिया जानेवाला धन, शादी में जो दौलत औरतको दी जाती है। अध्यच्छ, अध्यक्ष देखो। अध्यञ्च (सं॰ त्रि॰) अधि-अञ्चु गतौ क्विप्। अधिगामी, अधिगत; आला, ममताज़; बड़ा, पहुंचा हुआ। अध्यण्डा (सं॰ स्त्री॰) अधिकं अण्डमिव फलं यस्याः, बहुव्री॰। १ कपिकच्छ, कोंच। २ तलिश, पनि-आमलक। ३ कोकिलाक्ष, तालमखाना। |
अध्यधिक्षेप (सं॰ पु॰) अधिकोऽधिक्षेपः, प्रादि-स॰। अतिशय तिरस्कार, अत्यन्त निन्दा; हृदसे ज्य़ादा तानाज़नी या हिक़ारत।
अध्यधीन (स॰ त्रि॰) १ अत्यन्त पराधीन, हदसे ज्य़ादा मातहत। ३ दासके गर्भसे उत्पन्न, गुलामके नुत्फे़ से पैदा हुआ। अध्यय (सं॰ पु॰) अधि-इङ्-अच् भावे। १ अध्ययन, मुतालह, लिखा-पढ़ी। अधि-इक्-अच्। २ स्मरण, याद। ३ पाठ, सबक़। ४ भाग, मुक़ालह। ५ व्याख्यान, वाज़, लेक्चर। अध्ययन (सं॰ क्ली॰) अधि-इङ्-ल्युट्। पठन, मुतालह। यह शब्द प्रधानतः वेद पढ़ने के अर्थ में आता, जो ब्राह्मणोंके छः कर्मों में एक मुख्य कर्म है। २ गुरुके उपदेशानुसार उच्चारण, जो तलफ्फुज, उस्तादके बताने मुताबिक किया जाये। अध्ययनतपसी (सं॰ क्ली॰) अध्ययन और तप, मुतालह और नफ़संकुशी, पढ़ाई और मनकी मराई। अध्ययनपुण्य (सं॰ क्ली॰) अध्ययन से प्राप्त धार्मिक गुण, जो मज़हबी लियाक़त पढ़नेसे आये। अध्ययनीय (सं॰ त्रि॰) अधययनयोग्य, पढ़ने क़ाबिल। अध्रार्ध (सं॰ त्रि॰) अधप्रारूढं अर्धं यस्मिन्। अध्यर्धपूर्वद्विगोर्लुग् संज्ञायाम्। पा ५।१।२८ ; विभाषाकार्षापणसहस्राभ्याम्। पा ५।१।१९। १ सार्ध, अर्धविशिष्ट; डेढ़। २ जगत्को रखने और बढ़ानेवाला वायु जो सर्वत्र व्यापक है। अधार्धक (सं॰ त्रि॰) १ सार्द्ध-परिमित, डेढ़के तख्म़ीनेका। २ अर्धविशिष्ट मूल्यका जिसका दाम डेढ़ हो। अध्यर्धकंस (सं॰ क्ली॰) १ सार्धकंस, डेढ़ प्याला। (त्रि॰) २ सार्ध कंसपरिमित, डेढ़ प्यालेकौ नापका। ३ अर्धविशिष्ट कंसके मूल्यका, जिसका दाम डेढ़ प्यालेके बराबर हो। अध्यर्धकाकिणीक (सं॰ त्रि॰) सार्ध-काकिणी-परिमित, तौलमें डेढ़ काकिणीके बराबर। अर्ध-विशिष्ट काकिणीके मूल्यवाला, जिसका दाम डेढ़ |
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अधोश्रपित्त—अध्यर्धकाकिणीक